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Bhasha Vigyan

by Shyam Sundar Das
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789389742336
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 252
  • Original Price: INR 600.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

प्रस्तुत पुस्तक में भाषाओं के रूपात्मक वर्गीकरण, वंशानुक्रम वर्गीकरण, ध्वनियों का वर्गीकरण, विश्लेषण, व्यंजनों का वर्गीकरण, स्वरों का वर्गीकरण, ध्वनि नियम, रूप विचार, रूप विकार, अर्थ विचार, अभिधालक्षणा-व्यंजना शब्द शक्ति, ब्राह्मी लिपिख-रोष्ट्री लिपि, देवनागरी लिपि, आर्यों की भाषाएँ तथा हिन्दी स्वर और व्यंजनों का विस्तार से भाषा वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। भाषा विज्ञान के माध्यम से ही परस्पर भावों की, विचारों की अभिव्यक्ति उसका विनिमय, आदान-प्रदान तथा रूप-स्वरूप परिवर्तन को समझा जा सकता है। भाषा विज्ञान को समझे बिना हमें भाषा की उत्पत्ति भाषा का स्वरूप, भाषा की प्रकृति, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया-विशेषण, विभक्तियाँ, प्रत्यय, लिंग, वचन, मुहावरे आदि का बोध नहीं हो सकता है। यह कृति न केवल भाषा का अध्ययन-अध्यापन करने वालों के लिए अपितु शासन-प्रशासन के सूत्रधार, मुद्रित माध्य और दृश्य-श्रव्य माध्यों के कर्मियों के लिए अत्यन्त उपयोगी है, अतः यह कृति पठनीय ही नहीं संग्रहणीय भी है। यह कृति न केवल भाषा का अध्ययन-अध्यापन करने वालों के लिए अपितु शासन-प्रशासन के सूत्रधार, मुद्रित माध्य और दृश्य-श्रव्य माध्यों के कर्मियों के लिए अत्यन्त उपयोगी है, अतः यह कृति पठनीय ही नहीं संग्रहणीय भी है।

डॉ. श्यामसुन्दर दास जन्म: सन् 1875 ई. काशी में शिक्षा: 1897 ई. में बी.ए. पास किया था। गतिविधियाँ 1899 ई. में हिन्दू स्कूल में दिनों तक अध्यापक थे। उसके बाद लखनऊ के कालीचरन स्कूल में बहुत दिनों तक हेडमास्टर रहे। सन् 1921 ई. में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए। प्रारम्भ से ही हिन्दी के प्रति आपकी अनन्य निष्ठा थी। नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना (16 जुलाई, सन् 1893 ई.) आपने विद्यार्थी-काल में ही अपने दो सहयोगियों रामनारायण मिश्र और ठाकुर शिवकुमार सिंह की सहायता से की थी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आने के पूर्व आपने हिन्दी साहित्य की सर्वतोमुखी समृद्धि के लिए न्यायालयों में हिन्दी प्रवेश का आन्दोलन (1900) ई.) हस्तलिखित ग्रन्थों की खोज (1899 ई.), हिन्दी शब्द सागर का सम्पादन (1907 ई.) आर्य भाषा पुस्तकालय की स्थापना (1903 ई.), प्राचीन महत्त्वपूर्ण अन्यों का सम्पादन सभा-भवन का निर्माण (1902 ई.) "सरस्वती पत्रिका का सम्मादन (1900 ई.) तथा शिक्षास्तर के अनुरूप पाठ्य पुस्तकों का निर्माण कार्य आरम्भ कर दिया था। आप आजीवन एक गति में साहित्य सेवा में रत रहे। साहित्य सेवा: 'नागरी वर्णमाला', 'हिन्दी हस्तलिखित अन्यों का वार्षिक खोज विवरण', 'हिन्दी हस्तलिखित अन्यों की खोज का प्रथम त्रैवार्षिक विवरण', 'हिन्दी कोविद रत्नमाला भाग-1, 2, 'साहित्यालोचन', 'भाषा विज्ञान", "हिन्दी भाषा का विकास', 'हस्तलिखित हिन्दी अन्थों का संक्षिप्त विवरण', 'गद्य कुसुमावली', 'भारतेन्दु हरिचन्द्र', 'हिन्दी भाषा और साहित्य, गोस्वामी तुलसीदास, रूपक रहस्य'", "भाषा रहस्य" भाग-1, "हिन्दी के निर्माता भाग-1, 2, "मेरी आत्म कहानी । निघन: सन् 1945 ई. ।

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