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Aadyant

by Dharamveer Bharti
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170556466
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 84
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

भारती जी की इन तमाम कविताओं में मार्क्सवाद से प्रभावित किशोरमन, देशभक्ति से ओतप्रोत, पूँजीवादी व्यवस्था के प्रति विद्रोही, ग़रीबी, भूख और गुलामी से व्याप्त कवि हृदय के साथ ही साथ उम्र के तकाजे से जीवन में आये प्रेम के प्रति आकृष्ट युवा होते मन की आहटें भी सुनाई देती हैं। यही वह उम्र रही होगी जब उनके प्रथम उपन्यास, 'गुनाहों का देवता' की कथावस्तु भी भीतर-ही-भीतर आकार लेना शुरू हुई होगी। उम्र के उस पड़ाव पर निराशा बड़ी जल्दी घेरती है 'मैंने प्यार किया — ग़लती की' या फिर 'प्रीति कर पछता रहा हूँ' जैसी कविताएँ उस समय के समाज में जीते युवक की स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं।अजब मज़ेदार समय था वह— उस ज़मान में प्यार की हिलोरें लेने के साथ ही साथ निराशा और विरह भी मन में घर करने लगते थे और कवि हृदय लोग बड़े शहीदाना अन्दाज़ में विरह और दुःख व घुटन को जीते चलते थे। 'जिस दिन से तुमसे प्यार हुआ नयनों में छाये आँसू कन, भर गया दर्द से कोमल मन!'उस समय कितने स्तरों पर किस तरह भारती के कवि मन का निर्माण हो रहा था, यह जानने और समझने के लिए बड़ी रोचक सामग्री प्रस्तुत करती हैं ये कविताएँ।

धर्मवीर भारतीबहुचर्चित लेखक एवं सम्पादक डॉ. धर्मवीर भारती 25 दिसम्बर, 1926 को इलाहाबाद में जनमे और वहीं शिक्षा प्राप्त कर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन-कार्य करने लगे। इसी दौरान कई पत्रिकाओं से भी जुड़े। अन्त में 'धर्मयुग' के सम्पादक के रूप में गम्भीर पत्रकारिता का एक मानक निर्धारित किया।डॉ. धर्मवीर भारती बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध, आलोचना, अनुवाद, रिपोर्ताज आदि विधाओं को उनकी लेखनी से बहुत कुछ मिलाहै। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं : साँस की क़लम से, मेरी वाणी गैरिक वसना, कनुप्रिया, सात गीत-वर्ष, ठण्डा लोहा, सपना अभी भी, सूरज का सातवाँ घोड़ा, बन्द गली का आख़िरी मकान, पश्यन्ती, कहनी-अनकहनी, शब्दिता, अन्धा युग, मानव - मूल्य और साहित्य और गुनाहों का देवता।भारती जी 'पद्मश्री' की उपाधि के साथ ही 'व्यास सम्मान' एवं अन्य कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से अलंकृत हुए।4 सितम्बर, 1997 को मुम्बई में देहावसान।

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