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Aankhon Bhar Aakash

by Nida Fazli
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170557654
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 164
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

आँखों भर आकाश' देवनागरी में आनेवाला निदा फ़ाज़ली का ऐसा संकलन है जिसमें उनकी अब तक की अधिकांश कविताएँ निरखी और परखी जा सकती हैं। इसमें पिछले पच्चीस बरसों की उसकी सोच-समझ और सरोकार का फैलाव है और अब तक आये तीनों मजमूओं में से खुद लेखकीय चुनाव-इसीलिए एक अर्थ में यह निदा की प्रतिनिधि कविताओं का संग्रह भी कहा जा सकता है। इसमें ग़ज़लें भी हैं, नज़्में भी और कुछ गीत भी। शुरू का दौर भी है, बीच का भी और इधर का भी, लेकिन जो बात अव्वल से अब तक मुसलसिल बनी हुई है वह है कवि का हर एक के लिए एक बेलौस लगाव-कुछ लोगों को यह सिनिसिज़्मकी हदों को छूने वाला भी लग सकता है लेकिन शायद यह हर आधुनिक रचनाकार की मजबूरी है कि वह माँ, बाप, भाई, बहन, परिवार, स्त्री प्रेम, समाज और देश, किसी को भी जस-का-तस स्वीकार नहीं करता। वह उन्हें सन्देह के कठघरे में धकेलकर सवाल करता है-ऐसे कि पहले वह सवाल पलटकर एक-एक कर ख़ुद उसका गिरेबान पकड़ ले और फिर अन्ततः समाज का होकर रह जाये। यही वह सच है जिसे अपने समय का हर सही रचनाकार अपने अनुभव की रोशनी में ही देखना और परखना चाहता है जैसाकि ख़ुद निदा फ़ाज़ली का ही एक दोहा है :वो सूफ़ी का क़ौल हो या पण्डित का ज्ञान, जितनी बीते आप पर उतना ही सच मान-शानी

निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्तूबर 1938 को दिल्ली में हुआ। उनका आरम्भिक जीवन ग्वालियर में गुज़रा। ग्वालियर में रहते हुए उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। एम.ए. उर्दू यहीं से किया। ग्वालियर में रहते हुए उन्होंने उर्दू अदब में अपनी पहचान बना ली थी और 1960 के दौर के वो एक महत्त्वपूर्ण शायर के रूप में स्थापित हो चुके थे। बाद में वो मुम्बई चले गये। निदा फ़ाज़ली की शायरी का पहला संग्रह 'लफ़्जों का पुल' छपते ही उन्हें भारत-पाकिस्तान में जो शोहरत हासिल हुई, ऐसी शोहरत कम शायरों को हासिल होती है।'मुलाक़ातें' किताब के लिए वो काफ़ी विवादास्पद और चर्चित भी रहे। 'खोया हुआ-सा कुछ' उनकी शायरी का वो महत्त्वपूर्ण संग्रह है जिस पर उन्हें 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनकी शायरी के कुछ और महत्त्वपूर्ण संग्रह-मोरनाच, आँखों और ख़्वाबों के दरमियाँ, ज़िन्दगी की तरफ़ तथा शहर में गाँव, तमाशा मेरे आगे (संस्मरण), आँखों भर आकाश, चेहरे। उनके आत्मकथात्मक उपन्यास 'दीवारों के बीच' (खण्ड एक), दीवारों के बाहर (खण्ड दो) अनूठे गद्य और प्रयोगधर्मिता की मिसाल हैं। निदा फ़ाज़ली फ़िल्म उद्योग से जुड़े रहे। उन्होंने देश-विदेश की अनेक साहित्यिक यात्राएँ कीं। उनकी मृत्यु 8 फ़रवरी 2016 को हृदय-गति रुकने से मुम्बई में हुई।

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