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Aathwein Maale Par Swadhishthan

by Chinmayi Tripathi
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789357758512
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 88
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

आठवें माले पर स्वाधिष्ठान काव्य-संकलन चिन्मयी त्रिपाठी की अन्तर्यात्रा का वह पड़ाव है जहाँ चेतना कुछ देर की ख़ातिर 'न ययौ न तस्थौ' की स्थिति में पड़ जाती है और सहसा समझ में नहीं आता, कहाँ से ढूँढ़ें। अक्सर यह थकमकाहट एक बड़ी छलाँग की पूर्वपीठिका सिद्ध होती है, और मुझे पूर्वापर अनुभवों से ऐसा लगता है कि चिन्मयी के लिए तो यह एक ख़ास तरह के उन्नयन की पूर्वसूचना है ही क्योंकि सुरों की तरह, साँसों की तरह इनकी दृष्टि भी एक लय में सध रही है जो शायद इस सृष्टि की मूल लय है : अपने से बाहर जाकर, रामझरोखे बैठकर जग का मुजरा लेती हुई उल्टे पाँव यह वापस अपनी ख़ुदी में, अन्तस्थ आत्मन् में लौट आती है।पूरा व्यक्तित्व जब स्पन्दन की एक विराट लहर हो जाये तो यात्रा पूरी हो जाती है। यह संग्रह बहिर्मुखी है– एक खोई हुई साँस जैसे स्वयं को ढूँढ़ने बाहर निकली है - संसार के हर उस प्राणी में अपना निवेश करती हुई जो दुखी है, और अपने भोलेपन में अवाक् भी कि लाख दरवाज़ा लगाओ, रोज़ एक दुःख अनाथ बच्चे-सा सामने खड़ा क्यों मिलता है। तरह-तरह के अनादृत लोग, जिनकी तनख़्वाह उनकी मेहनत और योग्यता के मुकाबले कुछ भी नहीं; कुशल शिल्पी, कारीगर, शास्त्रीय गायक, वादक, स्त्रियाँ, दर्जी और जूता गाँठने वाले जो व्यर्थ ही रोब गाँठने वाले लोगों से परेशान हैं। जैविक मातृत्व से परे जाकर सारी सृष्टि को माँ की नज़र से देखने का यह जज़्बा ही तो साहित्य और संगीत की उँगली चाहे-अनचाहे थमा जाता है।- अनामिका

चिन्मयी त्रिपाठी व्यवसाय प्रशासन में स्नातक हैं और लगभग आठ वर्षों तक एक म्यूज़िक कंपनी की सह-संस्थापक के रूप में कॉर्पोरेट जगत् में काम कर चुकी हैं। पिछले कई वर्षों से संगीत और साहित्य के क्षेत्र में ही काम कर रही हैं।सागर, मध्य प्रदेश में जन्मी चिन्मयी अपनी पढ़ाई पूरी करने और दिल्ली में कई सालों तक काम करने के बाद अब मुम्बई में रहती हैं। वह 'काव्यराग' नामक एक यूट्यूब चैनल की स्थापक हैं जिस पर हिन्दी की कालजयी कविताओं को संगीतबद्ध कर प्रस्तुत किया जाता रहा है। इसके अन्तर्गत महादेवी वर्मा, निराला, हरिवंशराय बच्चन जैसे मूर्धन्य कवियों से लेकर विनोद कुमार शुक्ल, अनामिका और नरेश सक्सेना जैसे हमारे समय के वरिष्ठ कवियों तक की कविताओं को अनूठे ढंग से संगीत में पिरोया गया है । 'काव्यराग' के अन्तर्गत चिन्मयी देश-विदेश में अपने संगीत की प्रस्तुति दे चुकी हैं और अपने इस प्रयोग के लिए कई सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं।पिछले वर्ष अपने पहले कविता-संग्रह अपनी कही के लिए चिन्मयी को 'अमर उजाला थाप पुरस्कार' से नवाज़ा गया। कुछ फ़िल्मों और वेब शोज़ के लिए उन्होंने हाल में गाने कंपोज़ किये हैं।चिन्मयी की कविताओं में आपको शहरी जीवन में रमे हुए लोगों का अन्तर्द्वन्द दिखेगा जिसमें एक तरफ़ है भौतिकवाद, ज़मीनी सच्चाई और दूसरी तरफ़ अध्यात्म, अपनी निजी खोजबीन और प्रकृति की ओर झुकाव। नये और पुराने के बीच की रस्साकशी भी है जिसमें परम्परा में जो कालजयी है वो बचता है और रिक्त स्थान को नयी धारा भर देती है, इसी उथल-पुथल से फिर कविता निकलती है।यूटूयूब : www.YouTube.com/KavyaRaag

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