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Adab Se Muthbhed

by Oma Sharma
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789347043284
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 208
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 210 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

अदब से मुठभेड़में हमारे वक्त के पाँच महत्त्वपूर्ण रचनाकारों—राजेन्द्र यादव, मन्नू भंडारी, प्रियंवद, शिवमूर्ति और मक़बूल फ़िदा हुसेन—से ओमा शर्मा के अलग-अलग लिए गए साक्षात्कार संकलित हैं। यह किताब सिर्फ इसलिए महत्त्वपूर्ण नहीं है कि ये व्यक्तित्व महत्त्वपूर्ण हैं, दरअसल यह किताब, साक्षात्कारकर्ता के अनचाहे, अनजाने ही साक्षात्कारों की एक सैद्धान्तिकी जैसी बन गई है। जैसे राजेन्द्र यादव से बातचीत में एक बिन्दु वह भी आता है जब यह राजेन्द्र यादव का राजेन्द्र यादव से साक्षात्कार बन जाता है। इसी तरह हुसेन से बातचीत के दौरान उनकी जानी-पहचानी छवि के बरक्स, हमारी मुलाकात एक कमजोर, वेध्य, गुस्सैल हुसेन से होती है—उस जलावतनी के एहसास के चलते भी, जो पार्श्व में एक उदास धुन सरीखा बजता रहता है।

मन्नू भंडारी से साक्षात्कार जैसे मन्नू जी की ही कोई लम्बी कहानी हो—एक घरेलू दिखने वाली, बौद्धिक तड़क-भड़क से दूर, सीधी-सादी संकोचशील लेखिका, उस वक्त के नामचीन लेखकों के बहुत करीब रहते हुए भी उनसे बेपरवाह, सिर्फ अन्तःप्रेरणा से मार्गदर्शन लेती, एक तनाव भरे दाम्पत्य के बीच खामोशी से अपना काम करते हुए, किस प्रकार ‘महाभोज’ और ‘आपका बंटी’ जैसे उपन्यासों और बेशुमार कहानियों में अपने समय का एक विश्वसनीय साक्ष्य रच पाती है, यह जानना एक मार्मिक अनुभव है।

जिस प्रकार कलाकार या लेखक की दुनिया अलग होती है, उसी तरह यहाँ तक जाने के रास्ते भी समान नहीं होते। अगर प्रियंवद की दुनिया तक जाने का रास्ता सुरंग सरीखी व्यूहात्मक और उलझी हुई गलियों से गुजरता है तो शिवमूर्ति के सन्दर्भ में यह एक तपती हुई पगडंडी है, बीच-बीच में गुम हो जाती हुई। शिवमूर्ति इस बातचीत में अपने अन्तर्मन को जिस तरह अनावृत्त करते हैं, वह अन्यत्र दुर्लभ है। यहाँ भी बीच-बीच में विस्फोट की तरह आनेवाले ऐसे लम्हे बेशुमार हैं जब इस महादेश का विकराल और लोमहर्षक यथार्थ, सर्वदा घात लगाए—जैसे अचानक सामने आता और आपके कन्धे बेरहमी से झिंझोड़ देता है।

—योगेन्द्र आहूजा

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