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Adhikar: Mahasamar- 2

by Narendra Kohli
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789350728925
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 400
  • Original Price: INR 499.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): Fairy Tales, Folk Tales, Legends & Mythology

महासमर – अधिकार - 'महाभारत' की कथा पर आधृत उपन्यास 'महासमर' की दूसरी कड़ी 'अधिकार' यशस्वी कथाकार नरेन्द्र कोहली की महत्त्वपूर्ण रचना है। 'अधिकार' की कहानी हस्तिनापुर में पाण्डवों के शैशव से आरम्भ होकर, वारणावत के अग्निकांड पर जाकर समाप्त होती है वस्तुतः यह खण्ड 'अधिकारों' की व्याख्या अधिकारों के लिए हस्तिनापुर में निरन्तर होने वाले षड्यन्त्र, अधिकार को प्राप्त करने की तैयारी तथा संघर्ष की कथा है। राजनीति में अधिकार प्राप्त करने के लिए होनेवाली हिंसा तथा राजनीतिक त्रास के बोझ में दबे हुए असहाय लोगों की पीड़ा की कथा समानान्तर चलती है। सतोगुणी राजनीति तथा तमोन्मुख रजोगुणी राजनीति का अन्तर इसमें स्पष्ट होता है। एक ओर निर्लज्ज स्वार्थ और भोग तथा दूसरी ओर अनासक्त धर्म-संस्थापना का प्रयत्न। दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।'महाभारत' की कथा में कृष्ण का प्रवेश भी इस खण्ड में हो गया है।प्रख्यात कथाओं का पुनःसृजन उन कथाओं का संशोधन अथवा पुनर्लेखन नहीं होता, वह उनका युगसापेक्ष अनुकूलन मात्र भी नहीं होता। पीपल के बीज से उत्पन्न प्रत्येक वृक्ष, पीपल होते हुए भी, स्वयं में एक स्वतन्त्र अस्तित्व होता है, वह न किसी का अनुसरण है, न किसी का नया संस्करण। मौलिक उपन्यास का भी यही सत्य है।मानवता के शाश्वत प्रश्नों का साक्षात्कार लेखक अपने गली-मुहल्ले, नगर- देश, समाचार पत्रों तथा समकालीन इतिहास में आबद्ध होकर भी करता है, और मानव सभ्यता तथा संस्कृति की सम्पूर्ण जातीय स्मृति के सम्मुख बैठकर भी। पौराणिक उपन्यासकार के 'प्राचीन' में घिरकर प्रगति के प्रति अन्धे हो जाने की सम्भावना उतनी ही घातक है, जितनी समकालीन लेखक की समसामयिक पत्रकारिता में बन्दी हो एक खण्ड-सत्य को पूर्ण सत्य मानने की मूढ़ता। सर्जक साहित्यकार का सत्य अपने काल-खण्ड का अंग होते हुए भी, खण्डों के अतिक्रमण का लक्ष्य लेकर चलता है।नरेन्द्र कोहली का नया उपन्यास है 'महासमर'। घटनाएँ तथा पात्र महाभारत से सम्बद्ध हैं; किन्तु यह कृति एक उपन्यास है आज के एक लेखक का मौलिक सृजन!

नरेन्द्र कोहली - प्रकाशित कृतियाँ उपन्यास : अभ्युदय- दो खण्डों में (दीक्षा, अवसर, संघर्ष की ओर, युद्ध - 1, युद्ध-2) महासमर आठ खण्डों में (बन्धन, अधिकार, कर्म, धर्म, अन्तराल, प्रच्छन्न, प्रत्यक्ष, निर्बन्ध)महासमर की रजत जयन्ती पर डीलक्स संस्करण (नौ खण्डों में)।अन्य उपन्यास: न भूतो न भविष्यति, सैरन्ध्री, मेरे राम : मेरी रामकथा, मत्स्यगन्धा, हिडिम्बा, तोड़ो कारा तोड़ो (पाँच खंडो मे), अभिज्ञान, आतंक, साथ सहा गया दुःख, आत्मदान, प्रीतिकथा, पुनरारम्भ, जंगल की कहानी, क्षमा करना जीजी, वसुदेव।व्यंग्य : समग्र व्यंग्य (पाँच खण्ड)।अन्य पुस्तकेंएक और लाल तिकोन, पाँच एबसई उपन्यास, आश्रितों का विद्रोह, जगाने का अपराध, आधुनिक लड़की की पीड़ा, त्रासदियाँ, परेशानियाँ, वह कहाँ है?, आत्मा की पवित्रता, मेरे मुहल्ले के फूल।कहानियाँ : समग्र कहानियाँ (दो खण्ड), कहानी का अभाव, दृष्टि देश में एकाएक शटल, निचले फ्लैट में, संचित भूख।नाटक : शम्बूक की हत्या, निर्णय रुका हुआ, हत्यारे, गारे की दीवार, प्रतिद्वंद्वी। आलोचना: प्रेमचन्द, हिन्दी उपन्यास: सृजन और सिद्धान्त, बाबा नागार्जुन।अन्य : जहाँ है धर्म वहीं है जय, स्मृति का क्षरण, किसे जगाऊँ, नरेन्द्र कोहली ने कहा, प्रतिनाद, नेपथ्य, गणित का प्रश्न, सीधा रास्ता, माजरा क्या है।

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