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Alochana Ke Parisar

by Gopeshwar Singh
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388434676
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 308
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

‘आलोचना को लोकतान्त्रिक समाज में साहित्य का सतत किन्तु रचनात्मक प्रतिपक्ष' मानने वाले हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक गोपेश्वर सिंह की यह पुस्तक हिन्दी आलोचना में आए नये बदलाव का प्रमाण है। हिन्दी आलोचना में कला और समाज को अलग-अलग देखने की शिविरबद्ध परिपाटियों से यह पुस्तक मुक्त करती है और आलोचना-दृष्टि में कला एवं समाज का सहमेल खोजती है। गोपेश्वर सिंह रचना और आलोचना के किसी एक परिसर के हिमायती नहीं हैं। उनका कहना है : ‘‘रचना जीवन के वैविध्य, विस्तार और गहराई की अमूर्तता को मूर्त रूप देने की सृजनात्मक मानवीय कोशिश है। दुनिया के साहित्य में इसी कारण वैविध्य एवं विस्तार है। हर बड़ा रचनाकार पिछले रचनाकार के रचना-परिसर का विस्तार करता है। इसी के साथ वह नया परिसर भी उद्घाटित करने की कोशिश करता है। जब न तो जीवन का कोई एक रूप परिभाषित किया जा सका है और न रचना का, तब आलोचना को ही किसी परिभाषा में बाँधने की कोशिश क्यों की जाये, उसे किसी एक परिभाषित परिसर तक सीमित क्यों किया जाये। रचना की तरह उसके भी क्या कई-कई परिसर नहीं होने चाहिए। जब ‘दुनिया रोज बनती है तब रचना भी रोज बनती है। और आलोचना भी। रोज-रोज बनने का यह जो सिलसिला है, वह किसी भी जड़ता और यथास्थिति के विरुद्ध सृजनात्मक पहल से ही सम्भव होता है। गोपेश्वर सिंह की प्रस्तुत आलोचना पुस्तक इस तरह की सृजनात्मक पहल का सुन्दर उदाहरण है। निःसन्देह ‘आलोचना के परिसर' नामक पुस्तक शिविरबद्ध आलोचना की छाया से मुक्त सामाजिकता और साहित्यिकता की नयी दिशाओं का सन्धान करने की कोशिश का परिणाम है।

जन्म : 24 नवम्बर 1955, ग्राम-बड़कागाँव पकड़ीयार, जनपद-गोपालगंज, बिहार में। शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी.। जे. पी. आन्दोलन में सक्रिय रहे। इस दौरान कई बार जेल-यात्रा। 1983 से अध्यापन। पटना विश्वविद्यालय, पटना एवं सेण्ट्रल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद में करीब दो दशक तक अध्यापन के बाद सितम्बर 2004 से दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। 2010 से 2013 तक हिन्दी विभाग के अध्यक्ष। साहित्य के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर हिन्दी की प्रायः सभी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन। नलिन विलोचन शर्मा (विनिबन्ध), साहित्य से संवाद, आलोचना का नया पाठ, भक्ति आन्दोलन और काव्य एवं आलोचना के परिसर के अतिरिक्त भक्ति आन्दोलन के सामाजिक आधार, नलिन विलोचन शर्मा संकलित निबन्ध, कल्पना का उर्वशी विवाद, शमशेर बहादुर सिंह : संकलित कविताएँ और नलिन विलोचन शर्माः रचना संचयन (संपादित) पुस्तकें प्रकाशित। आपको आचार्य परशुराम चतुर्वेदी सम्मान तथा रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान प्राप्त हैं।

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