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Andaaz-E-Bayan Urf Ravi Katha

by Mamta Kalia
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789389915648
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 220
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Revised Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): Memoirs

बेमिसाल कथाकार जोड़ी रवीन्द्र कालिया और ममता कालिया की समूचे भारतीय कथा साहित्य में अमिट जगह है। साथ रहते और लिखते हुए भी दोनों एक-दूसरे से भिन्न गद्य और कहानियाँ लिखते रहे और हिन्दी कथा साहित्य को समृद्ध करते रहे। रवीन्द्र कालिया संस्मरण लेखन के उस्ताद रहे हैं। ग़ालिब छुटी शराब हो या सृजन के सहयात्रियों पर लिखे गये उनके संस्मरण हों, उन्हें बेमिसाल लोकप्रियता मिली। उन संस्मरणों में जो तटस्थता और अपने को भी न बख़्शने का ज़िंदादिल हुनर था वह इसलिए सम्भव हो पाया कि वह अपने निजी जीवन में भी उतने ही ज़िंदादिल रहे। रविकथा इन्हीं रवीन्द्र कालिया के जीवन की ऐसी रंग-बिरंगी दास्तान है जो ममता जी ही सम्भव कर सकती थीं। पढ़ते हुए हम बार-बार भीगते और उदास होते हैं, हँसते और मोहित होते हैं। रविकथा एक ऐसी दुनिया में हमें ले जाती है जो जितनी हमारी जानी-पहचानी है उतनी ही नयी-नवेली भी।ऐसा इसलिए नहीं होता कि वे रवीन्द्र कालिया को नायक बनाने की कोई अतिरिक्त कोशिश करती हैं बल्कि इसलिए होता है कि इस किताब के नायक ‘रवि’ का जीवन और साहित्य को देखने का नज़रिया उन्हें एक अलग कोटि में खड़ा करता है। किसी भी स्थिति में हार न मानना, यथार्थ को देखने का उनका विटी नज़रिया, डूबे रहकर भी निर्लिप्त बने रहने का कठिन कौशल उन्हें सहज ही ऐसा व्यक्तित्व देता है जो एक साथ लोकप्रिय है तो उतना ही निन्दकों की निन्दा का विषय भी। यह अलग बात है कि वे निन्दकों की निन्दा में भी रस ले लेते हैं। यह किताब सम्पादक रवीन्द्र कालिया के बारे में भी बताती है कि काम करने का उनका जुनून तब भी जस का तस बना रहता है जब वे अस्पताल से तमाम डाक्टरी हिदायतों के साथ बस लौट ही रहे होते हैं। यूँ ही कोई रवीन्द्र कालिया नहीं बन जाता। वह कैसे बनता है, रविकथा इसी का आख्यान है।यह किताब एक साथ निजी और सार्वजनिक रंग रखती है। इसमें एक तरफ़ तो हिन्दी की साहित्यिक संस्कृति का आत्मीय वर्णन मिलता है तो दूसरी तरफ़ रविकथा में दाम्पत्य जीवन के भी अनेक ऐसे प्रसंग हैं जो बराबरी की बुनियाद पर ही महसूस किये जा सकते हैं। यह किताब रवीन्द्र कालिया और ममता कालिया के निजी जीवन की दास्तान भी है। यहाँ निजी और सार्वजनिक का ऐसा सुन्दर मेल है कि इसे उपन्यास की तरह भी पढ़ा जा सकता है। इसमें एक कद्दावर लेखक पर उतने ही कद्दावर लेखक द्वारा लिखे गये जीवन प्रसंग हैं जिनके बीच में एक- दूसरे के लिए प्रेम, सम्मान और बराबरी की ऐसी डोर है कि एक ही पेशे में रहने के बावजूद उनका दाम्पत्य कभी उस तनी हुई रस्सी में नहीं बदलता जिसके टूटने का ख़तरा हमेशा बना रहता है।रविकथा को इसके खिलते हुए गद्य के लिए भी पढ़ा जाना चाहिए। हर हाल में पठनीय किताब।- मनोज कुमार पाण्डेय

ममता कालिया कई शहरों में रहने, पढ़ने और पढ़ाने के बाद अब ममता कालिया दिल्ली (एनसीआर) में रहकर अध्ययन और लेखन करती हैं। वे हिन्दी और इंग्लिश दोनों भाषाओं की रचनाकार हैं। भारतीय समाज की विशेषताओं और विषमताओं पर अपनी पैनी नज़र रखते हुए ममता कालिया की प्रत्येक रचना के केन्द्र में आज का समाज है।विकासशील समाज में बनते-बिगड़ते सम्बन्ध, प्रगति के आर्थिक, सामाजिक दबाव, स्त्राी की प्रगति को देखकर पुरुष मनोविज्ञान की कुण्ठाएँ और कामकाजी स्त्राी के संघर्ष उनके प्रिय विषय हैं। प्रकाशित पुस्तकों की संख्या विपुल होने के कारण यहाँ केवल उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकों का उल्लेख किया जा रहा है। ममता कालिया ने कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण, नाटक, यात्रा- साहित्य और निबन्धों से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है ।प्रमुख उपन्यास : बेघर, नरक दर नरक, तीन लघु उपन्यास, दौड़, दुक्खम-सुक्खम, सपनों की होम डिलिवरी, कल्चर-वल्चर। प्रमुख कहानी संग्रह : छुटकारा, सीट नम्बर छह, उसका यौवन, एक अदद औरत, जाँच अभी जारी है, निर्मोही, मुखौटा, बोलने वाली औरत, थोड़ा सा प्रगतिशील, ख़ुशक़िस्मत। कविता संग्रह : । A Tribute to Papa and Other Poems (Writers Workshop), Poems 78 (Writers Workshop), खाँटी घरेलू औरत, पचास कविताएँं, कितने प्रश्न करूँ। संस्मरण : कल परसों के बरसों, कितने शहरों में कितनी बार। निबन्ध् संग्रह : भविष्य का स्त्राी विमर्श, स्त्राी विमर्श का यथार्थ।ममता कालिया ने अनेक कहानी संकलनों का सम्पादन किया है तथा 5 वर्ष महात्मा गाँधी हिन्दी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा की इंग्लिश पत्रिका भ्पदकप की सम्पादक रही हैं। उन्हें मिले पुरस्कारों और सम्मानों की सूची में कुछ इस प्रकार हैं: सर्वश्रेष्ठ कहानी सम्मान हिन्दुस्तान टाइम्स, दिल्ली; यशपाल कथा सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, राम मनोहर लोहिया सम्मान (उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा); वनमाली सम्मान, वाग्देवि सम्मान, सीता स्मृति सम्मान, कमलेश्वर स्मृति सम्मान, के. के. बिड़ला न्यास का व्यास सम्मान।सम्प्रति वे एक उपन्यास और संस्मरणमाला पर कार्य कर रही हैं।पता : बी 3ए/303, सुशान्त एक्वापोलिस, ओपोजिट क्रासिंग्स रिपब्लिक, ग़ाज़ियाबाद-201009ई-मेल : mamtakalia011@gmail.com

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