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Andhere Mein: Ek Punarvichar

by Ed. by Vashishtha Anoop
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789369448845
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 188
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

अँधेरे में' मुक्तिबोध की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और उतनी ही विवादित कविता है। अपनी शैली, शिल्प, संरचना और प्रयोगों के कारण यह कविता कुछ ख़ास तरह की जटिलताओं और विशिष्टताओं से भरी है। यह कविता कहीं निराला की 'राम की शक्तिपूजा' के साथ खड़ी होती दिखती है। शक्तिपूजा के राम और अँधेरे में का काव्य- नायक दोनों अँधेरी शक्तियों से भिड़ने और विजय पाने के लिए प्रयासरत हैं। दोनों में ही शक्तियाँ अन्यायियों- अपराधियों के साथ हैं। लेकिन दोनों में अपराजेय जुझारूपन और विश्वास भी है। 'अँधेरे में' की संरचना के कारण इसके अध्येता, विद्वान इस कविता केविषय में अलग-अलग निष्कर्षों पर पहुँचते रहे हैं। इस कविता में इसकी गुंजाइश भी है। यह कविता प्रतियोगी परीक्षाओं और अधिकांश विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल है। इस संग्रह में शामिल लेख 'अँधेरे में' के अध्येताओं की मुश्किलें आसान करके उनकी समझ को विकसित करने में मदद करेंगे, इस उम्मीद के साथ यह पुस्तक प्रस्तुत है।

वशिष्ठ अनूपजन्म : एक जनवरी 1962, ग्राम सहड़ौली, पो. फरसाड़-साऊँखोर (बड़हलगंज), गोरखपुर, उ. प्र.। प्रकाशित साहित्य : कविता, गीत, ग़ज़ल, समालोचना और सम्पादन सहित कुल 59 पुस्तकें प्रकाशित।ग़ज़ल और गीत-संग्रह : स्वप्न के बाद, बंजारे नयन, रोशनी ख़तरे में है, बेटियों के पक्ष में, रोशनी की कोपलें, अच्छा लगता है, मशालें फिर जलाने का समय है, तेरी आँखें बहुत बोलती हैं, इसलिए, घरों पर गिद्ध मँडराने लगे हैं, गर्म रोटी के ऊपर नमक-तेल था, बारूद के बिस्तर पर, सुन्दर बिहान होई (भोजपुरी ग़ज़लें)।आलोचना पुस्तकें : समकालीन कविता के प्रतिमान, आधुनिक हिन्दी कविता की वैचारिक पृष्ठभूमि और सृजन, हिन्दी कविता के प्रमुख विमर्श, कविता के जनवादी स्वर, जगदीश गुप्त का काव्य-संसार, हिन्दी ग़ज़ल का स्वरूप और महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर, हिन्दी ग़ज़ल की प्रवृत्तियाँ, हिन्दी गीत का विकास और प्रमुख गीतकार, हिन्दी साहित्य का अभिनव इतिहास, गीत का आकाश, हिन्दी भाषा, साहित्य एवं पत्रकारिता का इतिहास, हिन्दी की जनवादी कविता, अँधेरे में : एक पुनर्विचार, असाध्यवीणा की साधना, उर्दू के प्रतिनिधि शायर और उनकी शायरी, लोकसाहित्य का मर्म, हिन्दी ग़ज़ल का परिप्रेक्ष्य इत्यादि।सम्मान एवं पुरस्कार : दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार। कुछ गीत फ़िल्मों और धारावाहिकों में, कुछ गीत और ग़ज़लें कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल। कुछ कविताओं का अन्य भाषाओं में अनुवाद। ग़ज़लों और गीतों पर कई विश्वविद्यालयों में पीएच.डी., एम.फिल. और लघुशोध कार्य। साहित्यिक पत्रिका 'शब्दार्थ' का सम्पादन।सम्प्रति : प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, बीएचयू।

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