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Apane Parivar Ko Khush Kaise Rakhen

by Promod Batra , Vijay Batra , Divya Arora
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788173157363
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 252
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 284 grams
  • BISAC Subject(s): Personal Growth / Happiness

एक परिवार अपने सदस्यों से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। पति, पत्नी, पुत्री, पुत्र, दादा-दादी, चाचा-चाची और नाती-पोते—इन सबकी एक परिवार में अपनी-अपनी जरूरतें, उत्तरदायित्व, विचार और कार्य होते हैं। सभी के अपने-अपने गुण-अवगुण, कमजोरियाँ, व्यक्तिगत लक्षण और व्यक्तित्व होते हैं। इन सबमें परस्पर संवाद द्वारा एक-दूसरे से मतभेद, संघर्ष भी हो सकता है या फिर खुशी की प्राप्ति और प्रत्येक सदस्य के प्रति कुछ अच्छा करने की सद्भावना भी आ सकती है।पुस्तक में सभी के लिए कुछ-न-कुछ है—बड़ों के लिए और बच्चों के लिए, नवविवाहितों के लिए और विवाहितों के लिए, पति व पत्नियों के लिए, पुत्र व पुत्रियों के लिए, ससुरालवालों के लिए, दादी-दादा व नाती-पोतों के लिए भी संदेश हैं। इसलिए इस पुस्तक का कोई भी भाग परिवार के किसी भी सदस्य के लिए अप्रासंगिक नहीं है तथा पाठक चाहे परिवार में किसी भी स्थिति में हों, इस पुस्तक का पूरा लाभ उठाने के लिए इसके प्रत्येक भाग को पढ़ें, जिससे कि परिवार में अपनी स्थिति को समझ सकें।अगर हम आनंददायक विचारों को सोचेंगे तो खुश होंगे; अगर हम दयनीय विचारों को सोचेंगे तो दयनीय होंगे। अगर हम कायरतापूर्ण विचारों को सोचेंगे तो कायर बन जाएँगे। खुशी जीवनदायी फसल है, तनाव जंगली घास के समान है। आप किसे चुनते हैं?

प्रमोद बत्रा व्यक्‍त‌ित्व विकास एवं व्यवहार-प्रबंधन विषय के सुपरिचित लेखक हैं। अमेरिका की प्रतिष्‍ठ‌ित यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा से एम.बी.ए. करने के उपरांत तैंतीस वर्ष तक भारत के प्रमुख उद्योग समूह ‘एस्कॉर्ट्स’ से संबद्ध रहे और अनेक उच्च पदों पर आसीन रहे।मानव-व्यवहार से संबंधित हिंदी-अंग्रेजी में उनकी 60 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनकी 10 लाख से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं।विजय बत्रा (एम.बी.ए., पीट्सबर्ग विश्‍वविद्यालय, अमेरिका), जो कानकाकू सिक्योरिटीज (अमेरिका) इंक, न्यूयॉर्क में वाइस प्रेसीडेंट के पद पर रहे। श्री विजय ने वर्ष 1986 में जापान अमेरिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस होनोलूलू, हवाई से स्नातक किया।दिव्या अरोड़ा ने दिल्ली से सामाजिक कार्य में एम.ए. किया है। उन्हें भारत के कुछ सुप्रसिद्ध अस्पतालों में काम करने का अनुभव है। वर्तमान में वह हमदर्द पब्लिक स्कूल में सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।

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