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Apani Kahi

by Chinmayi Tripathi
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355181138
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 100
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 100 grams
  • BISAC Subject(s): General

अपनी कहीसुर से शब्दों का जो नाता बनता है, शायद वही नाता झुरमुट से गिलहरी के बच्चों का और रंगों से कैनवास का। वे एक-दूसरे में अव्यक्त रूप से समाये हुए आपस में लुका-छिपी खेलते रहते हैं! युवा गायिका चिन्मयी त्रिपाठी की कविताओं से गुज़रते हुए लगातार यह महसूस होता रहा।जैसे आलाप हममें छुपी हज़ार रुँधी पुकारों के लिए एक पत्राच्छादित, मुलायम, महीन पगडण्डी-सी गढ़ता है और स्वयं भी टूटकर पुकारता है रूठे हुए राग को-चिन्मयी त्रिपाठी के पहलौटे संग्रह की इन कविताओं में एक अस्फुट, आवेगमय पुकार छुपी है: पंक्ति से छूटे हुए, जीवन से रूठे हुए, हाशियाबन्द लोगों की प्रखर अन्तर्दीप्ति निवेदित पुकार :'कुतुब मीनार की नींव का पत्थर है मेरी पीठ लाल किले का लाल रंग मेरा ही तो लहू है, जड़ा हुआ हूँ मैं खजुराहो के मन्दिर पर खड़ी युवती के कर्णफूलों में छिपा हुआ हूँ उसकी आँखों में चमक बनकर,गुँथा हुआ हूँ एलोरा के शंकर की जटाएँ, मन्दिरों में जीवन्त देव-प्रतिमाएँ बनकर!'गलियों से गुज़रने वाले ठठेरे (ठक-ठक') 'एलजीबीटी के लोग ('खुदरंग')' माइयाँ ('किचनवाली) जैसे जीवन्त किरदार ही नहीं, शहरों के धुमैले शोर में मुरझाये पड़े-जन्तु और पेड़-पौधे ('अमलतास', 'गिलहरी के बच्चे', 'बड़े शहर के पंछी' आदि) भी चिन्मयी के आत्मीय उद्बोधन के विषय हैं!बाहर से इतनी गम्भीर दीखने वाली चिन्मयी के भीतर छुपी नटखट बच्ची से मिलना हो, उसकी विनोद-वृत्ति और उसकी प्रखर राजनीतिक चेतना का आस्वाद लेना हो तो उसका प्रहसननुमा काव्यायोजन 'राम नाम असस्य है' पढ़नी चाहिए जहाँ अकबर और श्रीराम दोनों नाम बदल देने की याचिका लेकर एक सरकारी दफ़्तर की क्यू में खड़े हैं। खड़े-खड़े आपस में वे जो बातें करते हैं-खासी दिलचस्प हैं। पढ़े-लिखे युवक-युवतियों के मन में संस्थाबद्ध धर्म के प्रति एक विरक्ति-सी समा गयी है! आतंकविहवल इस युग में वे पर्यावरण सजग एक धर्मेतर अध्यात्म के नियोजक होकर उभरे हैं। उनके इस नये सहकारितामूलक अध्यात्म में 'मुँह में राम बगल में छुरी' की कोई संकल्पना नहीं है। कम्प्यूटरशासित इस युग में भावनात्मक सुरक्षा देने वाला प्रेमी एक 'स्क्रीन सेवर' है! 'तीस में टीनेज़' का बाँकपन लिए अपने फकीराना तेवर में स्त्री कहती है :मुट्ठी भर वक़्त डाला एक जेब में,मुट्ठी भर साँसें दूसरी में,और कहा उसने कि जाओ! गौरतलब है कि दोनों जेबों में सूराख था, फिर भी चिन्मयी की पीढ़ी नयी तरह की काल-संचेतना के साथ कोरोना-काल में भी ख़ाली सड़कों पर घूमी-खाने के पैकेट, जीव-मात्र के लिए ढेर-सा दुलार और प्राणों में प्राण लौटा लाने वाले कुछ मनहर गान लिए! स्त्री-पुरुष और प्रकृति / ब्रह्माण्ड के बीच का अनूठा सामंजस्य एक अभियान की तरह इसने चलाया । सार्वजनिक संकट में आदर्श नये सिरे से परवान चढ़ते हैं-चिन्मयी की कविताएँ इसके प्रति हमें आश्वस्त करती हैं! सन्तोष का विषय है कि नयी पीढ़ी में धीरे-धीरे यह समझ विकसित होने लगी है कि जीवन का मूल मन्त्र गिरहकट्ट स्पर्द्धा नहीं, एक हँसमुख दोस्त-दृष्टि बिखेरती सहकारिता है।- अनामिका

चिन्मयी त्रिपाठी -चिन्मयी गायक, संगीतकार और कवि हैं जिन्होंने लगभग तीन वर्षों पहले म्यूज़िक एण्ड पोएट्री प्रोजेक्ट नामक मुहिम की शुरुआत की। इसके अन्तर्गत वे हिन्दी कविताओं को गीतों के रूप में गाती हैं और इसके माध्यम से कई सुरीले गीत निकले हैं और एक पूरा एल्बम रिलीज हो चुका है जिसमें हिन्दी साहित्य की कालजयी कविताओं को गीतों में पिरोया गया है। इसमें निराला, रामधारी सिंह 'दिनकर', शिवमंगल सिंह सुमन, महादेवी वर्मा, हरिवंश राय 'बच्चन' और धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज कवियों की रचनाएँ शामिल हैं। चिन्मयी शास्त्रीय संगीत सीख लेने के बाद, कुछ वर्षों तक कॉर्पोरेट जॉब में सक्रिय रहीं और Songdew Media नामक कम्पनी की सह-संस्थापक भी रही हैं। इस दौरान भी उनका गायन, संगीत और कविताएँ लिखना चलता रहा। विगत दो वर्षों से चिन्मयी पूरी तरह से संगीत और साहित्य को समर्पित हैं। संगीत और कविताएँ लिखने के अलावा, चिन्मयी कहानियाँ लिखती हैं और उनकी कई रचनाएँ web series और फ़िल्मों में लोगों तक पहुँच रही हैं।

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