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Atmadrishti

by Mehrunnisa Parvez
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789390900671
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 248
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 151 grams
  • BISAC Subject(s): Short Stories (single author)

जानी-मानी कथाकार एवं ‘समर लोक’ साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका की संपादक।रचना-संसार : आँखों की देहलीज, उसका घर, कोरजा, अकेला पलाश, समरांगण, पासंग (उपन्यास); आदम और हव्वा, उसका घर, गलत पुरुष, फाल्गुनी, अंतिम चढ़ाई, सोने का बेसर, अयोध्या से वापसी, ढहता कुतुबमीनार, रिश्ते, अम्माँ, समर, मेरी बस्तर की कहानियाँ तथा लाल गुलाब (कहानी-संग्रह)।पुरस्कार-सम्मान : ‘पद्मश्री’, ‘अखिल भारतीय महाराज वीरसिंह जूदेव’, ‘सुभद्राकुमारी चौहान’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘भारतभूषण सम्मान’ एवं ‘रामेश्वर गुरु पुरस्कार’।लंबी कहानी ‘जूठन’ तथा ‘सोने का बेसर’ पर धारावाहिक प्रसारित। वेश्यावृत्ति जैसे सामाजिक अभिशाप पर टेलीफिल्म ‘लाजो बिटिया’ और स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित लोकप्रिय धारावाहिक ‘वीरांगना रानी अवंतिबाई’ का स्वयं निर्माण एवं निर्देशन किया। लंदन, फ्रांस, रूस आदि का भ्रमण कर कई सम्मेलनों में भाग लिया। साहित्य एवं समाज-सेवा में निरंतर सक्रिय। अंग्रेजी, उर्दू, मलयालम, पंजाबी, गुजराती, ओडि़या, मराठी आदि भाषाओं में कृतियाँ अनूदित। देश के विश्वविद्यालयों में इनके साहित्य पर पी-एच.डी.। सामाजिक समस्याओं पर कहानियाँ तथा साक्षात्कार दूरदर्शन एवं अन्य बहुआयामी माध्यमों से प्रसारित हुए हैं।

अक्टूबर 1999 से प्रकाशित हो रही लोक उत्थान और सामाजिक सरोकारों की पत्रिका ‘समरलोक’ ने बीस वर्ष की दीर्धावधि में समाज-जीवन के लगभग सभी विषयों पर रोचक और पठनीय सामग्री प्रस्तुत की है। जिस कालखंड में साहित्यिक पत्रिकाएँ एक-एक करके बंद हो रही थीं, ऐसे में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती मेहरुन्निसा परवेज ने पाठकों की पीड़ा को समझा और ‘समरलोक’ मंच दिया, जहाँ साहित्यकार-लेखक अपनी रचनात्मकता व्यक्त कर सकें और पाठकों को उनकी रुचि का साहित्य सुलभ ही सके। इसने एक बड़ा पाठकवर्ग तैयार किया, इसके संपादकीयों ने पाठकों को एक नई अंतर्दृष्टि दी। संपादिका मेहरुन्निसाजी का लंबा अनुभव, समाज को देखने-समझने की विशिष्ट दृष्टि और अपने आसपास घटित हो रही घटनाओं के प्रति संवेनशीलता की स्पष्ट झलक इनमें मिलती है। यह संग्रह उनके ऐसे ही पठनीय सामयिक-प्रासंगिक संपादकीयों का पठनीय संकलन है, जो समाज के विविध आयामों का दिग्दर्शन कराता है।

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