Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Aurat Jo Nadi Hai

by Jaishree Roy
Save 32% Save 32%
Current price ₹200.00
Original price ₹295.00
Original price ₹295.00
Original price ₹295.00
(-32%)
₹200.00
Current price ₹200.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388684347
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 136
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

सघन संवेदनात्मकता और चुनौतीपूर्ण कथाविन्यास के कारण समकालीन कथा साहित्य में सहज ही ध्यान खींचने वाली युवा कथाकार जयश्री रॉय का यह उपन्यास 'औरत जो नदी है' सम्बन्धों की शिराओं के सहारे स्त्री-पुरुष मानसिकता के गहरे अन्तस्तल में उतरने का एक महत्त्वपूर्ण उपक्रम है।जीवन के हर क्षेत्र में पीढ़ियों से उपेक्षा और प्रताड़ना के दंश झेलती स्त्री की आत्मचेतना से उद्दीप्त अकुलाहट और अपने ही विषवाणों से बिंधे आत्मप्रवंचना से श्लथ पुरुष की आत्म-स्वीकृतियों के परस्पर कदमताल की अनुगूँजों से भरी यह कृति एक ऐसा आईना है जिसमें हम सब अपने-अपने चेहरे की शिनाख्त कर सकते हैं। प्रेम का व्यामोह सिरज कर अन्ततः देह की चौहद्दी में दम तोड़ते पुरुष और मन के मीत की तलाश में बार-बार छली जाती स्त्री की यह समानान्तर यात्रा देह, प्रेम, परिवार और ज़िम्मेवारियों के चौखटे में न सिर्फ़ स्त्री-पुरुष के मानसिक भूगोल के बारीक अन्तरों को पुनः परिभाषित और पुनर्रेखांकित करती है बल्कि कालीन के नीचे छुपी उन दरारों को भी निर्ममता से उघाड़ जाती है जिसे हम जानबूझ कर नहीं देखना चाहते। 'औरत महज़ एक योनि नहीं होती परन्तु मर्द शायद आपादमस्तक एक लिंग ही होता है' का सूत्र मखमली कालीन के नीचे छुपी ऐसी ही सच्चाइयों का निर्मम अनावरण है।सनसनी के विरुद्ध बेचैनी और ऐन्द्रिकता के विरुद्ध सूक्ष्मग्राह्यता की बेबाक गवाहियों से बने इस उपन्यास में तलवार की धार पर चलने जैसा तटस्थ सन्तुलन भी है और पलकों की कोर में पल रहे अथाह स्वप्नों के प्रति एक अटूट लगाव भी जो पाठकों से ठहर कर पढ़े जाने की संजीदगी की माँग करता है।

जयश्री रॉय -जन्म : 18 मई, हजारीबाग (बिहार)शिक्षा : एम.ए. हिन्दी (गोल्ड मेडलिस्ट), गोवा विश्वविद्यालयप्रकाशन : अनकही, ...तुम्हें छू लूँ ज़रा, खारा पानी, कायान्तर, फुरा के आँसू और पिघला हुआ इन्द्रधनुष, गौरतलब कहानियाँ, मोहे रंग दो लाल (कहानी संग्रह), औरत जो नदी है, साथ चलते हुए, इकबाल, दर्दजा (उपन्यास), तुम्हारे लिए (कविता संग्रह)। कहानी संग्रह सम्पादन 'हमें है इश्क़ मस्ताना' ।प्रसारण : आकाशवाणी से रचनाओं का नियमित प्रसारण ।सम्मान : युवा कथा सम्मान (सोनभद्र) 2012, स्पन्दन कृति सम्मान, 2017, स्पन्दन सोशल क्रिएटिव अवार्ड 2018 Iसम्प्रति : कुछ वर्षों तक अध्यापन के बाद स्वतन्त्र लेखन |सम्पर्क : तीन माड, मायना, शिवोली, गोवा-403517मो. : 09822581137ई-मेल : jaishreeroy@gmail.com

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us