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Azadi Ke Aranya Senani

by Shriprakash Mani Tripathi
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355213334
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 152
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

आजादी के अरण्य सेनानी’ पुस्तक अरण्य नायकों की गौरव-गाथा का स्मरण है। इसमें भारत के जनजातीय समुदायों के सत्रह स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और उनके बलिदान की कहानी है। वनों, बीहड़ों, पर्वतों और वनांचलों में बसनेवाले सामान्य ग्रामवासी किस तरह अपने समाज और भारत की आजादी के लिए आगे बढ़े, शक्तिशाली ब्रिटिश राज से टक्कर ली और अपना उत्सर्ग किया। इस पुस्तक में स्वातंत्र्यचेता अरण्य सेनानियों के संघर्ष को स्वर दिया गया है। आजादी के ये सत्रह मतवाले भारत के विभिन्न प्रांतों से हैं। इनकी जनजातियाँ भिन्न हैं। इनकी पृष्ठभूमि और संस्कृतियाँ अलग-अलग हैं, फिर भी आजादी की उत्कट अभिलाषा इन सबके हृदय में समान रूप से करवटें लेती है। यह पुस्तक इन्हीं अभिलाषाओं का प्रतिरूपण है।‘आजादी के अरण्य सेनानी’ पुस्तक की यह विशेषता है कि इसे शुष्क इतिहास की तरह नहीं बल्कि एक भावात्मक गाथा की तरह लिखा गया है। ऐसी गाथा, जो पाठकों के मन में इन बलिदानियों का चित्र खींच देती है और उनके भीतर राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्रीय अस्मिता का अनहद नाद गूँजने लगता है।आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में इस पुस्तक का प्रणयन आजादी की लड़ाई में भारत की जनजातियों के संघर्ष और बलिदान की भूमिका को सशक्त एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का संकल्प लेकर किया गया है। यह पुस्तक तत्संबंधी संकल्प की प्रस्तुति है।

प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (म.प्र.) के कुलपति हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर में अध्यक्ष राजनीति विज्ञान तथा अधिष्ठाता कला संकाय रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ तथा अनेक अकादमिक पुरस्कारों से अलंकृत प्रो. त्रिपाठी का चिंतनशील आचार्यों की परंपरा में प्रमुख स्थान है। सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक घटनाओं के कुशल चितेरे प्रो. त्रिपाठी ख्यातिलब्ध लेखक एवं साहित्यकार हैं। भारतीय ज्ञान-परंपरा तथा सामयिक विषयों पर अभी तक उनकी 24 पुस्तकें प्रकाशित हैं। सनï् 2018 में 25वें अंतरराष्ट्रीय राजनीति विज्ञान संघ (ढ्ढक्कस््र) के ब्रिस्बेन में आयोजित विश्व कांग्रेस में ‘वैश्वीकरण और सतत विकास : एक नए प्रतिमान की खोज’ पर पैनल चेयर के रूप में उन्होंने संबोधन दिया। उन्हें 40 वर्ष का अध्यापन कार्य का अनुभव है। इस अवधि में उनके निर्देशन में 27 विद्यार्थियों ने पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। सद्य:प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘मन मानस में राम’ अकादमिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में अत्यंत समादृत हुई है।

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