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Bakaree

by Sarveshwar Dayal Saxena
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181435743
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 64
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 4th Edition
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

विदेशी दासता से मुक्ति भारत की गरीब जनता के लिए अपने नेताओं द्वारा छले जाने की शुरुआत थी। यह एक विडम्बना ही थी कि छलने के सबसे ज्यादा तरीके नयी सत्ता ने उससे सीखे जिसने राजनीति में चरित्र का महत्त्व स्थापित करना चाहा था ।बकरी महज एक व्यंग्य नाटक नहीं, हमारी स्वाधीनता की तलछट का चित्र है - वह तलछट जो समय बीतने के साथ गहरी होती चली गयी है, और अब भी चुनौती दे रही है। नाटक के संगीत-नृत्य में पाठक मग्न रहता है और जटिल प्रतीक सहजता से खुलने लगते हैं। राजनीतिक ढाँचे की पोल-पट्टी को न केवल उधेड़कर दिखाया गया है, बल्कि उस समाज का विकृत चेहरा भी उभारा गया है जो आजादी के दो दशकों के बाद बना था।सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का यह नाटक नाट्य संवेदना की ताजगी और राजनीतिक व्यंग्य की मार के कारण आज के रंगमंच की एक मुख्य उपलब्धि माना गया है। स्कूलों-कॉलेजों, गली-कूचों और गाँवों-कस्बों में खुले आकाश के नीचे लगातार खेला जा रहा यह नाटक हिन्दी का सर्वाधिक लोकप्रिय नाटक है। इस नाटक ने हिन्दी नाटक और रंगमंच को नयी जमीन दी है।

सर्वेश्वरदयाल सक्सेनाजन्म : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कस्बे से सटे गाँव पिकौरा में, सन् 1927 में। शिक्षा : बस्ती, बनारस और इलाहाबाद में । इलाहाबाद से 1949 में एम.ए. किया। कार्य क्षेत्र : कुछ समय स्कूल मास्टरी, पाँच वर्ष तक क्लर्की की। कुछ वर्ष दिल्ली में आकाशवाणी के समाचार विभाग में बिताये, आकाशवाणी के अन्य केंद्रों में उत्पादन में सहायक (असिस्टेंट कुछ और प्रोड्यूसर) रहे। 1963 से 1982 तक 'दिनमान' साप्ताहिक के संपादन विभाग में रहे। 1982 से जीवनपर्यन्त सितंबर 1983 तक बच्चों की पत्रिका ‘पराग' के संपादक रहे। पुस्तकें : कविता संग्रह : काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ, कुआनो नदी, जंगल का दर्द, खूँटियों पर टँगे लोग, कोई मेरे साथ चले और असंकलित कविताएँ। (किसी भी स्वतंत्र संकलन में असंकलित और अनूदित ये सभी कविताएँ ग्रंथावली के पाँचवें खण्ड में संकलित हैं । ग्रंथावली के प्रकाशन के साथ ही इन सभी कविताओं को धूप की लपेट शीर्षक संकलन में प्रकाशित किया गया ।)

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