Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Bangladesh Mein Hindu Sanhaar

by Salam Azad
Save 33% Save 33%
Current price ₹135.00
Original price ₹200.00
Original price ₹200.00
Original price ₹200.00
(-33%)
₹135.00
Current price ₹135.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789352291113
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 172
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

बांग्लादेश में एक ऐसा अल्पसंख्यक समुदाय होने के नाते जिसकी भाषा और धर्म वही है, जोकि पश्चिम बंगाल की भारतीय आबादियों की है, हिन्दुओं के साथ बांग्लादेश में भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया है और साथ ही वहाँ के मुसलमानों द्वारा उन पर हमले किये गये हैं। आज़ादी के बाद से बांग्लादेश की किसी भी सरकार द्वारा राजनीतिक ख़तरों के चलते जिनमें इस समय किये जा रहे हमले भी शामिल हैं हिन्दुओं को बचाने के लिए कोई निर्णायक क़दम नहीं उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए बांग्लादेश की सरकारों ने अभी तक निहित सम्पत्ति अधिनियम को रद्द नहीं किया है जिसके अन्तर्गत भारत और पाकिस्तान को उन लोगों की सम्पत्ति को ज़ब्त करने की अनुमति प्रदान की गयी थी जो 1965 के युद्ध के दौरान तक दूसरे की सीमाओं के पार चले गये थे। भारत ने युद्ध समाप्त होने के फौरन बाद ही इसे रद्द कर दिया था। पाकिस्तान ने इसे बना रखा और बांग्लादेश ने भी जो कि पहले पूर्वी पाकिस्तान था। बांग्लादेश में रहने वाले लगभग सभी हिन्दू इस अधिनियम से प्रभावित हुये हैं, क्योंकि कई मौक़ों पर लगभग दस लाख हेक्टेयर भूमि हिन्दुओं से केवल इस आरोप पर छीन ली गई है कि उन्होंने देश छोड़ दिया था। इससे हिन्दुओं का मनोबल गिरा है और उनकी आर्थिक हानि हुई है, जिसके कारण वे देश छोड़ने पर मजबूर हुए हैं।

सलाम आजाद - जन्म : 10 जुलाई, 1964 को बांग्लादेश के विक्रमपुर जिले के दामला गाँव में। शिक्षा : सर जे.सी. बोस इंस्टीट्यूशन के मेधावी छात्र रहे। बाद में गाइबांधा गवर्नमेंट कॉलेज और ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई-लिखाई की। वृत्ति : कुछ समय तक पत्रकारिता करने के बाद सम्प्रति बांग्लादेश की एक ग़ैर-सरकारी संस्था 'एमिटी फार पीस' में कार्यरत। प्रकाशित कृतियाँ : हिन्दी, अंग्रेज़ी और बंगला में लगभग 41 पुस्तकें-विज्ञानी जगदीश चंद्र बसु : जीवन ओ गवेषणा, रवींद्रनाथ जे भावे लिखतेन जेमन करे लिखतेन, पत्रावली, जगदीश चंद्र बसु, देशत्याग : साम्प्रतिक भावना, युद्ध शिशु, महापुरुष विशुद्धानंद महाथेरो, रवींद्रनाथ के लेखा जगदीश चन्द्र पत्रावली, श्वेतपत्र, प्रफुल्लचंद्र राय, रवींद्रनाथेर नाइटहुड प्रत्याख्यानेर दलील ओ अन्यान्य प्रसंग, विश्वकविर सोनार बांग्ला, पतिसरे रवीन्द्रनाथ शान्तिवाहिनी ओ शान्ति चुक्ति, पार्वत्य चट्टग्राम प्रसंग, चुक्ति उत्तर पार्वत्य चट्टग्राम ओ आदिवासी प्रसंग, नजरुल स्मारक ग्रंथ, जीवनानंद दास स्मारक ग्रंथ, एथनिक क्लीजिंग, बांगलादेशेर बिपन्न संखालघु, बंगबंधु जेनेभा ओ अन्यान्य, अन्नदा शंकर राय बांगलादेश ओ बंगबंधु, आदिवासीदेर भाषा, मानवाधिकार प्रसंगे रवीन्द्रनाथ, रवीन्द्र भुवने बंगलादेश, तसलीमा नसरीन और अन्यान्य, आँधी, रथीन्द्रनाथ शांतिनिकेतन ओ पौषमेला, ब्लासफेमी आइन ओ बंगलादेशेर संविधान, कंट्रीब्यूशन, भंगा मठ, जगदीश चंद्र बसु स्मारक ग्रंथ, देश भागेर गल्प, हिंदू संप्रदाय केनो बांगलादेशत्याग कोरछे, बांगलादेशेर आदिवासी अस्तित्वेर संकट बंगलादेशे मदरसा शिक्षा, कल्पना चकमा, आदि। हिन्दी में अनूदित : बांग्लादेश से क्यों भाग रहे हैं हिंदू, शर्मनाक, देश विभाजन की कहानियाँ, टूटा मठ, कल्पना चकमा और युद्ध शिशु। सलाम आजाद विवाहित हैं, पत्नी मिर्ज़ा फ़ हमीदा अजीम सोहेली।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us