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Betaj Shahar

by Kishor Kumar Sinha
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170551409
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 95
  • Original Price: INR 100.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

बेताज शहर - शहर आगरा पहले बसा या ताजमहल वहाँ पहले बना? इसमें कोई दो राय नहीं हो सकतीं, आगरा पहले बसा, ताजमहल बाद में बना। लेकिन अगर ये पूछा जाये कि क्या ये आगरा ताजमहल के बिना ज़िन्दा रह सकता था, तो इसमें भी दो राय नहीं हो सकतीं। ताजमहल के बिना यह शहर ऐसा होता जैसा आज है, यह नामुमकिन है। ताजमहल के बिना समय के थपेड़े, आगरा शहर के नामोनिशां को तो शायद न मिटा पाते, लेकिन किसी गाँव से ज़्यादा इसका विकास होना सम्भव नहीं था।

किशोर कुमार सिन्हा - सन् 1955 में अलीगढ़ शहर में स्कूल कॉलेजों में शिक्षा हुई। अलीगढ़ से ही सिटी परिकार, पुस्तकें पढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया। घर में पढ़ने पढ़ाने का था।वर्ष 1971 में दिल्ली विश्वविद्यालय में भौतिकों में अध्ययन प्रारम्भ किया व 1976 में सेंट स्टीफेंस कॉलेज से एम.एससी. में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी बीच हिन्दी लेखन भौतिकी विभाग में हिन्दी संस्था का गठन भी हुआ।1977 में भारतीय राजस्व सेवा व 1978 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत हुए। हिन्दी नाटक मंचन करने के अवसर प्राप्त हुए और 1980 में सहारनपुर में नाट्य संस्था की स्थापना हुई। वर्ष 1985 में फ़र्रुखाबाद के ज़िला कलक्टर के कार्यालय में दृष्टिकोण नामक हिन्दी संस्था की स्थापना की और विधिवत लेखन कार्य शुरु किया।मज़दूरों पर आधारित प्रथम उपन्यास 'गाथा भोगनपुरी' 1986 में प्रकाशित हुआ आगरा शहर की व्यथा लिए, दूसरा उपन्यास 'बेताज शहर' वर्ष 1988 में प्रकाशित हुआ। तीसरा उपन्यास 'मेला' वर्ष 1990 में पाठकों के समक्ष आया।पहला नाटक संग्रह, 'किस्सा पंचायत राज का' वर्ष 1996 में छपा और नवीनतम नाटक संग्रह 'इसी का किला' वर्ष 1999 में प्रकाशित किया गया है।1977 से 2001 के सेवाकाल में विकास आयुक्त आगरा, कलक्टर फ़र्रुखाबाद, कलक्टर इटावा प्रबन्ध निदेशक, उ.प्र. खाद्य निगम, वरिष्ठ प्रबन्धक भारतीय खाद्य निगम, सचिव शिक्षा सचिव पर्यावरण, आयुक्त बरेली मण्डल, सचिव वित्त विभाग आदि पदों पर कार्यरत रहे। अब सचिव चिकित्सा विभाग के पद पर कार्यरत हैं।वर्ष 1995 में ग्रेट ब्रिटेन से ग्राम्य विकास में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की और 1998 में मास्टर ऑफ़ बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री प्राप्त की है। हिन्दी भाषा में मुहावरों के माध्यम से हास्य व्यंग्य पर पुस्तक का लेखन चल रहा है।भारतीय पक्षियों के बारे में एक डाइरेक्टरी 'ए बर्ड टोल्ड अस' प्रकाशनाधीन है। यह पुस्तक पत्नी कविता सिन्हा के साथ लिखी गयी हैं। पुस्तक के ग्राफ़िक्स पुत्र समर्था के हैं तथा पक्षियों की आकृतियाँ पुत्री कृतिका द्वारा रेखांकित की गयी हैं। यही टीम अब नयी पुस्तक 'यू एंड यौर पैट्स' पर भी कार्य कर रही है।

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