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Bharat Mein Shramikon ki Samasyayein Evam Samadhan

by Ravi Prakash Yadav , Nishit Ranjan
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789372262193
  • Binding: Hardcover
  • Subject: Sociology and Anthropology
  • Publisher: Atlantic Publishers & Distributors (P) Ltd
  • Publisher Imprint: Atlantic
  • Publication Date:
  • Pages: 995
  • Original Price: INR 995.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 470 grams
  • BISAC Subject(s): Labor / General, Public Policy / Social Policy, and Sociology / General

भारत में श्रमिक वर्ग आज अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कम वेतन, बेरोजगारी, असुरक्षित कार्यस्थल, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक सुरक्षा की कमी, बाल श्रम और महिला श्रमिकों के शोषण जैसे मुद्दे आज भी सभी जगह व्यापत हैं। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिक जो लंबे समय तक परिश्रम करते हैं। फिर भी ये उचित वेतन, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहते हैं। ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में पलायन ने रोज़गार की प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है, जिससे प्रवासी श्रमिकों के लिए सम्मानजनक जीवनयापन कठिन हो गया है।

इन परिस्थितियों में सरकार, नियोक्ता और समाज की साझा जिम्मेदारी आवश्यक है। साथ ही श्रम कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, न्यूनतम वेतन की सुनिश्चितता, सुरक्षित और गरिमापूर्ण कार्यस्थल तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार हो, जिससे श्रमिकों की स्थिति में सुधार हो सके। कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण रोज़गार के अवसर को बढ़ाने में सहायक हैं। बाल श्रम और महिला शोषण के विरुद्ध जागरूकता तथा ट्रेड यूनियन और श्रमिक सहकारी समितियाँ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए प्रभावी प्रयास कर सकती हैं।

प्रस्तुत पुस्तक श्रम नीतियों की स्पष्ट समझ, सुदृढ़ औद्योगिक संबंधों और सकारात्मक कार्य वातावरण के निर्माण हेतु व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह पुस्तक छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, श्रमिकों, एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। साथ ही श्रमिक संगठनों, उद्योग प्रबंधकों और मानव संसाधन विशेषज्ञों के लिए यह एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।

प्रो. (डॉ.) रवि प्रकाश यादव (जन्मः 23 नवंबर, 1969) ने एम.ए. की डिग्री पटना विश्वविद्यालय से और पी.एचण्डीण् तिलका मांझी विश्वविद्यालयए भागलपुर से प्राप्त की है। वर्तमान में आप तिलका मांझी विश्वविद्यालयए भागलपुर के विश्वविद्यालय औद्योगिक संबंध एवं कार्मिक प्रबंध विभाग में यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। आपने 1996 से विश्वविद्यालय में निरन्तर अपनी सेवाएं दी हैं। अब तक आपके 60 से अधिक शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैंए और लेखक एवं संपादक के रुप में आपकी 22 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। आपके मार्गदर्शन में 15 शोधार्थियों ने पी.एचण्डीण् की उपाधि प्राप्त की है। आपकी प्रमुख पुस्तकों में भारत में संविदा श्रमिक (2026) बेरोजगारी उन्मूलन एवं मनरेगा (2025) का विमोचन महामहीम राज्यपाल सहकुलाधिपति द्वारा किया गया।

डा निशित रंजन (जन्मः 25 मार्च, 1990) ने एम.ए एल.एल. बी एवं पी.एच.डी तिलका मांझी विश्वविद्यालयए भागलपुर से प्राप्त की है । एक शोधकर्ता के रूप में आपके 25 शोध आलेख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पीयर रिव्यूड.रेफर्ड एवं यू.जी.सी अनुमोदित जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। आप कई राष्ट्रीय सेमिनारों और कांफ्रेंसों में अपने शोधपरक पेपर प्रस्तुत कर चुके हैं। डा निशित को सावित्रीबाई फुले एप्रिसिएशन अवार्ड—2022 से सम्मानित किया जा चुका है। डा निशित रंजन बेरोजगारी उन्मूलन एवं मनरेगा पुस्तक में भी सहायक लेखक हैं। डा. निशित वर्तमान में अतिथि सहायक व्याख्याता के रूप में बीएन मंडल विश्वविद्यालयए मधेपुरा में कार्यरत है।

  • भूमिका
  • आभार
  • 1. बाल श्रमिकों की समस्याएँ
  • 2. महिला श्रमिकों की समस्याएँ
  • 3. असंगठित श्रमिकों की समस्याएँ
  • 4. भूमण्डलीकरण का श्रमिकों पर प्रभाव
  • 5. कामकाजी महिलाओं का यौन उत्पीड़न
  • 6. डॉ. अम्बेडकर एवं भारतीय श्रमिक
  • 7. श्रमिकों को राजकीय सुरक्षा
  • 8. श्रमिकों की समस्याओं का समाधन
  • परिशिष्ट
  • (i)महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न
  • (रोकथाम, निषेध् और निवारण अध्निियम, 2013)
  • (ii) असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अध्निियम, 2008
  • संदर्भ ग्रंथ सूची 243
  • लेखक परिचय 245

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