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Bhartiya Gyan Parampara Mein Shiksha

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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788126941414
  • Binding: Hardcover
  • Subject: Education & Psychology
  • Publisher: Atlantic Publishers & Distributors (P) Ltd
  • Publisher Imprint: Atlantic
  • Publication Date:
  • Pages: 148
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 330 grams
  • BISAC Subject(s): Reference, Essays, and General

शिक्षा भारतीय संस्कृति और दर्शन का अभिन्न हिस्सा रही है। इसे भारतीय ज्ञान प्रणाली या भारतीय दर्शन का साथी माना गया है, जो विभिन्न धार्मिक, दार्शनिक और साहित्यिक परंपराओं से निकला है। भारतीय ज्ञान प्रणाली ने समय के साथ विकास किया है और उसने शिक्षा को अनुभव, अद्वितीयता और समर्थन के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है। भारतीय ज्ञान प्रणाली में शिक्षा को केवल ज्ञान की दिशा से ही नहीं, बल्कि जीवन के सभी पहलुओं को समावेशित करने का प्रयास किया गया है। भारतीय ज्ञान प्रणाली में शिक्षा धर्म, नैतिकता, आत्मविश्वास, सहनशीलता, और समाजसेवा को समझने का माध्यम भी है। यहां, शिक्षा का उद्देश्य विशेष ज्ञान को प्राप्त करने से बहुत अधिक है, वह जीवन में समृद्धि और सम्पूर्णता की प्राप्ति होनी चाहिए। भारतीय ज्ञान प्रणाली में शिक्षा की प्रारंभिक अवधारणा उरो एक व्यापक और समग्र सोचने के तरीके का संकेत देती है, जो जीवन के हर पहलू को समावेशित करता है। यह पुस्तक भारतीय शिक्षा को समझने में पाठकों, शिक्षाविदों, शिक्षकों राथा शोधार्थियों के लिये उपयोगी सिद्ध होगी।

प्रो. रमेश प्रसाद पाठक, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (केंद्रीयविश्वविद्यालय) नई दिल्ली के शिक्षा संकाय में वरिष्ठ आचार्य के पद पर कार्यरत है। पूर्व में संकाय प्रमुख और विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। विगत 36 वर्षों से शिक्षण और शोच निर्देशन के कार्य में संलग्न हैं। इन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिदास पुरातत्व एवं संस्कृति, मेरठ विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र, संस्कृत विषय में एमए. तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से शिक्षाशास्त्र में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं। इन्होंने 25 से अधिक शोध छात्रों का मार्ग निर्देशन किया है। विभिन्न राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्तियों, कार्यशालाओं, तथा सम्मेलनों में सत्ताध्यक्ष, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा मुख्य वक्ता, सहभागिता तथा पत्र प्रस्तुत किये हैं। जापान, बैकॉक, फिलीपीन्स, नेपाल, फिजी, इंडोनेशिया की शैक्षिक यात्रा कर चुके हैं। 50 से अधिक शोधपत्र तथा लेख राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय शोच पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। शिक्षाशास्त्र के विनिन्न पक्षों पर 110 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। अध्यापक शिक्षा से जुड़ी भारत सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न संस्थाओं व समितियों के ये सदस्य हैं। सम्प्रति-शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली की योजना-'भारत वैभव', 'एक भारत श्रेष्ठ भारत तथा मालवीय मिशन परियोजना से जुड़े हैं। शिक्षा दर्शन, प्राचीन भारतीय शिक्षा, मूल्य शिक्षा, शिक्षा का इतिहास, तुलनात्मक शिक्षा, दूरस्थ शिक्षा इनके रुचि के अन्य विषय हैं।

  • आमुख..................................................vii
  • 1. भारतीय शिक्षा व्यवस्था................................................ 1
  • भूमिका, विद्या वेफ प्रकार, शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य, सर्वांगीण विकास, आध्यात्मिक विकास, चरित्रा और आचरण का विकास, शारीरिक विकास, व्यक्तित्व का विकास, सामाजिक दायित्वों का निष्पादन, सांस्कृतिक जीवन का उन्नयन, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 2. विद्या और दीक्षा संस्कार................................................ 9
  • भूमिका, विद्यारम्भ संस्कार, उपनयन संस्कार, दीक्षा संस्कार, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 3. विद्या-शिक्षा और पाठ्यक्रम ................................................ 13
  • भूमिका, विभिन्न विषयों की शिक्षा, वैदिक युग में शिक्षा, बौद्ध युग में शिक्षा, चौंसठ कलाएँ, भाषा और साहित्य, परिषद् शाखा और चरण के संघ, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 4. विद्या-शिक्षा वेफन्द्र और विश्वविद्यालय ................................................17
  • भूमिका, आश्रम-विद्या और शिक्षा के केन्द्र के रूप में, परिषद्, तक्षशिला, काशी, बौद्ध शिक्षा के प्रमुख केन्द्र, नालन्दा, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 5. गुरु-शिष्य संबंध और अनुशासन................................................ 23
  • भूमिका, गुरु-आचार्य का महत्त्व, गुरु-शिष्य सम्बन्ध, स्वतन्त्राता और अनुशासन, शारीरिक दण्ड की व्यवस्था, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 6. वर्ण-व्यवस्था और नारी-शिक्षा ................................................ 29
  • भूमिका, कर्म का प्रावधान, नारी-शिक्षा, सहशिक्षा की व्यवस्था, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 7. शिक्षा का समसामयिक विकास ................................................35
  • भूमिका, शिक्षा का क्रमिक इतिहास, ब्रिटिशकालीन शिक्षा पद्धति, स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास, उच्च शिक्षा के उद्देश्य, आचार्य नरेन्द्र देव समिति (1952-53), आचार्य नरेन्द्र देव समिति के उद्देश्य, माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952-53), माध्यमिक शिक्षा आयोग के उद्देश्य, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग (1964-66), राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के उद्देश्य, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1968), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986), राममूर्ति समीक्षा समिति रिपोर्ट (1990), संशोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1992), संशोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1992) के उद्देश्य, यशपाल समिति (1990), सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 8. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 की रूपरेखा ................................................45
  • भूमिका, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या (2005) का प्रारूप, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या की संरचना (2009), भारतीय संविधान में शिक्षा की प्रतिबद्धताएँ, संविधान की संघीय, राज्य एवं समवर्ती सूची तथा शिक्षा का स्वरूप, संघ सूची एवं केन्द्र सरकार के शैक्षिक कर्त्तव्य, राज्य सूची में सम्मिलित विषय, समवर्ती सूची में सम्मिलित शैक्षिक विषय, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) (2009), सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 9. शिक्षा संरचना 10$2$3 की मूलधारणा ................................................53
  • भूमिका, शिक्षा संरचना के उद्देश्य, शिक्षा के स्तर, प्राथमिक स्तर की शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा की पाठ्यचर्या, पहली और दूसरी कक्षा, तीसरी से पाँचवी कक्षा, उच्च प्राथमिक स्तर (3 वर्ष), प्राथमिक शिक्षा का महत्व, माध्यमिक स्तर की शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा के उद्देश्य, माध्यमिक शिक्षा की पाठ्यचर्या, उच्च माध्यमिक शिक्षा ($2) की पाठ्यचर्या, माध्यमिक शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 10. उच्च शिक्षा का स्वरूप ................................................61
  • भूमिका, डॉ॰ राधाकृष्णन आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) के अनुसार उच्च शिक्षा का उद्देश्य, उच्च शिक्षा का पाठ्यक्रम, उच्च शिक्षा का महत्व एवं आवश्यकता, उच्च शिक्षा का संगठनात्मक स्वरूप, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय, मानित विश्वविद्यालय, सम्बद्ध विश्वविद्यालय, सम्बद्ध एवं शिक्षण विश्वविद्यालय, एकात्मक विश्वविद्यालय, संघात्मक विश्वविद्यालय, मुक्त विश्वविद्यालय, मुक्त विद्यालय और सेतु विद्यालय, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 11. अध्यापक-शिक्षा का स्वरूप ................................................67
  • भूमिका, भारत में अध्यापक शिक्षा का परिप्रेक्ष्य, अध्यापक शिक्षा वेफ सन्दर्भ में परिवर्तन, अध्यापक-शिक्षा का गुणात्मक और नियामक परिप्रेक्ष्य, अध्यापक-शिक्षा वेफ सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् की भूमिका, समसामयिक शैक्षिक व्यवस्था का दोष, समसामयिक शैक्षिक व्यवस्था की सीमाएँ, वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की सीमाएँ, शैक्षिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारक, शैक्षिक व्यवस्था में सुधार हेतु किये गये अभिनव प्रयास, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 12. भारतीय शिक्षा का विकास ................................................81
  • भूमिका, शिक्षा की संकल्पना, भारतीय समाज में शिक्षा, प्राचीन भारत में शिक्षा, मध्यकालीन भारत में शिक्षा, आधुनिक भारत में शिक्षा, बुड घोषणा पत्र (1854), भारतीय शिक्षा आयोग (हण्टर आयोग 1881-82), सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 13. बीसवीं शताब्दी वेफ प्रारम्भ में शिक्षा ................................................101
  • भूमिका, रैले आयोग, राष्ट्रीय आन्दोलन व शिक्षा, अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा हेतु गोखले का प्रस्ताव, सैडलर आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा आन्दोलन (1920-22), हर्टोग समिति (1929), एबट-वुड रिपोर्ट, बेसिक शिक्षा, सार्जेण्ट योजना (1944), ब्रिटिशकालीन शिक्षा के दोष, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 14- भारतीय शिक्षा की समस्यायें एवं चुनौतियाँ ................................................111
  • भूमिका, राष्ट्रीय शिक्षा-नीति का निर्माण, भाषा समस्या और त्रिभाषा सूत्र, छात्र अशान्ति, शिक्षित बेरोजगारी, शिक्षा की दोषपूर्ण नीति एवं प्रशासन, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा की चुनौती, दोहरी शिक्षा व्यवस्था, शिक्षा की माँग का न होना, अप्रशिक्षित तथा उपेक्षित शिक्षक, अभिभावकों की अशिक्षा, राष्ट्रीय एकता के लिए शिक्षा, राष्ट्रीय एकता के लिए प्रयास, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 15- शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन ................................................121
  • भूमिका, शिक्षा एक सशक्त साधन के रूप में, नैतिकता का हास, अन्तर्राष्ट्रीय क्षितीज का सिमट जाना, शैक्षिक मानकों में गिरावट, अनुपयुक्त शिक्षण प्रक्रिया, त्रुटिपूर्ण परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन, विद्यालय भवनों की जर्जर दशा, राष्ट्र की आर्थिक स्थिति, प्रबन्धतंत्र द्वारा शिक्षा का व्यापारीकरण, पर्यावरण प्रदूषण, शिक्षा में अनुसंधान सम्बन्धी समस्या, वर्तमान शिक्षा की चुनौतियाँ, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • 16- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) ................................................ 131
  • भूमिका, भाग-प् स्कूल शिक्षा, भाग-प्प् उच्चतर शिक्षा, भाग-प्प्प् अन्य केन्द्रीय विचारणीय मुद्दे, भाग-प्ट क्रियान्वयन की रणनीति, सन्दर्भ सूची/टिप्पणी
  • सन्दर्भ ग्रन्थ सूची ................................................ 135 अनुक्रमणिका ................................................ 137

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