Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Bhramargeet Saar

by Ed. Ramchandra Shukl
Save 30% Save 30%
Current price ₹95.00
Original price ₹135.00
Original price ₹135.00
Original price ₹135.00
(-30%)
₹95.00
Current price ₹95.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788180312717
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 182
  • Original Price: INR 135.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 8th Ed.
  • Item Weight: 180 grams
  • BISAC Subject(s): General

सूर के कृष्ण-प्रेम तथा भक्ति के सागर ‘सूरसागर’ का सबसे मूल्यवान मोती है ‘भ्रमरगीत’ जिसमें सूरदास के हृदय से निकली अपूर्व रसधारा बही है। ‘भ्रमरगीत सार’ के संकलन-सम्पादन का कार्य आचार्य शुक्ल ने 1920 में शुरू किया था, लेकिन ठीक से पूरा होने में इसे कुछ समय लगा। लगभग चार सौ पदों के इस संचयन में उस समय कुछ पुनरुक्ति दोष भी रह गया था जिसे पुस्तक की लोकप्रियता और लगातार बढ़ती माँग के चलते, ठीक करने का समय आचार्य नहीं जुटा पाए थे।

प्रस्तुत संस्करण वरिष्ठ आलोचक और आचार्य शुक्ल के समीप रहे विश्वनाथ प्रसाद मिश्र द्वारा सम्पादित है। सो इसमें नए पाठकों की सुविधा के लिए कुछ और टिप्पणियाँ भी जोड़ दी गई हैं, जिन्हें हम ‘चूर्णिका’ शीर्षक से पुस्तक के अन्त में पाएँगे।

आचार्य शुक्ल के शब्दों में सूरदास का प्रेम-पथ ‘लोक से न्यारा’ है। गोपियों के प्रेम-भाव की गम्भीरता उद्धव के ज्ञान-गर्व को मिटाती हुई दिखाई पड़ती है। वह भक्ति की एकान्‍त साधना का आदर्श प्रतिष्ठित करती जान पड़ती है, लोकधर्म के किसी अंग का नहीं। सूरदास सच्चे प्रेम-मार्ग के त्याग और पवित्रता को ज्ञान-मार्ग के त्याग और पवित्रता के समकक्ष खड़ा करने में सफल रहे हैं। साथ ही, उन्होंने उस त्याग को रागात्मिका वृत्ति द्वारा प्रेरित दिखाकर भक्ति या प्रेम-मार्ग की सुगमता भी प्रतिपादित की है।

पदों के प्रामाणिक पाठ के साथ आचार्य शुक्ल की सुदीर्घ व्याख्या इस पुस्तक को सूर के प्रेम-पक्ष की मूल्यवान विवेचना का रूप देती है, जो मध्यकालीन काव्य, विशेषकर भक्तिधारा के अध्येताओं के साथ ही भाव-प्रेमी पाठकों के लिए भी आनन्द का स्रोत सिद्ध होती है।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us