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Cartography avam Bhu-Suchna Vigyan ke Aadhaar

by Jawahar Lal Jain
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788126935741
  • Binding: Paperback
  • Subject: Earth-Science/Environment
  • Publisher: Atlantic Publishers & Distributors (P) Ltd
  • Publisher Imprint: Atlantic
  • Publication Date:
  • Pages: 258
  • Original Price: INR 495.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 430 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

कार्टोग्राफी एवं भू-सूचना विज्ञान के आधार नाम की यह पुस्तक मानचित्र विज्ञान और उसका आधुनिक रुप अर्थात् भू-सूचना विज्ञान के लगभग समग्र विषय का सरल, परिचय कराने वाली यह पुस्तक अत्यन्त व्यावहारिक हिन्दी भाषा में लिखी गई है जिसमें अनेकों तकनीकी शब्दों का अंग्रेजी रुपान्तरण भी साथ में दिया गया है। साथ ही अंग्रेजी भाषा की कई सहज अभिव्यक्तियों को अंग्रेजी या देवनागरी लिपि में अपना लिया है। इस तरह यह इस तकनीकी विषय पर हमारी सामान्य बोलचाल की भाषा में लिखी गई और ब्लैकबॉक्स विधि से दूर रहकर तकनीकी बारीकियों को सामान्य सरल शब्दों में समझाती है ताकि सामान्य विद्यार्थी/पाठक की विषय में आधारभूत समझ और रुचि विकसित हो सके। इस तरह हिन्दी-भाषी क्षेत्रें में इस विषय के शिक्षकों के लिये यह एक समग्र स्रोत पुस्तक के रुप में विशेष उपयोगी होगी। लेखक ने एकदम यही पुस्तक अंग्रेजी संस्करण में भी उपलब्ध कराई है। पुस्तक मानचित्र विज्ञान (कार्टोग्राफी) के मूल पक्षों से तो परिचय कराती ही है और उसकी नई विधाओं जैसे हवाई तथा उपग्रहीय सुदूर संवेदन, जीआईएस, जीपीएस-इन्टरनेट आदि भू-सूचना विज्ञानों से भी परिचय कराती है, मानचित्र तथा एटलस के कई आंतरिक पक्षों से भी। अंत में इस समग्र विषय की वर्तमान प्रवृत्तियों तथा कुछ निष्कर्ष बिन्दुओं की ओर भी संकेत करती है।

प्रो. जवाहर लाल जैन अपने पूरे कार्यकाल में डॉ- हरीसिंह गौर केन्द्रीय वि.वि., सागर, म.प्र. के भूगोल विभाग में भूगोल, विशेषतः कार्टोग्राफी एवं भू-सूचना विज्ञान, में अध्यापन व शोध कार्य करते रहे हैं। फोटोग्रामिति में अपनी आरंभिक जड़ों को एनआरएससी तथा आईआईआरएस जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं में प्रशिक्षणों से और गहन व आधुनिक किया है। वह भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफिक संघ (NCA) के संस्थापक आजीवन सदस्य है। वह 2005 के लिये संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, जब उन्होंने अपने वि.वि. में 25वीं NCA कार्टोग्राफिक कांग्रेस का आयोजन किया। इतने वर्षों बाद भी वह उसके कार्यों में सक्रियता से भाग लेते हैं। उन्होंने अपने गुरु स्व. प्रो. एन.पी. अयर की पुस्तक, सर्वेक्षण म.प्र. हिन्दी ग्रन्थ अकादमी (भोपाल) 1976 को उसके द्वितीय संस्करण हेतु संवर्धित एवं संशोधित किया (1989)। उन्होंने वि.वि. अकादमिक स्टाफ कालेज द्वारा आयोजित भूगोल में रिफ्रेशर कोर्स के अभ्यार्थियों हेतु सुदूर संबेदन की अवधारणाएँ एवं सिद्धांत विषय पर एक वृहद टाइप स्क्रिप्ट (1992) की रचना की। नगरीय, कार्टोग्राफिक तथा भू-सूचना विज्ञान आदि विषयों पर बीसियों प्रकाशित लेख तथा संगोष्ठियों में प्रस्तुत आख्यान इन विषयों पर उनकी अधिकारिक स्थिति का प्रमाण हैं। सेवा निवृत्त वर्षों में उनका कार्टोग्राफिक साहित्य व उपादानों के प्रति अगाध प्रेम उन्हें प्रसिद्ध संस्थानों के मानचित्र केन्द्रों में भी घुमाता रहा है जैसे यू.एस. में हार्वर्ड, कॉर्नेल तथा ब्रेन्डाइज़ वि.वि. तथा बोस्टन पब्लिक लाइब्रेरी एवं आस्ट्रेलिया में मेलबोर्न वि.वि. तथा विक्टोरिया स्टेट लाइब्रेरी आदि में।

  • अनुक्रमणिका
  • आभार
  • Foreword
  • प्राक्कथन
  • पारिभाषिक स्पष्टीकरण
  • चित्र एवं प्लेट सूची
  • प्रस्तावना
  • 1. मानचित्र विज्ञान (Cartography )
  • मानचित्र विज्ञान से अभिप्राय मानचित्रण एवं मानचित्र विज्ञान मानचित्र की अपरिहार्यता मानचित्र एवं भूगोलविद्ः भौगोलिक कार्टोग्राफी; मानचित्र स्केल;

    थीमैटिक तथा मात्रात्मक मानचित्रणः श्रीमैटिक मानचित्रण की सामान्य विधियाँ प्रवाह रेखा; संकुल मानचित्रण की विधियाँ – Synoptic Method संयुक्त सूचकांक विधिः मानचित्रण का इतिहास - वैश्विक; भारतः यूरोप;

    मानचित्र विज्ञान तथा भू-सूचना विज्ञान का संबंध 20वीं सदी में भू-स्थानिक विधाओं की प्रगति पृथ्वी की निर्देशांक प्रणाली मूल आधार अक्षांतर देशांतर रेखाजाल; वृहद् तथा लघु वृत्तः अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा; पृथ्वी का विस्तार एवं आकृति ज्यॉइड पृथ्वी की ग्रहीय गतियाँ पृथ्वी का दैनिक घूर्णन - पृथ्वी का वार्षिक सौर परिक्रमण ।

  • 2. मानचित्र प्रक्षेप (Map Projections )
  • आरंभिक मूल समस्या एवं अभिप्राय मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण कुछ सामान्य मानचित्र प्रक्षेप; समदिश प्रक्षेप कुछ सामान्य लक्षण;

    केन्द्रिय प्रक्षेप; शंक्वाकार प्रक्षेप एक प्रमाणिक अक्षांतर वाला सरल शंक्वाकार प्रक्षेपः दो प्रमाणिक< अक्षांतरों वाला सरल शंक्वाकार प्रक्षेप बोन प्रक्षेप बहुशंक्वाकार प्रक्षेप अंतर्राष्ट्रीय प्रक्षेप;

    बेलनाकार प्रक्षेप मरकेटर प्रक्षेप बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप; बेलनाकार समदूरस्थ प्रक्षेप छद्म बेलनाकार प्रक्षेप मॉल्वीड प्रक्षेप राबिन्सन प्रक्षेप खडित मॉल्वीड प्रक्षेप खडित साइन्युसायडल प्रक्षेप;

    सार्वभौमिक अनुप्रस्थ मरकेटर प्रक्षेप (U.T.M.) ग्रिड प्रणाली अंतरिक्षीय तिर्यक मरकेटर प्रक्षेप; WEB- मरकेटर प्रक्षेप उपयुक्त मानचित्र प्रक्षेप का चुनाव।

  • 3. मानचित्रों पर उच्चावच का चित्रण (Portrayal of Relief on Maps)
  • आरंभिक; मानचित्रों का कध्वंदिश ज्यामितिक स्वभाव; उच्चावच निरूपण की विधियाँ- हैश्योरिंग; समोच्चरेखण प्रधान विधि समोच्चरेखण की अवधारणा कन्टूर अंतराल एवं मानचित्र स्केल; धरातल पत्रक के विवेचन अभ्यास में कन्टूर अध्ययन की अहम भूमिका कन्टूर विधि को और सक्षम बनाने का प्रयास - पर्वत छायाकरण किटिरो तनाका की तिरछी समोच्चरेखा विधि

  • 4. मानचित्रण हेतु सूचना संग्रह की विधियाँ / स्रोत ( Methods / Sources of Data for Mapping)
  • आरंभिक संकलन विधियाँ परम्परागत सर्वेक्षण प्रतिच्छेदन तथा त्रिकोणियन विधि; आधार रेखा मापन सर्वेक्षण कार्य विधि के निर्धारक तत्व बिन्दुओं का ऊँचाई निर्धारण;

    त्रिकोणियन से त्रिभुजीकरण की ओर समग्र उपकरण सुदूर संवेदन भौगोलिक सूचना प्रणाली; वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली कार्टोग्राफिक डेटाबेसों से सीधे मानचित्रण इंटरनेट ।

  • 5. हवाई फोटोचित्रीय विधि (Aerial Photographic Method)
  • विकास; फोटोग्रामिति और उसका इतिहास; फोटोचित्रों का वर्गीकरण; हवाई फोटोचित्रों पर सहायक सूचनाएँ - ऊर्ध्व हवाई फोटो चित्र की सरल ज्यामिति तथा फोटो स्केल निर्धारण; ऊँचाई जनित विम्ब विस्थापन; तिर्यक फोटो ऊर्ध्वं फोटो तथा मानचित्र की तुलना हवाई फोटो तथा उपग्रहीय चित्र; परम्परागत विधियों की तुलना में सुदूर संवेदन के विशिष्ट गुण-दोष

    मानव की द्विनेत्री दृष्टि तथा फोटोचित्रों से त्रिविम अवलोकन त्रिविम अवलोकन का ज्यामितिक सिद्धान्त; दर्पण स्टीरियोस्कोप से स्टीरियोयुग्म पर ऊँचाई मापन Parallax समीकरण; स्टीरियो हवाई फोटोग्राफी स्टीरियो युग्म को दर्पण स्टीरियोस्कोप से त्रिविम अवलोकन हेतु तैयार करना;

    स्टीरियो मॉडल में ऊर्ध्वं प्रसार ऊर्ध्वं हवाई फोटोचित्रों से रेडियल लाइन त्रिकोणियन फोटोचित्रों से निर्वाचित विवरणों का आधार मानचित्र पर स्थानान्तरण; स्टीरियोस्केच; स्केच मास्टर ड्यूअल मिरर स्टीरियोस्कोप स्टीरियो जूम ट्रांसफरस्कोप विस्तृत मानचित्रण हेतु अन्य परिष्कृत उपकरण ।

  • 6. उपग्रहीय सुदूर संवेदन (Satellite Remote Sensing)
  • उद्भवः सुदूर संवेदन से अभिप्रायः उपग्रहीय सुदूर संवेदन विधा के आधारभूत खण्ड सुदूर संवेदन की मूल अवधारणाएँ: सुदूर संवेदन के भौतिक आधार EMR के लक्षण EMR स्पैक्ट्रम का विभाजन एवं नामकरण; उपग्रहीय सुदूर संवेदन में वायुमंडलीय अवरोध बिखराव अवशोषण वायुमंडलीय गवाक्षः पृथ्वी की वस्तुओं / पदार्थों के साथ सौर ऊर्जा की प्रतिक्रिया स्पैक्ट्रल हस्ताक्षर;

    इलेक्ट्रॉनिक सुदूर संवेदन की ओर लम्बी छलांग डिजिटल इलेक्ट्रानिक संवेदक CCD पंक्ति वाले स्कैनर; Opto-Mechanical Scanner; सुदूर संवेदन उपग्रह की परिक्रमण प्रणाली सूर्य तुल्यकालिक परिक्रमण; भू-स्थिर परिक्रमण पुनचित्रण चक्र उपग्रह परिक्रमण दिशा का झुकाव कोण; उपग्रह सौन या फ्रेम की अवधारणा विश्व की मूर्धन्य सुदूर संवेदन उपग्रह प्रणालियाँ; US की LANDSAT श्रृंखला; फ्रांस की SPOT प्रणाली; भारतीय उपग्रह सुदूर संवेदन प्रणाली; उपग्रहीय सुदूर संवेदन चित्रों की संदर्भ प्रणाली; सुदूर संवेदन डेटा उत्पादों के प्रकार;

    अवलोकनात्मक विम्व निर्वाचन; विम्वों की पहचान में सहायक लक्षण - आभा/रंग; गठन; विस्तार एवं आकार; छाया; प्रतिरूप; स्टेरियोस्कोपिक उत्थापन; साइट और संघ (Association)।

  • 7. डेटा पुनस्थापन एवं परिशोधन (Data Restoration and Processing)
  • आरंभिक; डेटा पुनस्थापन - रेंडियोग्राफिक वृद्धियाँ एवं परिष्कार; ज्यामितीय वृद्धियाँ एवं परिष्कार - Resampling Techniques;

    डेटा परिशोधन - बहुस्पेक्ट्रल डिजिटल डेटा की अवधारणा; डिजिटल डेटा का आवृत्ति चित्र; इमेज उन्नयन/संवर्धन - सरल विम्व आभा प्रसार; Level Slicing; Histogram Equalization Stretch; स्थानिक फिल्टरिंग; स्पेक्ट्रल अनुपातीकरण - वनस्पति सूचकांक चित्र; प्रधान त्रुटि विम्व; डिजिटल वर्गीकरण-निर्देशित वर्गीकरण-निर्देशित वर्गीकरण के नियमक; पुंज माध्य से निम्नतम दूरी; बायसनुमा; अधिकतम संभाव्यता; अनिर्देशित वर्गीकरण; अनिर्देशित वर्गीकरण की विधियाँ; ISODATA Method; मिश्रित वर्गीकरण;

    उपग्रहीय चित्रों का रंग संयोजन एवं रंग विवरण; रंगों का स्पेक्ट्रल अवधारणा; रंग संयोजन; आधारभूत रंग प्रणालियाँ - RGB रंग घनकृति; IHS रंगशंकु; एक प्रणाली से दूसरी में परिवर्तन एवं विपरीत परिवर्तन।

  • 8. भौगोलिक सूचना प्रणाली - परिचयात्मक एवं डेटा मॉडलिंग [Geographical Information System (GIS) - Introductory & Data Modelling]
  • आरंभिक एवं परिभाषिक; जी.आई.एस. का विकास; जी.आई.एस. का अन्य विषयों से संबंध - जी.आई. एस. एवं मानचित्र विज्ञान - मानचित्र विज्ञान एवं जी.आई.एस. - भ्रम एवं स्पष्टीकरण; जी.आई.एस. एवं सुदूर संवेदन; जी.आई.एस. एवं भूगोल;

    जी.आई.एस. में संहित डेटा प्रकार; भू-स्थानिक डेटा के डिजिटल परिवर्तन का प्रभाव; जी.आई.एस. में डेटा मॉडल/संरचना - वेक्टर डेटा; रैस्टर डेटा; रैस्टर डेटा की संरचना विधियाँ; लक्षणीय डेटा मॉडल; Object-Oriented Data Model (O-O Model)

  • 9. जी.आई.एस. - विधि तंत्र एवं त्रिविम मॉडलिंग (GIS—Methodology and 3-D Modelling)
  • जी.आई.एस. में डेटा डालना-आरंभिक; स्कैनिंग विधि से जी.आई.एस. में डेटा डालना; डिजिटाइजेशन विधि से जी.आई.एस. में डेटा डालना; Auto Digitization का हुनहुना; डिजिटाइजेशन की वृद्धियाँ; डिजिटाइजेशन की कार्य विधि; जी.आई.एस. में स्थानिक विश्लेषण; Boolean Operators; सुरक्षित सीमांकन।

    जी.आई.एस. में त्रिविम चित्रण - Digital Elevation Model एवं परंपरागत कन्टूरिंग विधि – रचना विधि; DEM संकल्पना का अन्य धौमैटिक क्षेत्रों में विस्तार - सांख्यिकी सतहों की रचना; DEMs की प्रयोग्यता।

  • 10. जी.पी.एस. एवं इन्टरनेट (GPS and Internet)
  • (अ) वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली (जी.पी.एस.): आरंभिक; जी.पी.एस. के घटक - 1. अंतरिक्ष खंड - GPS उपग्रहों से प्राप्त संकेत; 2. नियंत्रण खंड; 3. प्रयोगकर्ता खंड; GPS का मूल सिद्धांत; जी.पी.एस. विधि का मूल; GPS में भुटियों के स्त्रोत; Cycle Slip; स्थानीय निर्देशांक प्रणालियों से समायोजन; जी.पी.एस. सेवाओं के उन्नयन की क्षेत्रीय प्रणालियाँ; जी.पी.एस. प्रयोग की विधियाँ - 1. एकल/निरपेक्ष स्थिति निर्धारण; 2. सापेक्ष स्थिति निर्धारण; 3. अवकालित सापेक्ष स्थिति निर्धारण; जी.पी.एस. की प्रयोग्यता।

    (ब) इन्टरनेट एवं भू-सूचना: आरंभिक; इन्टरनेट का उदभव; इन्टरनेट अधोसंरचना एवं प्राविधि; Hyperlinks and WEB-Surfing; भू-सूचना विज्ञान में इन्टरनेट की भूमिका; कार्टोग्राफी से आगे।

  • 11. मानचित्र अभिकल्पन (Map Design)
  • आरंभिक: मानचित्र अभिकल्पन के निर्धारक तत्व - मानचित्रों की पठनीयता तथा दूर्यता को प्रभावित करने वाले चिह्निय तत्व - मानचित्र संयोजन/संकलन एवं सामान्यीकरण; मानचित्र सामान्यीकरण; अर्थ एवं महत्व; सामान्यीकरण के तत्व - चग्रीकरण; सरलीकरण; अन्य क्रियायें; संकेतीकरण (Inductive); अधिष्ठापन सामान्यीकरण; मानचित्र रचना की अंतिम अवस्थाएँ; आरंभिक एवं ऐतिहासिक; बेलन-आधारित प्रिंटिंग प्राविधि का आविर्भाव; विंबलन प्रिंटिंग विधि; फोटोग्राफी एवं स्क्रीनिंग का प्रभाव डिजिटल पर्यावरण में बिल्कुल भिन्न कार्यविधि।

  • 12. एटलस मानचित्रण एवं अन्य उपकरण (Atlas Cartography & Other Artifacts)
  • एटलस से अभिप्राय; एटलस का इतिहास; भारत में एटलस - स्कूल एटलस; भारत का राष्ट्रीय एटलस/ NATMO; भारत में एटलस उत्पादन - एटलस उत्पादन की विशेष कठिनाइयाँ;

    उपग्रह-चित्र आधारित एटलस; डिजिटल/इलेक्ट्रॉनिक एटलस; Web Atlas; मानचित्रिय सूचना के अन्य उत्पादन - ग्लोब प्लास्टिक रिलीफ मानचित्र एवं भू-माडल।

  • 13. मानचित्रण एवं भू-सूचना विज्ञान संकूल की प्रवृत्तियाँ (Trends of Cartography and Geoinformatics Complex)
  • आरंभिक; मानचित्र और उसके प्रयोग का बदलता स्वरूप; जी.आई.एस. में निरंतर परिवर्तन - 1. आवश्यकता क्षेत्र का डेटा; 2. स्थिति-आधारित सेवायें; 3. अन्य उन्नत प्राविधियों से संयोग; 4. प्रशासनिक इकाईवार भू-स्थानिक डेटा; 5. WEB Cartography, Neocartography and Co-operative Cartography; 6. क्रिजम बुद्धिमत्ता का प्रसार; 7. भू-सूचना का व्यवसायीकरण; 8. भारतीय परिवेश की विशेष प्रवृत्तियाँ 9. भू-सूचना की बदलती प्राविधिक गोद।

  • उपसंहार- डिजिटल विभाजक से सामना
  • अनुबंध
  • 1. भारत की नई धरातलीय मानचित्रश्रृंखला की सूचीकरण (Indexing) प्रणाली

    2. भारत की राष्ट्रीय भू-स्थानिक सूचना अधिसंरचना (NSDI)

    3. राष्ट्रीय दूर संवेदन केन्द्र एवं उसका राष्ट्रीय डेटा केन्द्र (National Remote Sensing Center and Its National Data Center)

    4. A. बेसिक त्रिकोणमितीय संबंध (Basic Trigonometric Relations);

    B. त्रिकोणन में सर्वाधिक प्रयुक्त सूत्र (Fundamental Formulae Most Commonly used in Triangulation)

    C. सामान्य मानचित्र प्रक्षेपों के लिये बेसिक सूत्र (Basic Formulae for Common Map Projections)

  • Acronyms, Abbreviations and Glossary of Terms
  • संक्षिप्त ग्रंथ सूची

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