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Chalni Mein Amrit

by Kamala Markande , Tr. Yashpal
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788180315947
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 168
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 306 grams
  • BISAC Subject(s): Ancient & Classical

‘चलनी में अमृत’ यशपाल द्वारा अनूदित एक उपन्यास है जो 1950 के दशक में कमला पूर्नईया टेलर द्वारा ‘नेक्टर इन सीव’ नाम से अंग्रेज़ी में लिखा गया। यह लेखिका का पहला ही उपन्यास था, फिर भी इसे बेस्ट सेलर के रूप में ख्याति मिली और 1955 में अमेरिकन लाइब्रेरी एसोसिएशन ने इस उपन्यास को वर्ष की महत्त्वपूर्ण कृति कहते हुए दर्ज किया। कमला पूर्नईया को संस्कृतियों के टकराव पर लिखने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।

‘चलनी में अमृत’ उपन्यास विपन्नता, भूख और व्यवस्थागत शोषण की मार्मिक कथा सामने लाता है। फ़्लैश बैक से खुलता हुआ यह उपन्यास कथा पात्र रुक्मिणी यानी रुकू की विवाह स्मृति से आरम्भ होता है। उसका विवाह तब हुआ था जब वह केवल बारह वर्ष की थी और सौभाग्य का एकमात्र टुकड़ा उसके हिस्से यही था कि उसका पति नाथन एक सज्जन व्यक्ति था। रुकू के जीवन में सपने और ख़ुशियाँ एक झलक-भर को आती हैं और फिर आर्थिक सामाजिक त्रासदी उन्हें झपट लेती है। खेती को निगलती हुई उद्योग की आहट भी इस उपन्यास में है, जो एक टेनरी (चमड़े का कारख़ाना) की तरह आकर रुकू के जीवन की यातना बनती है। विपन्नता की पराकाष्ठा है कि रुकू की बेटी देह व्यापार के लिए विवश होती है और एक माँ के रूप में रुकू को यह नियति सह लेनी पड़ती है। परिवार में शिशु का जन्म जो आह्लाद लाता है, उसे बच्चों की असमय मृत्यु, उनका पलायन क्रूरता से मिटा भी देता है। कठिन जीवन-यापन के दौरान समय के सच को नकारती सामाजिक मान्यताएँ रुकू और उसके पति दोनों को ब्लैकमेल होने को मजबूर करती हैं। इस तरह इनका पूरा जीवन बूँद-बूँद क्षणिक ख़ुशियों के बीच से गुज़रता है लेकिन कोई भी ख़ुशी इनके पास ठहरने नहीं पाती। इस त्रासदी के पीछे प्रकृति भी है और समाज रचित व्यवस्था भी।

इस तरह, यह उपन्यास अपने समाज के यथार्थ पर भी संवेदनापूर्वक उँगली रखता है। उपन्यास का अनुवाद अपने आस्वाद में इस कृति को मूलतः हिन्दी रचना-सा ही आभास देता है। ‘चलनी में अमृत’ अपने मुख्य सरोकार में आज भी एक प्रासंगिक कृति है।

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