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Chehre

by Nida Fazli
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350004920
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 202
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): Memoirs

अदब का ताल्लुक़ दिल के रिश्ते से होता है, हमारे अहसास की पैमाइश और गहराई की अभिव्यक्ति कोई लफ़्ज़ नहीं बल्कि जज़्बातों का सैलाब होता है, जिसे हम जीते हैं, महसूस करते हैं। ज़िन्दगी इन्हीं खट्टे-मीठे तज़ुरबों की कहानी बन जाती है। कुछ कलन्दर इसे अपने इशारे पर नचाते हैं और कुछ को ये। उर्दू अदब की दौलत ऐसे दीवाने-फनकारों से हमेशा लबरेज़ रही है जिन्होंने अपनी कहानी को लफ़्ज़ों के दस्तावेज़ से रोशन किया है। निदा फ़ाज़ली की ‘चेहरे’ उर्दू अदब के ऐसे ही मस्त-कलन्दरों की ज़िन्दगी की आपबीती है। मशहूर शाइरों का अन्दाज़े -बयां, उनका तौर--तरीका, ख़्वाहिशें, हसद, मोहब्बतें, चाल-चलन, सादगी, रवानी, मिठास और लोच को निदा फ़ाज़ली की क़लम जिस तरह से बयां करती है वो कमाल है। लगता है ये किसी का जाति मामला नहीं बल्कि हमारा ही आईना है जिसमें हमें अपना ही चेहरा दिखाई देता है।निदा फ़ाज़ली के अन्दाज़ में ख़ूबसूरती और सलीके का मिश्रण है आप जानते हैं आपको कब-कब क्या कहना है। 'चेहरे' निदा भाई के अपने संस्मरण हैं जो अब हमारा भी हिस्सा हैं।

निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्तूबर 1938 को दिल्ली में हुआ। उनका आरम्भिक जीवन ग्वालियर में गुज़रा। ग्वालियर में रहते हुए उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। एम.ए. उर्दू यहीं से किया। ग्वालियर में रहते हुए उन्होंने उर्दू अदब में अपनी पहचान बना ली थी और 1960 के दौर के वो एक महत्त्वपूर्ण शायर के रूप में स्थापित हो चुके थे। बाद में वो मुम्बई चले गये। निदा फ़ाज़ली की शायरी का पहला संग्रह 'लफ़्जों का पुल' छपते ही उन्हें भारत-पाकिस्तान में जो शोहरत हासिल हुई, ऐसी शोहरत कम शायरों को हासिल होती है।'मुलाक़ातें' किताब के लिए वो काफ़ी विवादास्पद और चर्चित भी रहे। 'खोया हुआ-सा कुछ' उनकी शायरी का वो महत्त्वपूर्ण संग्रह है जिस पर उन्हें 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनकी शायरी के कुछ और महत्त्वपूर्ण संग्रह-मोरनाच, आँखों और ख़्वाबों के दरमियाँ, ज़िन्दगी की तरफ़ तथा शहर में गाँव, तमाशा मेरे आगे (संस्मरण), आँखों भर आकाश, चेहरे। उनके आत्मकथात्मक उपन्यास 'दीवारों के बीच' (खण्ड एक), दीवारों के बाहर (खण्ड दो) अनूठे गद्य और प्रयोगधर्मिता की मिसाल हैं। निदा फ़ाज़ली फ़िल्म उद्योग से जुड़े रहे। उन्होंने देश-विदेश की अनेक साहित्यिक यात्राएँ कीं। उनकी मृत्यु 8 फ़रवरी 2016 को हृदय-गति रुकने से मुम्बई में हुई।

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