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Chhangia Rukkh

by Balbir Madhopuri
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789357750332
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 232
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

यह आत्मकथा-आत्मश्लाघा और बड़बोलेपन की सरहदों से बहुत दूर खड़ी दिखाई देती है। लेखक ने अपनी स्थितियों और परिस्थितियों के भौतिक और मानसिक यथार्थ को सादगी से व्यक्त किया है। आत्मकथा का पूरा कलेवर (भाषा, शिल्प, रचना-दृष्टि और काल) अपने समकालीन साहित्य की चुनौतियों को पूरी ईमानदारी के साथ सामने रखता है। वह समाज की बेहतरी के लिए बड़े सवाल भी खड़े करता है। वह अपने वक़्त के घिनौनेपन से भयाक्रान्त ज़रूर है, पर एक धैर्य भी है, जो उसे जीवन के हर मोड़ पर सँभलने की शक्ति देता है। सामाजिक समाधान में इसकी भूमिका उस गवाह की तरह है, जो जाति-पाँति और छुआछूत व सामाजिक असमानता के ठेकेदारों को कठघरे में खड़ा करके अपना हलफ़िया बयान दर्ज कराता है। इतना ही नहीं, लेखक ने छांग्या रुक्ख में अपने शोषित और पीड़ित जीवन को पूरे साहित्यिक मानदण्डों के साथ व्यक्त कर, सांस्कृतिक धरातल पर उस भाव-बोध का भी अहसास कराया है, जिसे कबीर और नानक ने अपनी साखियों और पदों के ज़रिये सबसे दुखी इन्सान की आत्मा के रूप में दर्शन किये थे। मुझे विश्वास है कि छांग्या रुक्ख का साहित्य की महत्त्वपूर्ण कृति के रूप में निश्चय ही सम्मान और स्वागत होगा और यह कृति मात्र पंजाबी या हिन्दी तक सीमित नहीं रहेगी।—कमलेश्वर

बलबीर माधोपुरी का पंजाबी समकालीन साहित्य में अनुपम स्थान है। इसलिए कि उन्होंने दलित चेतना और संवेदना के माध्यम से अपनी एक स्वतन्त्र पहचान बनायी है।इनकी ग्यारह मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें तीन काव्य-संग्रह और आठ गद्य-संग्रह हैं।इनके सन्दर्भ में उल्लेखनीय बात यह है कि इन्होंने पंजाबी साहित्य अपनी विलक्षण शैली और पृथक रचना कौशल से पाठकों को न केवल अपनी ओर आकर्षित किया है बल्कि उनकी अनुभूतियों को भी गहरे तक छुआ भी है।साहित्यिक क्षेत्र में ऐसा यदाकदा ही घटित होता है। हिन्दी साहित्य जगत में बलबीर का परिचय उनके द्वारा रचित पंजाबी पुस्तकों के हिन्दी अनुवादों के द्वारा पहले ही हो चुका है। इन्हें सरकारी और गैर-सरकारी अनेक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। जुलाई 1955 को पंजाब के ज़िला जालन्धर के गाँव माधोपुर में जन्मे।इन्होंने अब तक 45 से अधिक पुस्तकों का पंजाबी अनुवाद किया है और इतनी पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। अपने साहित्यिक सृजन के बलबूते और अजीत कौर के सहयोग से इन्होंने नेपाल और पाकिस्तान में हुए सार्क लेखक सम्मेलन में भाग लिया। पिछले साल उन्होंने कनाडा के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में भाषण दिये। आत्मकथा छांग्या रुक्ख ने बलबीर की सृजन प्रक्रिया को शिखर तक पहुँचाया है। प्रस्तुत पुस्तक का कई भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेज़ी में आक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, रूसी, पोलिश, उर्दू, शहमुखी और अन्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।सम्पर्क : आर. ज़ैड ए-44, महावीर विहार, पालम, नयी दिल्ली-110045

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