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Culture Yaksan

by Bashir Badra
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170556961
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 434
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 700 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

हर बड़े शायर को कड़ी आजमाइशों से गुजरना होता है। मीर को अपनी अजमत के इजहार के लिए अजगर नामा लिखने की जरूरत पड़ी। ग़ालिब ने क्या क्या मारका आराइयाँ की। फ़ैज़ जिन्हें उनकी जिन्दगी में मकबूलियत और इज्जत मिल गयी उन्हें भी आसानी से यह रुतबा नहीं मिला था। गजिशता तीस बरस में बशीर बद्र ने भी ये सख्तियों झेली हैं। 'इकाई' से लेकर 'आमद' तक उन बड़ी-बड़ी आज़माइशों से वो गुजरे हैं। उनकी ग़ज़लों की पहली किताब 'इकाई' ने हमारे अदब में तहलका मचा दिया था। एक अजीब शान और धूम से बशीर बद्र ग़जल की दुनिया में आये लेकिन इस पर भी बड़े सर्दी गर्म मौसम गुजरे, तब वो यहाँ तक पहुँचे हैं। -प्रो. गोपी चन्द नारंगबशीर बद्र की ग़जल पढ़ते हुए मैंने हर लफ़्ज़ का मुनफ़रद जायका महसूस किया है। खुरदुरे से खुरदुरे और ग़ज़ल बाहर अल्फ़ाज़ भी उनके अशआर में नर्म, मीठे और सच्चे लगते हैं। -कुमार पाशी ग़ालिब के बाद बशीर बद्र के अशआर में जो ताजगी, शगुफ़्तगी, नदरत और बलाग़त है वो शायद उर्दू अदब के पूरे एहदेमाजी में कहीं नहीं –जगतार नयी गजल पर किसी भी उनवान से गुफ्तगू की जाये बशीर बद्र का जिक्र जरूर आयेगा वो एक सच्चे और जिन्दा शायर हैं। शहरयार बशीर बद्र की आवाज़ दूर से पहचानी जाती है। -निदा फ़ाज़लीगजलगो की हैसियत से बशीर बद्र की सलाहियतों पर ईमान न लाना कुछ है मोहम्मद हसन डॉ. बशीर बद्र से जब मिला था तो लगा जिन्दगी ने एक और एहसान किया। उनकी ग़ज़ल आज ही के दौर का एहसास होता है, वह कुल्ले साफ़े पहनी ग़ज़ल नहीं लगती। वे दो शेरों के बाद जैसे एक नुक्ते के गिर्द पूरे एक सबजेक्ट का दायरा बनाने लगते हैं। उनकी ग़ज़ल का शेर सिर्फ़ एक ख़याल नहीं रह जाता, हादसा भी बन जाता है, अफसाना भी मैं डॉ. बशीर बद्र का बहुत बड़ा फैन हूँ। - गुलज़ार

बशीर बद्रनाम सैयद मोहम्मद बशीर तख़ल्लुस बद्र शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी. (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से)।पुरस्कार : वर्ष 1969 में ग़ज़लों के प्रथम प्रकाशित संकलन, 'इकाई' पर उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश द्वारा पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 1973 में गुड़तों के द्वितीय प्रकाशन, 'इमेज' को उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश द्वारा पुरस्कृत किया गया। वर्ष 1985 में गजलों के तृतीय प्रकाशन, 'आमद' को उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश द्वारा पुरस्कार दिया गया। वर्ष 1996 में 'आमद' को बिहार अकादमी द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त।सम्मान : ऑल इण्डिया हिन्दी उर्दू साहित्य अवार्ड कमेटी, 97, लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा सम्मानित ऑल इण्डिया मीर तक़ी मीर अवार्ड, 97, उर्दू अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा सम्मानित वर्ष 1999 में भारत सरकार द्वारा 'पद्मश्री' से सम्मानित ।प्रकाशित कृतियाँ : मैं बशीर हूँ..., उजाले अपनी यादों के, अल्लाह हाफिज़, आस (साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत), चुनिंदा अशआर बशीर बद्र, ग़ज़ल 2000 : धूप जनवरी की फूल दिसम्बर के, आई लव यू भारतकौमी तराना)।

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