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Daag Daag Ujala

by Pragya
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789347043185
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 168
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 170 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

‘दाग़ दाग़ उजाला’ पढ़ी। अद्भुत कहानी। जातिवाद का इतना वीभत्स मानस कि वह अमरीका जाकर भी नहीं बदला, बल्कि ज्यादा क्रूर हुआ है। लेकिन तमाम बाधाओं के बीच माँ अपने बेटे के लिए जिस साहस और विश्वास से लड़ती है, वह कहानी का उत्कर्ष है।

—अवधेश प्रीत

प्रज्ञा उन कथाकारों में हैं जो अपनी धरती से उगते हैं और अपने समय को पढ़ते हैं। जड़खोद कहानी भी इसकी बानगी है जहाँ गंगा के रुप में स्त्री का बदलता बागी चेहरा है तो स्त्री विरोधी समाज की पड़ताल भी है।

—मधु कांकरिया

प्रज्ञा की कहानियों में भूमंडलीय यथार्थ की परत-दर-परत को खोलकर रखने का सफल प्रयास परिलक्षित होता है। भूमंडलीकरण, उदारीकरण, निजीकरण, कारपोरेट कल्चर, पूँजीवादी शक्तियों की स्वार्थपरता, सत्ता और पूँजी की साँठ-गाँठ, उपभोक्तावादी संस्कृति की दुश्वारियों आदि से प्रपीड़ित आम जन-जीवन की व्यथा और उनकी जिजीविषा को कहानियों में अभिव्यक्त किया गया है।

—अरुण होता

प्रज्ञा

दिल्ली में जन्मी प्रज्ञा तक्सीम, मन्नत टेलर्स, रज्जो मिस्त्री, मालूशाही...मेरा छलिया बुरांश, काठ के पुतले जैसे सशक्त कहानी-संग्रहों, गूदड़ बस्ती, धर्मपुर लॉज और काँधों पर घर जैसे महत्त्वपूर्ण उपन्यासों की कथाकार हैं। दाग़ दाग़ उजाला उनका छठा कहानी-संग्रह अब आपके सामने है। कथा-लेखन में अपनी सशक्त पहचान बनानेवाली प्रज्ञा की कहानियों और उपन्यासों को अब तक अनेक सम्मान-पुरस्कार मिले हैं। मीरा स्मृति पुरस्कार, शिवना अन्तर्राष्ट्रीय कथा सम्मान, महेंद्रप्रताप स्वर्ण सम्मान, शिक्षाविद पृथ्वीनाथ भान सम्मान, शोध-कथा कहानी की व्यंग्य यात्रा सर्वश्रेष्ठ रचना पुरस्कार, तक्सीम कहानी को प्रतिलिपि कथा-सम्मान, प्रथम पुरस्कार और पाप, तर्क और प्रायश्चित कहानी को स्टोरी मिरर कथा सम्मान प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

आलोचना के क्षेत्र में भी प्रज्ञा अनेक वर्षों से सक्रिय हैं। नुक्कड़ नाटक : रचना और प्रस्तुति, नाटक से संवाद, नाटक : पाठ और मंचन, कथा एक अंक की, हिन्दी नाटक : स्त्री सन्दर्भ उनकी नाट्यालोचना की किताबें हैं। कहानी-उपन्यासों के पाठ के नए दरीचे वे लम्बे समय से पाठकों के लिए खोलती आ रही हैं। आलोचना के लिए उन्हें वर्ष 2024 का स्पन्दन आलोचना सम्मान मिला है। उनकी किताब हिंदी नाटक : स्त्री संदर्भ को वर्ष 2026 के लिए जयपुर सम्मान मिला है। प्रज्ञा द्वारा सम्पादित किताबों में जनता के बीच : जनता की बात नुक्कड़ नाटक संग्रह और नाटककार भीष्म साहनी दो किताबें शामिल हैं।

साहित्य की अनेक विधाओं में सक्रिय प्रज्ञा की बाल साहित्य पर आधारित चर्चित किताब है—तारा की अलवर यात्रा। इस किताब को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र प्रथम पुरस्कार प्राप्त है। कथेतर साहित्य में उनकी किताब आईने के सामने में वैचारिक लेख शामिल हैं और संस्मरणों की एक किताब कुछ रास्ते कुछ मंज़िलें जल्द प्रकाशित होने वाली है। लगभग तीन दशक से प्रज्ञा दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रही हैं। इस समय वे हिंदी विभाग, किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

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