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Deepshikha

by Mahadevi Verma
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181434166
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 111
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

दीप-शिखा - महादेवी के गीतों का आधिकारिक विषय 'प्रेम' है। पर प्रेम की सार्थकता उन्होंने मिलन के उल्लासपूर्ण क्षणों से अधिक विरह की अन्तरचेतनामूलक पीड़ा में तलाश की। मिलन के चित्र उनके गीतों में आकांक्षित और सम्भावित, अतः कल्पनाश्रित ही हो सकते थे, पर विरहानुभूति को भी उन्होंने सूक्ष्म, निगूढ़ प्रतीकों और धुँधले बिम्बों के माध्यम से ही अधिक अंकित किया। उनके प्रतीकों का विश्लेषण करते हुए अज्ञेय ने कहा : 'उन्हें तो वैयक्तिक अनुभूतियों को अभिव्यक्ति भी देनी थी और सामाजिक शिष्टाचार तथा रूढ़ बन्धनों की मर्यादा भी निभानी थी। यही भाव उन्हें प्रतीकों का आश्रय लेने पर बाध्य करता है।' महादेवी के गीतों में ऐसे बिम्बों की बहुतायत है जो दृश्य रूप या चित्र खड़े करने की बजाय सूक्ष्म संवेदन अधिक जगाते हैं: 'रजत-रश्मियों की छाया में धूमिल घन-सा वह आता' जैसी पंक्तियों में 'वह' को प्रकट करने की अपेक्षा धुँधलाने का प्रयास अधिक है।अन्तिम पृष्ठ आवरण - गूँजती क्यों प्राण-वंशी?शून्यता तेरे हृदय की आज किसकी साँस भरती? प्यास को वरदान करती,स्वर-लहरियों में बिखरती! आज मूक अभाव किसने कर दिया लयवान वंशी?अमिट मसि के अंक सेसूने कभी थे छिद्र तेरे, पुलक के अब हैं बसेरे,मुखर रंगों के चितेरे,आज ली इनकी व्यथा किन उँगलियों ने जान वंशी?मृणमयी तू रच रही यह तरल विद्युत्-ज्वार-सा क्या?चाँदनी घनसार-सा क्या? दीपकों के हार-सा क्या?स्वप्न क्यों अवरोह में,आरोह में दुखगान वंशी?गूँजती क्यों प्राण वंशी?

महादेवी वर्मा - जन्म : 26 मार्च 1907 - निधन : 11 सितम्बर, 1987।महादेवी वर्मा की गणना छायावाद के महान कवि-व्यक्तित्वों में प्रसाद, पन्त और निराला के ठीक बाद होती है। महादेवी जी का महत्त्व इसलिए भी है कि उन्होंने आधुनिक हिन्दी कविता में नारी की अन्तर्वेदना को समाजी-स्वर अभिव्यक्ति दी और उदात्तता से जोड़ा। कविता के साथ-साथ महादेवी वर्मा का गद्य भी बीसवीं सदी के हिन्दी साहित्य में अपनी अलग पहचान रखता है। नारी की स्वतन्त्र इयत्ता और मानवेतर जीव-जन्तुओं के प्रति वत्सल भावों की स्मरणीय अभिव्यक्ति उनके गद्य में हुई है।प्रमुख कृतियाँ (कविता संग्रह) दीपशिखा, नीरजा, रश्मि, सांध्य गीत, यामा, (रेखाचित्र व संस्मरण) अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, मेरा परिवार आदि।(स्त्री विमर्श) श्रृंखला की कड़ियाँ।

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