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Deewaron Ke Bahar

by Nida Fazli
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170558170
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 192
  • Original Price: INR 495.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

आज गैलरी से उसे जिस तरह दुनिया नज़र आती है, उसने उसमें एक साथ कई आकांक्षाएँ जगा दी हैं। वह चाहता है, बचपन की तरह बहुत-से पैसे चिड़ीमार को देकर बहुत-सी चिड़ियाँ उसके पिंजरे से आज़ाद करा दे। वह चाहता है, शाम होते ही किसी क़ब्रिस्तान में जाये और किसी एक क़ब्र पर ढेर सारी अगरबत्तियाँ जलाये और एक साथ कई क़ब्रों पर फ़ातिहा पढ़कर चला आये । वह चाहता है, समन्दर के किनारे किसी सुनसान कोने में बैठकर आती-जाती हुई लहरों पर कई भूले-बिसरे चेहरे बनाये। वह चाहता है, अतीत की किसी ख़ुशी को याद करके इतना हँसे कि आँखों में आँसू चमक उठें। उसे याद आता है, एक लम्बे अरसे से उसे अच्छी तरह रोने की फुर्सत ही नसीब नहीं हुई। जमील फ़ातिमा के गुज़र जाने का जब उसे तार मिलता है, वह दोस्तों में घिरा होता है। मुर्तज्ञा हसन का ग़म रोज़ी-रोटी, दाना-पानी की भाग-दौड़ में कहीं छूट जाता है। और भी कई छोटे-बड़े दुख इसी तरह आते हैं और चले जाते हैं। समय के इस पूरे अन्तराल में उसका सारा रोना आँखों से दूर, उसके अन्दर कहीं जमा होता रहता है और वह लगातार हँसता रहता है।शहर में सबको कहाँ मिलती है राती जगह अपनी इज्जत भी यहाँ हँसने-हँसाने से रही

निदा फ़ाज़लीनिदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्तूबर 1938 को दिल्ली में हुआ। उनका आरम्भिक जीवन ग्वालियर में गुज़रा। ग्वालियर में रहते हुए उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। एम.ए. उर्दू यहीं से किया। ग्वालियर में रहते हुए उन्होंने उर्दू अदब में अपनी पहचान बना ली थी और 1960 के दौर के वो एक महत्त्वपूर्ण शायर के रूप में स्थापित हो चुके थे। बाद में वो मुम्बई चले गये ।निदा फ़ाज़ली की शायरी का पहला संग्रह 'लफ़्ज़ों का 'पुल' छपते ही उन्हें भारत-पाकिस्तान में जो शोहरत हासिल हुई, ऐसी शोहरत कम शायरों को हासिल होती है ।

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