Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Dhadhak Dhuan Dhuan

by Suryanath Singh
Save 35% Save 35%
Current price ₹147.00
Original price ₹225.00
Original price ₹225.00
Original price ₹225.00
(-35%)
₹147.00
Current price ₹147.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350725719
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 126
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

धधक धुआँ धुआँ - सूर्यनाथ सिंह बदलते समय के गतिशास्त्र को चिह्नित करनेवाले कहानीकार हैं। वे हमें ऐसा प्रेक्षण-बिन्दु मुहैया कराते हैं जहाँ से घटनाओं, स्थितियों, चरित्रों और सूचनाओं को व्यापक परिदृश्य के बीच रख कर देखा-समझा जा सकता है। यहाँ से देखने पर चीज़ें अलग-थलग इकाइयों के रूप में नहीं रहतीं, वे सन्दर्भयुक्त होकर इतिहास के पाले में एक सुसंगत अर्थ का निर्माण करती हैं। इस प्रक्रिया में अक्सर उनकी कहानियाँ औपन्यासिक आयाम ग्रहण करने लगती हैं तो क्या आश्चर्य!समकालीन इतिहास को अपनी कहानियों में पकड़ने-समेटने की कोशिश में गाँव इस कहानीकार को बार-बार आकर्षित करता है- एक ऐसा आकर्षण जो आज के कहानीकारों के एक बड़े दायरे में लगभग अनुपस्थित है। सूर्यनाथ सिंह की कहानियाँ राज्यतन्त्र और साहित्यिक मुख्यधारा द्वारा समान रूप से उपेक्षित इस गाँव के कोण से समय के बदलाव को देखना सम्भव करती हैं। संग्रह की ज़्यादातर कहानियाँ उन लोगों से वाबस्ता हैं, जिन्होंने 'उगाया बासमती, खाया कुअरहा।' ऐसे लोगों की ज़िन्दगियों में राज्य, पूँजी, नवउदारवाद और वैश्वीकरण की पैठ क्या-कुछ बदल रही है, इसे रेखांकित करते हुए सूर्यनाथ हिन्दी को ठेठ आज के गाँव की कहानियाँ दे पाते हैं, जिसकी सूरत और सीरत रेणु के गाँव से ही नहीं, शिवमूर्ति और महेश कटारे आदि के गाँव से भी जुदा है।...और सबसे बड़ी बात यह कि बदलाव को यों सजग रूप में दर्ज करते हुए भी सूर्यनाथ अपनी कहानियों के कहानीपन पर समझौता नहीं करते और उन्हें नीरस दस्तावेज़ बनने से बचा ले जाते हैं। -संजीव कुमार

सूर्यनाथ सिंह - जन्म : 14 जुलाई, 1966, सवना, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश।पढ़ाई-लिखाई : इलाहाबाद विश्वविद्यालय और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से।किताबें : कुछ रंग बेनूर (कहानी संग्रह), चलती चाकी (उपन्यास)। 'शेर सिंह को मिली कहानी', 'बर्फ़ के आदमी', 'बिजली के खम्भों जैसे लोग', 'सात सूरज सत्तावन तारे', 'तोड़ी कसम फिर से खाई' (सभी बाल साहित्य)। ‘आशापूर्णा देवी की श्रेष्ठ कहानियाँ', 'गाथा मफस्सिल',देवेश राय, 'खोये का गुड्डा', अवनीन्द्रनाथ ठाकुर और 'राजा राममोहन राय', विजित कुमार दत्त का बांग्ला से हिन्दी अनुवाद। कुछ रचनाओं के बांग्ला, ओड़िया और पंजाबी में अनुवाद हो चुके हैं।पुरस्कार : हिन्दी अकादमी, दिल्ली का बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के प्रकाशन विभाग का भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us