Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Dharti Ki Karvat

by Firaq Gorakhpuri
Save 35% Save 35%
Current price ₹293.00
Original price ₹450.00
Original price ₹450.00
Original price ₹450.00
(-35%)
₹293.00
Current price ₹293.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170556787
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 166
  • Original Price: INR 450.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

धरती की करवट - कविता बड़े साधारण स्वर में आरम्भ होती है। जहाँ तक जनसाधारण और भोले-भाले उन किसानों की भावनाओं को प्रकट किया गया है, वहाँ तक कविता प्रायः अतुकान्त है। भाषा, शैली, कल्पना और वाक्य के स्तर भी अनपढ़ जनता की साधारण चेतना के निकट है। कविता का आरम्भिक हिस्सा गद्यात्मक अधिक है और पद्यात्मक कम । जहाँ से मज़दूरों या कामगारों की बात आरम्भ होती है, कविता वहाँ से तुकान्त हो गयी है और कल्पना का स्तर भी ऊपर उठ जाता है। मानव-सभ्यता के निर्माण में मज़दूरों या कारीगरों का कितना महत्त्वपूर्ण स्थान है, क़लम के सूरमा इस ओर बहुत कम ध्यान देते रहे हैं। कविता के इस हिस्से में इस भ्रम को दूर किया गया है। आगे चलकर जब मशीन युग संसार में स्थापित होता है, वहाँ मशीन के महत्त्व और सभ्यता के निर्माण में मशीन की प्रधानता का वर्णन आया है। और आगे चलकर पूँजीवादी शक्तियों और साम्यवादी शक्तियों के संघर्ष का चित्रण किया गया है। अन्त में उस विश्वव्यापी नूतन जागृति की झलक दिखायी गयी है जो इस युग का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्षण है। इतने जटिल और कठिन विषय पर सरलतम भाषा को कलात्मक बनाने का, उर्दू और आधुनिक हिन्दी में काव्य रचने और सरल भाषा को उच्च साहित्यिक स्तर पर ले जाने का यह पहला प्रयास है। पाठकों को गम्भीरता के साथ इस कविता को पढ़ते हुए इस समस्या पर विचार करना चाहिए कि मज़दूरों के उस जीवन को जिसे साहित्य, कला और कविता से वंचित समझते हैं और जिसे खुरदरा, नीरस और शुष्क समझते हैं, उच्च से उच्च काव्य का विषय बनाने में कवि कहाँ तक सफल हुआ है । कवि इस कविता में पत्थर को पारस कर सका है या नहीं । जहाँ तक भाषा का सम्बन्ध है, मातृभाषा या राष्ट्रभाषा को सफल बनाने में कवि कहाँ तक सफल हुआ है, इसका फ़ैसला कवि नहीं इस कविता के पाठक करें ।

फ़िराक़ गोरखपुरी -1896: अगस्त 28, गोरखपुर में जन्म ।1913 : स्कूल लीविंग परीक्षा में उत्तीर्ण ।1915: एफ़.ए. । म्योर सेंट्रल कॉलेज, इलाहाबाद से ।1917 : जून 18 : पिता मुंशी गोरखप्रसाद 'इबरत' का देहान्त । बी.ए. में प्रान्त भर में चौथा स्थान प्राप्त । प्रान्तीय सिविल सर्विस में डिप्टी कलक्ट्री के पद पर निर्वाचित ।1918 : स्वराज आन्दोलन शुरू होते ही सरकारी पदों का त्याग।1920 : साहित्यिक जीवन का प्रारम्भ ।1920 : दिसम्बर 6 : प्रिंस ऑफ़ वेल्स के आगमन के विरुद्ध आन्दोलन में पण्डित जवाहरलाल नेहरू के प्रस्ताव पर प्रान्तीय कांग्रेस के डिक्टेटर निर्वाचित । फिर स्वयं रफ़ी अहमद क़िदवई के पक्ष में ‘डिक्टेटरशिप' का त्याग। दिसम्बर 13 : डेढ़ बरस की क़ैद। जेल में विशिष्ट साहित्यिक रचनाएँ।1922: अखिल भारतीय कांग्रेस के 1927 तक ‘अंडर सेक्रेट्री' ।1927 : क्रिश्चियन कॉलेज, लखनऊ में अध्यापकनियुक्त।1928 : बी.एन.एस.डी. कॉलेज, कानपुर में अंग्रेज़ी और उर्दू के प्राध्यापक नियुक्त।1930 : आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी एम.ए. में प्रथम स्थान प्राप्त। बिना प्रार्थनापत्र दिये ही अपने मातृ-विद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक नियुक्त। इसी बीच उर्दू साहित्य में सर्वश्रेष्ठ स्थान की प्राप्ति ।1959 : विश्वविद्यालय से अवकाश ।1961 : उर्दू काव्य-संकलन 'गुले नग्मा' साहित्य अकादेमी एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत ।1965 : ‘नेहरू-पुरस्कार' प्राप्त ।1970 : साहित्य अकादेमी के 5वें सदस्य (फ़ेलो) निर्वाचित। ‘गुले-नग्मा' पर भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार ।1981 : 'ग़ालिब अकादमी अवार्ड' ।1982 : नयी दिल्ली में निधन ।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us