Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Do Akalgadh

by Balwant Singh
Save 30% Save 30%
Current price ₹315.00
Original price ₹450.00
Original price ₹450.00
Original price ₹450.00
(-30%)
₹315.00
Current price ₹315.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788180317392
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 448
  • Original Price: INR 450.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 4th Ed.
  • Item Weight: 500 grams
  • BISAC Subject(s): Ancient & Classical

पंजाब के जन-जीवन का जैसा जीवन्त चित्रण बलवन्त सिंह ने किया है, वैसा हिन्दी के अन्य किसी भी लेखक ने नहीं किया है—विशेष रूप से पंजाब के सिखों के जीवन का। उनका पौरुष, शौर्य, स्वाभिमान और सौन्दर्यप्रियता के साथ-साथ उनकी ‘रफनेस’ और ‘रगेडनेस’ को भी बलवन्त सिंह ने अपनी कहानियों और उपन्यासों में बड़े ही कलात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया
है।

बलवन्त सिंह का यह उपन्यास ‘दो अकालगढ़’ तो सिख-जीवन का एक महाकाव्य ही कहा जा सकता है। जीवन की उत्तप्तता से ओत-प्रोत सिखों के लिए किसी-न-किसी चुनौती का होना एक अनिवार्यता की तरह है। जीवन के सद्-असद् पक्ष सदा उनके लिए चुनौतियाँ प्रस्तुत करते रहे हैं। ‘दो अकालगढ़’ की पृष्ठभूमि का निर्माण करनेवाले ‘उच्चा अकालगढ़’ और ‘नीवाँ अकालगढ़’ सिखों की ऐसी ही दो चुनौतियों के प्रतीक हैं।

उपन्यास का नायक दीदार सिंह ऐसी ही चुनौती को सरे-मैदान उछालकर अपनी छवि की नोक पर रोक लेने को आकुल रहता है। अल्हड़ साँड़नी पर सवार होकर वह डाके डालने, मेले घूमने, अपने मित्र की ख़ातिर उसकी प्रेमिका का अपहरण करने तथा ख़ूनख़राबा करने में ही व्यस्त नहीं रहता, बल्कि उसके विशाल, पुष्ट और सोहनियों, हीरों आदि को लुभा लेनेवाले आकर्षक शरीर में एक प्रेमी का नाजुक दिल भी है। अपने ख़ानदान के परम शत्रु सरदार गुलजारा सिंह की अत्यन्त सुन्दर कन्या ‘रूपी’ को जिस कोमलता से वह उठाकर घोड़े पर सवार कर लेता है, उसे कोई देख पाता तो कहता कि हाय! यह हाथ तो बस फूल ही चुनने के लिए हैं, भला इन्हें छवियाँ चलाने से क्या काम। पंजाब के जीवन की ऐसी चटख और मद्धम रंगोरंग की गुलकारी केवल बलवन्त सिंह में ही पाई जाती है।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us