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Doosare Natyashastra Ki Khoj

by Devendra Raj Ankur
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789390678075
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 254
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

दूसरे नाट्यशास्त्र की खोज' प्रसिद्ध रंगकर्मी तथ नाट्यशास्त्र के अध्येता देवेन्द्र राज अंकुर के गहरे चिन्तन-मनन तथा दीर्घ अनुभव का परिणाम है। भरत मुनि के 'नाट्यशास्त्र' की चर्चा तो लगातार होती रही है, परन्तु न तो ऐतिहासिक महत्त्व की इस अद्भुत कृति का अच्छा अनुवाद उपलब्ध रहा है, न उसकी कोई ऐसी व्याख्या जो विद्वानों तथा छात्रों के लिए समान रूप से उपयोगी हो। एक और समस्या यह थी कि 'नाट्यशास्त्र' पर ज़्यादातर विचार सैद्धान्तिक स्तर पर ही हुआ है और नाट्य मंचन की व्यावहारिक आवश्यकताओं की उपेक्षा की गयी है। अंकुर की इस सुविचारित कृति की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह न केवल भरत मुनि के लगभग सभी प्रतिपादनों की विस्तृत व्याख्या करते हैं, बल्कि इस प्रक्रिया में नाट्यशास्त्र के एक नये, समकालीन और आधुनिक विमर्श की खोज का शास्त्र भी विकसित करते चलते हैं। इस तरह, यह भरत मुनि के अद्वितीय योगदान को समझने की कोशिश भी है और उससे एक लम्बी और रचनात्मक जिरह भी। गौरतलब है कि इस जिरह के दौरान लोकधर्मी रंग परम्परा और उसकी विशिष्टता तथा पश्चिमी चिन्तकों की नाट्य दृष्टि का तुलनात्मक विवेचन दूसरे नाट्यशास्त्र की खोज की ठोस भूमिका तैयार करता है। लेखक ने प्रेक्षागृह और पूर्वरंग से शुरू कर पात्र चयन तथा संवाद रूढ़ियाँ आदि सभी पक्षों का मौलिक विश्लेषण करते हुए तीन कालजयी नाटकों अभिज्ञानशाकुन्तलम, मृच्छकटिक और स्वप्नवासवदत्ता की रंग सम्भावनाओं की समीक्षा भी की है, ताकि सिद्धान्त और मंच अभिव्यक्ति के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके। देवेन्द्र राज अंकुर की विद्वत्ता, अध्ययन, अनुभव, विश्लेषण दृष्टि तथा सरल-सरस शैली को देखते हुए बिना किसी संकोच के कहा जा सकता है कि यह पुस्तक नाट्यशास्त्र को पढ़ने और पढ़ाने वालों तथा रंग जगत से जुड़े सभी वर्गों के लिए अत्यन्त उपयोगी होगी।

देवेन्द्र राज अंकुरदिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता के साथ नाट्य कला में डिप्लोमा। बाल भवन, नयी दिल्ली के वरिष्ठ नाट्य प्रशिक्षक । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के सदस्य। भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ में नाट्य-साहित्य, रंग स्थापत्य और निर्देशन के अतिथि विशेषज्ञ। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भारतीय शास्त्रीय नाटक और सौन्दर्यशास्त्र के सहायक प्राध्यापक । 'सम्भव' नयी दिल्ली के संस्थापक सदस्य और प्रमुख निर्देशक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के साथ आधुनिक भारतीय रंगमंच में एक बिलकुल नयी विधा कहानी का रंगमंच के प्रणेता। विभिन्न शौकिया और व्यावसायिक रंगमंडलियों के साथ पूरे भारत और विदेशों में 400 से अधिक कहानियों, 16 उपन्यासों और 60 नाटकों की प्रस्तुति। बांग्ला, उड़िया, कन्नड़, पंजाबी, कुमाऊँनी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, अंग्रेजी, धीवेही, सिंहली और रूसी भाषाओं में रंगकर्म का अनुभव। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा विभिन्न शहरों में संचालित गहन रंगमंच कार्यशालाओं में विशेषज्ञ, निर्देशक तथा शिविर और कार्यशाला निर्देशक के रूप में सम्बद्ध । देश के विभिन्न रंगमंच संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अतिथि परीक्षक । दूरदर्शन के लिए नाट्य रूपान्तरण और निर्देशन । हिन्दी की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में रंगमंच पर लेख और समीक्षाएँ। अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं से कई प्रसिद्ध नाटकों का हिन्दी में अनुवाद। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में स्वतन्त्र रूप से अभिनय, आधुनिक भारतीय नाटक, रंग स्थापत्य, प्रस्तुति प्रक्रिया, दृश्य सज्जा और रंगभाषण के अध्यापन का भी अनुभव। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, क्षेत्रीय अनुसन्धान व संसाधन केन्द्र, बंगलौर के निदेशक। हांगकांग, चीन, डेनमार्क, श्रीलंका, मालदीव, रूस, नेपाल, फ्रांस, मॉरीशस, बांग्लादेश, जापान, सिंगापुर, थाइलैंड, इटली, यू.के., पाकिस्तान, आस्ट्रेलिया इत्यादि देशों में रंगकार्यशालाएँ, प्रस्तुतियाँ और अध्यापन ।प्रकाशित कृतियाँ: दूसरे नाट्यशास्त्र की खोज, ये आदमी ये चूहे, चाणक्य प्रपंच, पहला रंग, रंग कोलाज, दर्शन-प्रदर्शन, अन्तरंग बहिरंग, रंगमंच का सौन्दर्यशास्त्र और पढ़ते, सुनते, देखते। पूर्व प्रोफ़ेसर, विस्तार कार्यक्रम, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय।

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