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Dr. Rammanohar Lohia Ka Samajwadi Darshan

by Tarachand Dixit
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788180317422
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 256
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 352 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

डॉ. लोहिया का समाजवादी चिन्तन देश-प्रेम एवं जन-कल्याण की भावनाओं से ओतप्रोत है, उसका दर्शन नितान्त मौलिक है। जहाँ वे मार्क्स या गांधी से असहमत हैं, उन्होंने अत्यन्त निर्भीकता एवं ईमानदारी से अपनी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने समाजवाद पर अत्यन्त गहराई से सोचा-समझा है। उनके समर्थकों का दावा है कि समाजवाद का अस्थिपंजर तो बहुत पहले से तैयार हो गया था, डॉ. लोहिया ने इसमें ‘फ्लैश एंड ब्लड’ डालकर इसको एक नया जीवन दिया है। उनका समाजवादी दर्शन मानवतावाद की पूर्ण अभिव्यक्ति है। उनके सिद्धान्त और कर्म वे आधार हैं जिन पर एक नवीन विश्व-व्यवस्था, नवीन संस्कृति और नवीन सभ्यता के कल्याणकारी भवन निर्मित हो सकते हैं और उनमें सम्पूर्ण मानवता जाति, धर्म, वंश, लिंग, संस्कृति, सम्पत्ति आदि की भिन्नता (कटुता) से मुक्त हो निवास कर सकती है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि लोहिया जी भारत के ही नहीं, अपितु विश्व के मौलिक राजनीतिक विचारकों में प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं।

प्रस्तुत पुस्‍तक में न तो डॉ. लोहिया की अन्धविश्वास के साथ प्रशंसा की गई है और न ही किसी पूर्वग्रह के साथ आलोचना। जहाँ उनकी प्रशंसा अपेक्षित है वहाँ प्रशंसा की गई है और जहाँ आलोचना आवश्यक है वहाँ आलोचना। इस प्रकार इस दृष्टि को सामने रखकर डॉ. लोहिया के सम्बन्ध में सम्यक् विचार प्रस्तुत किए गए हैं।

इस पुस्तक में डॉ. लोहिया के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालने के अतिरिक्त समाजवाद की विशिष्टताओं को देते हुए डॉ. लोहिया द्वारा चलाए गए समाजवादी आन्दोलन का भी उल्लेख किया गया है। डॉ. लोहिया की सामाजिक साधना, समाजवादी राज्य का स्वरूप एवं उसके प्रशासनिक ढाँचे का तुलनात्मक ढंग से उल्लेख किया गया है। भाषा-विषयक विचारों और लोहिया की मौलिक अधिकार-सम्बन्धी धारणा का विश्लेषण भी किया गया है। विश्व की समाजवादी विचारधारा को डॉ. लोहिया की देन, विश्व-समाजवाद का नवदर्शन, संयुक्त राष्ट्रसंघ का पुनर्गठन, विश्व सरकार, विश्व विकास समिति, अन्तरराष्ट्रीय जाति-प्रथा उन्मूलन, साक्षात्कार का सिद्धान्त, निशस्त्रीकरण आदि विषयों से सम्बन्धित उनकी विचारधाराएँ स्पष्ट की गई हैं। मार्क्स, गांधी और डॉ. लोहिया के समाजवादी दर्शनों का तुलनात्मक विवेचन कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार मार्क्स और गांधी-दर्शनों का संशोधन एवं समन्वय कर डॉ. लोहिया ने उन्हें पूर्ण किया और एक नया सन्तुलन और सम्मिलन का दर्शन जन-मानस को दिया।

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