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Drishtant Ki Deepmala

by Morari Bapu
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789347014673
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

जैसे एक कली समय के स्पर्श से विकसित होकर पूर्ण पुष्प बनती है, वैसे ही प्रत्येक मनुष्य के भीतर भी विकास की असीम संभावनाएँ सुप्त पड़ी हैं। पूज्य मुरारि बापू मानव-चेतना की इस खिलने वाली क्षमता पर अद्‌भुत आस्था रखते हैं। अपनी नौ सौ पैंसठ से भी अधिक रम्य रामकथाओं में उन्होंने निरंतर इस दिशा में साधना की है कि मनुष्य उत्कृष्ट बने और उसकी उज्वलता से समाज भी उजास पाए।साधक के अंतरंग में सत्य, प्रेम और करुणा जैसे सनातन जीवन-मूल्यों का अंकुरण, पोषण और विस्तार हो-इसी हेतु उन्होंने अथक प्रयास किए हैं। प्रस्तुत दृष्टांत-कथाएँ उन्हीं पावन प्रयासों की एक सुगंधित कड़ी हैं

मोरारि बापू के नाम से आज शायद ही कोई अपरिचित होगा। गुजरात के भावनगर जिले के तलगाजरडा गाँव में सन् 1946 की महाशिवरात्रि के दिन आपका जन्म हुआ था। पिता श्री प्रभुदासबापू और माता सावित्रीमा की कोख से साधु जाति में पैदा हुई यह संतान आज पूरे विश्व में गणमान्य रामकथाकार के नाम से प्रसिद्ध हैं। आपने अपने दादाजी पूज्य त्रिभुवनदादाजी, जो आपके सद्गुरुदेव भी हैं, के चरणों में बैठकर रामचरितमानस की आध्यात्मिक शिक्षा पाई है।महुवा जाते समय आपको रामचरितमानस की चौपाइयाँ कंठस्थ करने को दी जाती थीं और फिर शाम को उन्हीं चौपाइयों के अर्थों का अभ्यास और अध्ययन दादाजी के पास होता था। कुछ वर्षों तक महुवा के प्राइमरी स्कूल में शिक्षण कार्य भी किया। इसी दौरान आप जैसे दो परिस्थितियों के बीच जी रहे थे। एक ओर बाहरी जीवन था तो दूसरी ओर आपकी अंतरयात्रा और साधना भी साथ-साथ चल रही थी। बचपन भले ही छोटे गाँव में बिता, लेकिन आज आप पूरे विश्व में रामकथा को लेकर सत्य, प्रेम और करुणा का संदेश फैला रहे हैं।सामाजिक समरसता आपके चिंतन का आधार है। विश्वभर में आपके द्वारा 800 से भी ज्यादा रामकथा हुई हैं। बापू ने सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है और जब भी समाज में कोई त्रासदी या विपदा आईं, उन्होंने दिल खोलकर मदद की है। आप विगत 16 वर्षों से ‘अस्मिता पर्व’ का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें शिक्षा-संस्कृति-कला-संगीत के क्षेत्रों की मूर्धन्य विभूतियों का सम्मान करते है।

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