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Ek Rashtra-Ek Chunav

by Anoop Baranwal ‘Deshbandhu’
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789377478506
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 160 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

एकसाथ चुनाव की अवधारणा के क्या-क्या सकारात्मक एवं नकारात्मक पहलू हैं; यह देश के आर्थिक-विकास एवं राजनैतिक-स्थिरता के लिए कितना उपयोगी है; इसे भारतीय संविधान में स्वीकृत संसदीय प्रणाली एवं संघीय ढाँचे के अन्तर्गत लागू करना कैसे सम्भव है; त्रिशंकु-विधायिका, अल्पमत-सरकार, अविश्वास-प्रस्ताव, राष्ट्रपति-शासन, आपातकाल इत्यादि से उपजने वाली चुनौतियों का समाधान क्या है, इन सवालों का जवाब देती ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ इस विषय पर एक प्रामाणिक पुस्तक है।

पुस्तक में रामनाथ कोविन्द समिति की संस्तुतियों का गहन विश्लेषण करते हुए इन्हें और प्रभावशाली बनाने के उपाय सुझाए गए हैं। द्विचरण-निर्वाचन की संस्तुति को संघीय ढाँचे के अनुकूल बनाने, अविश्वास-प्रस्ताव, राष्ट्रपति-शासन, निर्वाचन-काल और निर्धारित-तिथि, स्थानीय इकाई निर्वाचन जैसे विषयों पर पुस्तक में दिए गए सुझाव संवैधानिक सुधार हेतु अतिमहत्त्वपूर्ण हैं। पुस्तक में उच्च स्तरीय समिति एवं विधि आयोग द्वारा व्यक्त विचारों व सुझावों का भी समालोचनात्मक विश्लेषण किया गया है।

जनता द्वारा पाँच वर्ष के लिए निर्वाचित लोक सभा-विधान सभा को इतनी अवधि तक सुरक्षित बनाए रखने में और विशेष परिस्थिति में सेफ्टीवाल्व सरकार का गठन लोकतांत्रिक तरीके से करने में आर.वी.वी. प्रणाली कैसे उपयोगी है, और
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की अवधारणा को कैसे अचूक एवं दोषरहित बनाया जा सकता है, इनपर इस पुस्तक में प्रस्तुत शोधकार्य राजनैतिक सुधार की दिशा में मील का पत्थर है।

अनूप बरनवाल ‘देशबन्धु’ अनूप बरनवाल का जन्म 15 जुलाई, 1973 (आषाढ़ पूर्णिमा, 2030) को आजमगढ़ (उ.प्र.) के ठेकमाँ बाजार में हुआ। उनके पिता का नाम श्री मदन मोहन एवं माता का नाम श्रीमती उर्मिला देवी है। उन्होंने तिलकधारी महाविद्यालय, जौनपुर से बी.एस-सी. व एल-एल.बी. की पढ़ाई की। एल-एल.बी. में विश्वविद्यालय स्तर पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के लिए उन्हें स्वर्णपदक से विभूषित किया गया। वे वर्ष 1998 से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत कर रहे हैं। वे विधिक पत्रिका ‘वायस आफ लॉ एण्ड जस्टिस’ के संस्थापक और इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रकाशित ‘इण्डियन लॉ रिपोर्ट्स’ के संपादक समूह के सदस्य हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जनहित याचिका (2015) में भारतीय चुनाव आयोग के चुनाव आयुक्तों की चयन-प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं स्वतंत्र बनाने के लिए त्रिस्तरीय समिति के गठन का ऐतिहासिक निर्णय दिया, जो संस्थागत सुधार की दिशा में मील का पत्थर है।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं : ‘भारतीय संविधान की निर्माण यात्रा’, ‘समान नागरिक संहिता : चुनौतियाँ और समाधान’, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव : कितनी चुनौती, कितना विकास’, ‘भारतीय भाषा में हाई कोर्ट की वकालत : न्याय को भाषायी आजादी’, ‘निर्माण-पुरुष डॉ. आंबेडकर की संविधान यात्रा’, ‘तीन तलाक की मीमांसा’, ‘समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग की नकारात्मकता’, ‘बाबा साहेब का संघर्ष-पथ : समाज निर्माण’, ‘संविधान निर्माण, राष्ट्र निर्माण’।

उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा राजनीति शास्त्र विधा के लिए ‘गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार’ (2019) और कानून विधा के लिए ‘आचार्य परशुराम चतुर्वेदी पुरस्कार’ (2018) से सम्मानित किया गया।

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