Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Ek Vaimanik Kee Katha

by Air Chif Marshal P.C. Lal
Save 35% Save 35%
Current price ₹452.00
Original price ₹695.00
Original price ₹695.00
Original price ₹695.00
(-35%)
₹452.00
Current price ₹452.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350721827
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 360
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 600 grams
  • BISAC Subject(s): General

एक वैमानिक की कथा - यह पहला मौका है, जब एक भारतीय वायुसेना अध्यक्ष अपनी यादों और विचारों के साथ पाठकों के सामने आये हैं। भू. पू. वायुसेना अध्यक्ष पी.सी. लाल का कार्यकाल 1939 के अन्त से 1973 की शुरुआत तक, 33 वर्षों में फैला हुआ है। उनके इस कार्यकाल में द्वितीय विश्व युद्ध का बर्मा अभियान, 1947-1948 का कश्मीर-युद्ध, 1962 में चीन के हाथों हुई पराजय तथा 1965 और 1971 भारत-पाक युद्ध शामिल हैं। वायुसेना में उन्हें 4,274 घण्टे की उड़ान और बापिटिज से लेकर सुपरसोनिक तक 58 क़िस्म के हवाई जहाज़ चलाने का अनुभव था। 1965 में वे उप-वायुसेनाध्यक्ष और 1971 में वायु सेनाध्यक्ष बने। बहुत-से पाठकों को उनकी ईमानदारी और बेबाकी अच्छी लगेगी। लेकिन शायद, चन्द लोग जो इन अनुभवों में शामिल थे,उन्हें कुछ असुविधा भी हो।एक प्रकार से यह पुस्तक भारत में विमान-चालन की भी कहानी है, ख़ासकर भारतीय वायुसेना की। दूसरे शब्दों में, यह कहानी है तीनों सेनाओं में सबसे कनिष्ठ वायुसेना की उत्पत्ति, विकास और शौर्य की। चर्चिल ने रॉयल एयर फोर्स के बारे में कहा था : "मानवीय संघर्षों के इतिहास में पहले कभी इतने कम लोगों के प्रति इतने ज़्यादा लोग ऋणी नहीं थे।" यह बात भारतीय वायुसेना के विषय में भी सही है।यद्यपि यह पुस्तक भारतीय वायुसेना का इतिहास होने का दावा नहीं करती, किन्तु इसके बिना उसका कोई भी इतिहास अधूरा रहेगा।

पी.सी. लाल - पद्मविभूषण, पद्मभूषण, डी. एफ. सी., भूतपूर्व वायुसेनाध्यक्ष, एयर चीफ़ मार्शल पी. सी. लाल एक विमान चालक थे, और स्वेच्छया योद्धा नहीं थे। उन्होंने किंग्स कॉलेज, लन्दन से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया था और क़ानून की पढ़ाई कर रहे थे जब द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण पढ़ाई अधूरी छोड़कर उन्होंने वायुसेना में प्रवेश लिया। वे 1944 और 1945 में दो बार बर्मा के सैनिक अभियान में गये थे। दूसरे दौरे में विजयी 7 नम्बर स्क्वाइन के नेतृत्व के लिए उन्हें डी.एफ.सी. सम्मान मिला। फिर उन्होंने वायुसेना मुख्यालय में नीति और योजना विभाग में काम किया। 1950 में वे रॉयल एयरफोर्स स्टाफ कॉलेज, लन्दन से स्नातक हुए। वे कैबिनेट में सेना सचिव थे और फिर एयर ऑफ़िसर कमाडिंग इन चीफ़ ट्रेनिंग कमांड थे। पाँच साल तक उन्होंने इंडियन एयर लाइन्स में काम किया। उन्होंने आठ सम्मिलित वायुसेवाओं (एयर लाइन्स) का काम करना सरल बनाया और पहली बार उसे निरन्तर घाटे में जाने से बचाया। उस समय वे फिर वायुसेना में लौटना चाहते थे, लेकिन रक्षामन्त्री कृष्ण मेनन के साथ उनका दो बार विवाद हुआ, और 30 सितम्बर, 1962 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गयी। इसके बाद भारत-चीन युद्ध हुआ। देश और संसद में काफ़ी शोर-शराबा हुआ था। अब मेनन को गद्दी से उतारने और लाल को वापस बुलाने की बारी थी। तत्पश्चात उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वह हिन्दुस्तान ऐरोनोटिक लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक और बाद में चेयरमैन हुए और उसके बाद वे एयर चीफ़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होने पर उन्हें निजी क्षेत्र में बुला लिया गया। 1980 में एयर इंडिया और इंडियन एयर लाइन्स के संयुक्त अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने अवकाश ग्रहण किया। वे कई वर्षों तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ट्रेनिंग इन इंडस्ट्रियल इंजिनियरिंग के अध्यक्ष और भारतीय रिज़र्व बैंक बोर्ड के सदस्य भी रहे।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us