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Ghasiram Kotwal

by Vijay Tendlukar
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789387409194
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 82
  • Original Price: INR 150.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 100 grams
  • BISAC Subject(s): General

'घासीराम कोतवाल' में एक ऐतिहासिक घटना के सन्दर्भ द्वारा एक काल विशेष की सामाजिक स्थिति और मूलभूत प्रश्नों को प्रस्तुत किया गया है। महाराष्ट्र में पेशवाओं के राजा नाना फड़नवीस, घासीराम कोतवाल, मराठा सरदार आदि विभिन्न सामाजिक इकाइयों के माध्यम से सामाजिक संरचना की जटिलताओं की ओर संकेत किया गया है। ये सभी इकाइयाँ अपनी तयशुदा भूमिकाओं के साथ सामाजिक व्यवस्था में प्रवाहित होती रहती हैं। यदि एक भी इकाई अपने निर्धारित मार्ग से हटती है तो व्यवस्था आन्दोलित हो उठती है। इस आलोड़न का बहुत ही रचनात्मक विवरण इस नाटक में दर्ज है। इस क्रम में रचनाकार न कोई समाधान प्रस्तुत करता है और न ही सही-गलत का कोई निर्णय देता है बल्कि सारे परिदृश्य का खाका खींच कर पाठकों को अपने अर्थ ग्रहण करने के। लिए छोड़ देता है। लोक नाट्य की शैली में लिखी यह रचना, लोक संगीत और अपने भदेस अन्दाज़ में एक दाहक परिवेश को बहुत ही रचनात्मकता से प्रस्तुत करती है।

विजय तेंडुलकर वर्तमान भारतीय रंग-परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण नाटककार के रूप में समादृत श्री तेंडुलकर मूलतः मराठी के साहित्यकार हैं जिनका जन्म 7 जनवरी, 1928 को हुआ। उन्होंने लगभग तीस नाटकों तथा दो दर्जन एकांकियों की रचना की है, जिनमें से अनेक आधुनिक भारतीय रंगमंच की। क्लासिक कृतियों के रूप में शुमार होते हैं। उनके नाटकों में प्रमुख हैं-शांतता! कोर्ट चालू आहे (1967), सखाराम बाइंडर (1972), कमला (1981), कन्यादान (1983)। श्री तेंडुलकर के नाटक घासीराम कोतवाल (1972) की मूल मराठी में और अनूदित रूप में देश और विदेश में छह हज़ार से ज़्यादा प्रस्तुतियाँ हो चुकी हैं। मराठी लोकशैली, संगीत तथा आधुनिक रंगमंचीय तकनीक से सम्पन्न यह नाटक दुनिया के सर्वाधिक मंचित होने वाले नाटकों में से एक का दर्जा पा चुका है। श्री तेंडलकर ने बच्चों के लिए भी ग्यारह नाटकों की रचना की है। उनकी कहानियों के चार संग्रह और सामाजिक आलोचना व साहित्यिक लेखों के पाँच संग्रह प्रकाशित हो। चुके हैं। इन्होंने दूसरी भाषाओं से मराठी में अनुवाद किये हैं, जिसके तहत नौ उपन्यास, दो जीवनियाँ और पाँच नाटक भी उनके कृतित्व में शामिल हैं। इसके अलावा बीस के करीब फ़िल्मों का लेखन। हिन्दी की निशान्त, मन्थन, आक्रोश, अर्धसत्य आदि। दूरदर्शन धारावाहिक स्वयंसिद्ध, प्रिय तेंडुलकर टॉक शो। सम्मान पुरस्कार : नेहरू फेलोशिप (1973-74), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में अभ्यागत प्राध्यापक के रूप में (1979-1981), पद्म भूषण (1984), फ़िल्मफेयर से पुरस्कृत। 19 मई, 2008 को पुणे (महाराष्ट्र) में महाप्रस्थान।

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