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Ghere Se Bahar

by Santvana Nigam
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789388434751
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 450.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): Adventurers & Explorers

चले जाने से कुछ दिन पहले बाबा कहते थे-‘कौतो कौथा बोलार छिलो, बौला होलोना', यानी कितनी ही बातें बतानी थीं, जो बतानी नहीं हुईं। तब से मैं सोचती थी मैं बता कर जाऊँगी। सब नहीं तो कुछ तो-थोड़ा बहुत । सो यह थोड़ी बहुत आपबीती। बहुत कुछ छूट गया जो लिख कर जाने की इच्छा है अगर ज़िन्दगी ने इजाज़त दी और समय दिया।कहना न होगा, ये संस्मरण मेरे हैं बाबा के नहीं। ज़िन्दगी के तजरुबों को हम सब अपनी तरह से जज़्ब कर लेते हैं। मगर शायद इसके बावजूद काफ़ी कुछ ऐसा होता है जो नितान्त व्यक्तिगत नहीं होता। इसीलिए शायद औरों की आपबीतियों में हमें अपने जीवन की गूंज भी सुनाई देती है।ये संस्मरण 2011 और 2012 के दरम्यान लिखे गये मगर पाठकों के सामने अब आ रहे हैं। यह बताना इसलिए ज़रूरी है कि तब से अब के फ़ासले में कई और घटनाएँ घटित हो गयीं। कई सहकर्मी और दोस्त जो तब (2011-2012 में) ज़िन्दा थे अब नहीं रहे। ऐसा ही अन्य कई बातों के बारे में लग सकता है। पाठकों से गुज़ारिश है कि इसे पढ़ते समय यह बात ध्यान में रखें।

सांत्वना निगमजन्म और शिक्षा : देहरादून। मातृभाषा बांग्ला और अपनी खुद की ज़ुबान हिन्दी । अंग्रेज़ी और भाषा विज्ञान में एम.ए.। लम्बे अरसे तक अध्यापन। पहले स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को अंग्रेज़ी साहित्य और बाद में कई दशकों तक विदेशी छात्रों को हिन्दी पढ़ाई। 1967 से हिन्दी में कहानियाँ लिखीं जो धर्मयुग, सारिका आदि पत्रिकाओं में छपीं। तीस साल से दिल्ली की ‘अभियान' नामक नाट्यसंस्था से जुड़ी रहीं। पच्चीस के करीब बांग्ला नाटकों का हिन्दी में अनुवाद किया जो मंचित भी हुए। साहित्य अकादेमी के लिए उत्पल दत्त के तीन नाटक तथा रवीन्द्रनाथ ठाकुर का ‘अचलायतन' नाटक का अनुवाद किया। सम्प्रति तसलीमा नसरीन के उपन्यास ‘ब्रह्मपुत्र के किनारे का अनुवाद छपा है। उन्हीं का ‘निषिद्ध का हिन्दी अनुवाद। महाश्वेता देवी के चर्चित उपन्यास 1084 की माँ' का भी अनुवाद।

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