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Global Samay Mein Kavita

by Priyadarshan
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350726693
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 108
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

इस ग्लोबल समय में कविता बहुत बदल गयी है, हमारा समाज भी बदल गया है। बदलाव की यह गति इतनी तेज है कि इस पर उँगली रखना मुश्किल है। इस तेजी से भागते समय में कविता एक ही साथ जैसे बहुत सारे कालखंडों में और अलग-अलग भू-दृश्यों में जीने-साँस लेने लगी है। यह कविता एक साथ बहुत सारे पाठों को आमन्त्रित करती है। तेजी से बदलते हुए समय पर भी इसकी आँख है और न बदलने को तैयार, ठहरी हुई दुनिया पर भी। इन दोनों सिरों को कई बार वह एक साथ समेटने का जतन भी करती है। इस कविता को पढ़ने के लिए बहुत संवेदनशील और चौकन्नी नजर चाहिए - उसकी सीमाओं को पहचानने के लिए भी। यह किताब ‘ग्लोबल समय में कविता’ यही काम करती है। वह कवि और पाठक के बीच का फासला घटाती है और वह पुल बनाती है जिसके माध्यम से रचना के मूल तन्तुओं तक पहुँचना आसान होता है। समकालीन हिन्दी कविता की महत्त्वपूर्ण कृतियों पर केन्द्रित इस किताब के आलेख काव्यालोचना की पुरानी रूढ़ियों से दूर, अपने आत्मीय, तरल और पारदर्शी गद्य के साथ एक ऐसा पाठ बनाते हैं जिसे पढ़ते हुए पाठक को कविता पढ़ने का सा सुख मिल सकता है।

प्रियदर्शनप्रियदर्शन का जन्म 24 जून, 1968 को राँची में हुआ। राँची विश्वविद्यालय में पढ़ाई और अंग्रेजी में एम.ए. करते हुए लेखन और पत्रकारिता से जो जुड़ाव हुआ, वह अब तक कायम है। 1985 में 'न्यू मेसेज' नाम के पाक्षिक अख़बार से जुड़े, 1987 से 1993 तक 'राँची एक्सप्रेस' से जुड़े रहे और फिर दिल्ली आ गये। यहाँ शुरुआती दौर की फ्रीलांसिंग के बाद 'जनसत्ता' में कई वर्ष सहायक सम्पादक के तौर पर काम किया। फिलहाल 'एनडीटीवी इंडिया' में काम कर रहे हैं।2007 में प्रियदर्शन का पहला कहानी संग्रह 'उसके हिस्से का जादू' प्रकाशित हुआ, 2008 में लेखों का संग्रह 'इतिहास गढ़ता समय' । 2012 में पहला कविता संग्रह 'नष्ट कुछ भी नहीं होता' आया और 2013 में पत्रकारिता पर केन्द्रित लेखों का संग्रह 'ख़बर - बेख़बर' ।प्रियदर्शन ने कई महत्त्वपूर्ण कृतियों के अनुवाद भी किये। इनमें सलमान रुश्दी, अरुंधती रॉय और रॉबर्ट पेन जैसे लेखकों की कृतियाँ भी शामिल हैं। साल 2009 में प्रथम स्पन्दन कथा सम्मान भी मिला ।

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