Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

ग्राम स्वराज्य (Gram Swaraj)

by महात्मा गांधी (Mahatama Gandhi)
Save 30% Save 30%
Current price ₹98.00
Original price ₹140.00
Original price ₹140.00
Original price ₹140.00
(-30%)
₹98.00
Current price ₹98.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788121260497
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Gyan Publishing House
  • Publisher Imprint: Gyan Publishing House
  • Publication Date:
  • Pages: 110
  • Original Price: INR 140.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 253 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

किताब के बारे में ग्राम स्वराज का अर्थ आत्मबल से परिपूर्ण होना है। ग्राम स्वराज्य की अवधारणा समाज को शासनिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में सहभागी बनाने पर जोर देती है। ग्राम स्वराज्य परिकल्पना एक ऐसी व्यवस्था है जो राजनैतिक अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, अराजकता अथवा तानाशाही जैसी समस्याओं का पूर्ण रूप से समाधान करती है। इस परिकल्पना को आदर्श लोकतंत्र भी कहा जा सकता है। स्वयं के उपभोग के लिए स्वयं का उत्पादन, शिक्षा और आर्थिक सम्पन्नता. इससे भी आगे चलकर ग्राम की सत्ता ग्रामीणों के हाथों सौंपी जाए। अगर गांव नष्ट हो गए, तो हिन्दुस्तान भी नष्ट हो जायेगा। दुनिया में उसका अपना मिशन ही खत्म हो जायेगा। गांवों की सेवा करने से ही सच्चे स्वराज्य की स्थापना होगी।ग्राम स्वराज राम-राज्य व्यवस्था की पहली सीढ़ी है़। राम-राज्य मतलब सभी सुखों से परिपूर्ण समाज। परिपूर्ण समाज में स्व निर्णय वाली व्यवस्था ग्राम स्वराज से ही आ सकती है। ग्राम स्वराज शासन की सबसे छोटी इकाई होगी। यह वर्तमान ग्राम सभा की तरह क्षेत्र पंचायत, ब्लॉक जिला पंचायत के अधीन नही होगी। यह प्रशासनिक व्यवस्था राज्य सरकार की तरह स्वतंत्र होगी । यह व्यवस्था हर नागरिक की भागीदारी पर चलेगी। इस व्यवस्था में आम जन के सभी सुख-दुख में ग्राम स्वराज की पूर्ण भागीदारी होगी। यह व्यवस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास से जुड़ी सभी समस्या हल करेगी। कानून व्यवस्था से जुड़े सभी मसले और विवाद ग्राम स्तर पर हल होंगे।

लेखक के बारे में :- मोहनदास करमचन्द गांधी (1869 - 1948) जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से भी जाना जाता है, विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर बैरिस्टर बने। वे भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए आजादी की लड़ाई में सत्याग्रह और अहिंसा को अपना अस्त्र बनाया तथा सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के लिये इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी तथा उसी से भारत को स्वतन्त्रता दिलाई। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। गांधीजी ने अपने दक्षिण अफ्रीका प्रवास में ‘फीनिक्स’ आश्रम की स्थापना की तथा वहाँ से ‘इंडियन ओपिनियन’ अखबार निकाला। स्वदेश लौटकर आजादी की लड़ाई के पथ-प्रदर्शक बने। उन्होंने ‘हरिजन’ सहित कई समाचार-पत्रों का संपादन किया तथा अनेक पुस्तकें लिखीं। बापू ने ‘सत्याग्रह’, ‘सविनय अवज्ञा’, ‘असहयोग आंदोलन’ तथा ‘अंग्रेजो, भारत छोड़ो’ आंदोलनों का नेतृत्व कर भारत को स्वतंत्र कराया। समाज-सुधारक और विचारक के रूप में भी उनका योगदान अनुपम है। जातिवाद, छुआछूत, परदा-प्रथा, बहु-विवाह, विधवाओं की दुर्दशा, नशाखोरी और सांप्रदायिक भेदभाव जैसी अनेक सामाजिक बुराइयों के सुधार हेतु रचनात्मक संघर्ष किया और राष्ट्रीय एकता के लिए हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ घोषित किया। गांधीजी को बापू सम्बोधित करने वाले प्रथम व्यक्ति उनके साबरमती आश्रम के शिष्य थे। सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयन्ती के रूप में तथा पूरे विश्व में अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us