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Hanste Rahe Hum Udas Hokar

by Kishwar Naheed
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789390678938
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 176
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

ये हम गुनहगार औरतें हैंजो अहल-ए-जुब्बा की तमकनत से न रोब खायेंन जान बेचेंन सर झुकाएँन हाथ जोड़ेंये हम गुनहगार औरतें हैं कि जिनके जिस्मों की फ़स्ल बेचें जो लोग वो सरफ़राज़ ठहरें नियाबत-ए-इम्तियाज़ ठहरें वो दावर-ए-अहल-ए-साज़ ठहरेंये हम गुनहगार औरतें हैं कि सच का परचम उठा के निकलें तो झूठ की शाहराहें अटी मिले हैं हर एक दहलीज़ पे सज़ाओं की दास्तानें रखी मिले हैं जो बोल सकती थीं वो ज़बानें कटी मिले हैंये हम गुनहगार औरतें हैं कि अब तआकुब में रात भी आये तो ये आँखें नहीं बुझेंगीकि अब जो दीवार गिर चुकी है उसे उठाने की ज़िद न करना !ये हम गुनहगार औरतें हैं जो अहल-ए-जुब्बा की तमकनत से न रोब खायें न जान बेचें न सर झुकायें न हाथ जोड़ें!-पुस्तक का अंश

किश्वर नाहीद का जन्म सन् 1940 में एक पारम्परिक मध्यवर्गीय घराने में हुआ था। सन् 1949 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर से वह अपने परिवार के साथ लाहौर चली गयीं। उनके पहले कविता संग्रह, लब-ए गोया (1968), ने उन्हें एक नयी बुलन्द आवाज़ के रूप में पहचान दी और पाकिस्तान के नारीवादी आन्दोलन में विशेष भूमिका के साथ स्थापित किया। जनरल ज़िया-उल-हक़ की ज्यादतियों के बीच उनकी कविता हम गुनहगार औरतें फासीवादी सियासत के विरोध का समूहगान बन गयी और तब से अब तक प्रतिरोध का एक स्थायी प्रतीक बनी हुई है। उनके प्रत्येक कविता संग्रह ने मानवाधिकारों और प्रगतिशील सोच वाली बुलन्द आवाज़ के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को बढ़ाया है। उनकी कृतियों में वर्क वर्क आईना, गलियन धूप दरवाज़े, औरत-मर्द का रिश्ता, रात के मुसाफिर, शेर और बकरी, जादू की हँडिया, चाँद की बेटी, आबाद ख़राबा और उनकी आत्मकथा बुरी औरत की ख़ता शामिल हैं। उनकी संगृहीत कृतियाँ कुल्लियात दश्त-ए-कैस में लैला में पायी जा सकती हैं।★★★प्रस्तावना एवं संकलन : रख़्शंदा जलील -रख़्शंदा जलील लेखक, अनुवादक, आलोचक और साहित्यिक इतिहासकार हैं। इनके अनेक अनुवाद संकलन, बौद्धिक आलेख व पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इन्होंने 'प्रोग्रेसिव राइटर्स मूवमेंट एज़ रिफ्लेक्टेड इन उर्दू' पर पीएच.डी. की है जिसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया है।स्त्रीवादी लेखिका डॉ. रशीद जहाँ की आत्मकथा, प्रेमचन्द, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, शहरयार, कृश्न चन्दर और इन्तिज़ार हुसैन की लघुकथाओं, शायरी और उपन्यासों का अनुवाद किया है। इनका निबन्ध संग्रह 'इनविजिबल सिटी' जोकि दिल्ली के प्रसिद्ध स्मारकों पर आधारित है, पाठकों द्वारा पसन्द किया गया है।आप 2002 से 'हिन्दुस्तानी आवाज़' संस्था चला रही हैं, जो हिन्दी-उर्दू साहित्य एवं संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित है।

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