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Hayvadan

by Girish Karnad , Tr. B.V. Karant
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788183613774
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Radhakrishna Prakashan
  • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 132
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 6th Ed.
  • Item Weight: 274 grams
  • BISAC Subject(s): General

स्त्री-पुरुष के आधे-अधूरेपन की त्रासदी और उनके उलझावपूर्ण सम्बन्धों की अबूझ पहेली को देखने-दिखानेवाले नाटक तो समकालीन भारतीय रंग-परिदृश्य में और भी हैं; लेकिन जहाँ तक सम्पूर्णता की अन्तहीन तलाश की असह्य यातनापूर्ण परिणति तथा बुद्धि (मन-आत्मा) और देह के सनातन महत्ता-संघर्ष के परिणाम का प्रश्न है—गिरीश कारनाड का ‘हयवदन’, कई दृष्टियों से, निश्चय ही एक अनूठा नाट्य-प्रयोग है। इसमें पारम्परिक अथवा लोक नाट्य-रूपों के कई जीवन्त रंग-तत्त्वों का विरल रचनात्मक इस्तेमाल किया गया है।

बेताल पच्चीसी की सिरों और धड़ों की अदला-बदली की असमंजस-भरी प्राचीन कथा तथा टॉमस मान की ‘ट्रांसपोज्ड हैड्स’ की द्वन्द्वपूर्ण आधुनिक कहानी पर आधारित यह नाटक जिस तरह देवदत्त, पद्मिनी और कपिल के प्रेम-त्रिकोण के समानान्तर ‘हयवदन’ के उपाख्यान को गणेश-वन्दना, भागवत, नट, अर्धपटी, अभिनटन, मुखौटे, गुड्डे-गुड़ियों और गीत-संगीत के माध्यम से एक लचीले रंग-शिल्प में पेश करता है, वह अपने-आपमें केवल कन्नड़ नाट्य-लेखन की ही नहीं, सम्पूर्ण आधुनिक भारतीय रंगकर्म की एक उल्लेखनीय उपलब्धि सिद्ध हुआ है।

यह नाटक मानव-जीवन के बुनियादी अन्तर्विरोधों, संकटों और दबावों-तनावों को अत्यन्त नाटकीय एवं कल्पनाशील रूप में अभिव्यक्त करता है। प्रासंगिक-आकर्षक कथ्य और सम्मोहक शिल्प की प्रभावशाली संगति ही ‘हयवदन’ की वह मूल विशेषता है जो प्रत्येक सृजनधर्मी-रंगकर्मी और बुद्धिजीवी पाठक को दुर्निवार शक्ति से अपनी ओर खींचती है।

—जयदेव तनेजा

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