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Hindi - Russian Muhavara Kosh

by Chife Editor - (Late) Yogendra Nagpal
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789373488042
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 206
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

मुहावरों की यह विशेषता होती है कि वे लोक-भाषा का अटूट हिस्सा होते हैं। समय और परिवेश के साथ-साथ भाषा बदलती है, मुहावरे भी नए रूप धारण करते जाते हैं। कुछ मुहावरों के मूल रूप में उनमें निहित संज्ञा उर्दू यानी फ़ारसी, अरबी, तुर्की आदि में थी लेकिन लोक-भाषाओं के संपर्क में आने पर इन मुहावरों की संज्ञा लोक-भाषा की संज्ञा में बदल गई है- उदाहरण के तौर पर नज़र के साथ वाले मुहावरे दीठ, डीठ आदि से भी मिलते हैं, ख़ून के मुहावरे लहू से भी मिलते हैं, दिल के कुछ मुहावरे हृदय के साथ भी प्रयोग में सुनाई देते हैं। स्थानीय भाषाओं में गठित लाक्षणिक अर्थों वाले पदबंधों को हमने अपने कोश में इसलिए रखा है ताकि रूसी विद्यार्थियों के लिए वे हर रूप में उपलब्ध रहें और उनके अर्थ खोजने में उन्हें आसानी हो ।

(स्व.) योगेंद्र नागपालयोगेंद्र नागपाल का जन्म मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ, वहीं से उन्होंने स्कूली शिक्षा भी प्राप्त की। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में रूसी भाषा केंद्र के वे पहले छात्रों में से थे। रूसी भाषा में अद्वितीय प्रतिभा-प्रदर्शन के कारण उन्हें उच्च शिक्षा के लिए रूस में पढ़ने का वज़ीफ़ा मिला। उन्होंने मॉस्को राजकीय विश्वविद्यालय से रूसी भाषा-विज्ञान में परास्नातक किया। वे पहले ऐसे अनुवादक थे, जिन्होंने मूल रूसी भाषा से हिंदी में अनुवाद करना शुरू किया था। इससे पहले रूसी साहित्य का अनुवाद आमतौर पर अंग्रेजी से किया जाता था। नागपाल जी सुन्दर भावानुवाद करने के लिए जाने जाते हैं। यह नागपाल जी का अनुवाद के प्रति प्रेम, समर्पण और अनुभव ही था, जिसने उन्हें हिंदी-रूसी मुहावरा कोश का बीड़ा उठाने का जज़्बा और हिम्मत दी । यह एक भगीरथ प्रयत्न था जो पूरी तरह से काम के प्रति समर्पण और लगन से पूरा हुआ। पूरी लगन और समर्पण से काम करना सम्पादक मंडल के सदस्यों ने नागपाल जी के साथ काम करते हुए ही सीखा था और उसी के बलबूते पर उन्होंने नागपाल जी की असमय मृत्यु के बाद इस कोश को सम्पूर्ण किया। नागपाल जी ने प्रचुर मात्रा में उत्कृष्ट अनुवाद किया है। उनके द्वारा अनूदित बाल साहित्य भी बहुत सराहा जाता है। उनके द्वारा अनूदित कुछ कृतियाँ हैं : लेव तल्स्तोय की ‘कज़्ज़ाक' और 'कोहकाफ़ का बंदी', मिखाइल शोलोख़व की 'जो देश के लिए लड़े', निकालाई अस्त्रोव्स्की की 'अग्नि दीक्षा', अर्कादी और गेओर्गी वाइनर की ‘हिमानी सागर में', मामिन सिबिरयाक की 'सुनो कहानी बिटिया रानी', अन्द्रेई प्लातोनव की ‘अनुपम और क्रूर संसार में', वसीली सुखोम्लीन्स्की की 'बाल हृदय की गहराइयाँ', गिनादी बचारव की 'मनुष्य द्वीप नहीं है'। इन रचनाओं को पढ़कर कोई भी यह अंदाज़ा लगा सकता है कि रूसी और हिंदी भाषाओं पर उनकी पकड़ कितनी मज़बूत थी और अनुवाद का हुनर उन्हें बख़ूबी आता था। सम्पादक मंडल आजीवन उनसे सीखी बातों और कामों के लिए उनका आभारी रहेगा।

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