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Hindi Sahitya Aur Sahityakar

by Ramesh Rishikalp
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789372345438
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 220
  • Original Price: INR 495.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): Literary

हिन्दी साहित्य और साहित्यकार नामक पुस्तक में समय-समय पर लिखे गये और संस्थानों में पढ़े गये निबन्ध संकलित हैं। ये सभी निबन्ध विचार और भावनाओं से जन्म लेकर लिखे गये हैं क्योंकि साहित्य की प्रत्येक विधा में विचार और भावनाएँ शामिल होती हैं। विचार और भावनाओं का नाम ही तो साहित्य है। मनुष्य का मन प्रति पल बदलता रहता है इसलिए सोच में भी परिवर्तन की गुंजाइश बनी रहती है। यह लेखक की चेतना का बदलाव भी माना जा सकता है। प्रस्तुत पुस्तक में पाठकों को यह देखने को मिल सकता है। जीवन रुचियों की पेंटिंग है, जिसमें अनेक रंग होते हैं। पाठक ही तय करेंगे कि कौन से रंग किसे पसन्द हैं।

रमेश ऋषिकल्पजन्म : खुर्जा (बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश) शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय (हिन्दू कॉलेज) से बी.ए. (ऑनर्स) और एम.ए. किया। दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एम.फिल. और पीएच.डी. की डिग्रियाँ प्राप्त कीं। ग्रीस की यानीना यूनिवर्सिटी में रहकर ग्रीक भाषा और ग्रीक संस्कृति का अध्ययन किया।अन्य गतिविधियाँ : पन्द्रह वर्षों तक दूरदर्शन कार्यक्रमों के नियमित प्रोग्राम 'कम्पियर' (कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता) रहे। तीन वर्ष तक एन.सी.ई.आर.टी. के नयी कविता के प्रोजेक्ट में रिसर्च फैलो रहे। पाँच वर्ष तक 'जनसत्ता' अख़बार में स्थायी रूप से पत्रकार रहे। अमेरिका की पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के प्रोजेक्ट में सीनियर रिसर्च फैलो रहे।ग्रीस सरकार ने ग्रीक भाषा और संस्कृति के अध्ययन के लिए 'इंटरनेशनल स्कॉलरशिप' देकर ग्रीस में आमन्त्रित किया।जर्मनी की लेप्ज़िग (Leipzig) यूनिवर्सिटी में तीन वर्ष तक प्रोफ़ेसर रहे।दिल्ली विश्वविद्यालय के पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सान्ध्य) में पच्चीस वर्षों तक पढ़ाया, एसोसिएट प्रोफेसर रहे।बेल्जियम की 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ गेंट' में आई.सी.सी.आर. की चेयर पर विज़िटिंग प्रोफेसर रहे। पुनः गेंट यूनिवर्सिटी (बेल्जियम) के निमन्त्रण पर वहाँ जाकर अध्यापन कार्य। आजकल बेल्जियम की गेंट यूनिवर्सिटी में विज़िटिंग प्रोफेसर और फैकल्टी कंसलटेंट के रूप में सम्बद्ध।यात्राएँ: जर्मनी, ग्रीस, बेल्जियम, इंग्लैंड, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, आस्ट्रिया, स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, हंगरी, चेक रिपब्लिक की लम्बी यात्राएँ कीं। अनेक वर्षों तक यूरोप में निवास किया और वहीं रहकर अध्ययन-अध्यापन किया। हिमालय के ऊँचे-ऊँचे दर्रे पार किये। लद्दाख और लाहुल स्पीति की लम्बी यात्राएँ कीं (एलप्स और हिमालय की फोटोग्राफी की)।पुस्तकें : दस पुस्तकें प्रकाशित हैं। चार कविता-संग्रह प्रकाशित।

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