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Hindi Sahitya Mein Sanskritik Samvedna Aur Moolyabodh

by Ed. by Dayanidhi Mishr , Udayan Mishr , Prakash Uday
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789386799548
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

सृजनात्मकता मानव जीवन का बल्कि कहें कि अस्तित्व मात्र का बीज भाव है। संस्कृति की प्रक्रिया सृजनात्मकता के इस बीज भाव के चैतसिक अंकुरण, पल्लवन और सुफल होने की प्रक्रिया है। आचार्य नरेन्द्र देव ने संस्कृति को परिभाषित करते हुए उसे 'मानव चित्त की खेती' कहा है। मानव चेतना विमशात्मक भी होती है और संवेदनात्मक अथवा अनुभूत्यात्मक भी। साहित्य और सांस्कृतिक संवेदना दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। सांस्कृतिक संवेदना साहित्य का उत्स होती है और परिणाम भी। कोई भी रचना समाज में ही पोषित होती है। संस्कृति से प्राप्त कच्चे माल को अपनी कारयित्री प्रतिभा के योग से साहित्यकार नयी आकृति देता है और साहित्य संस्कृति को समृद्ध करता है। हिन्दी साहित्य में मूल्य-चर्चा और देश तथा समाज के स्तर पर सांस्कृतिक संवेदना को पहचानने की कोशिश अपर्याप्त रही। इनमें अक्सर संस्कृति की चर्चा से बचा जाता रहा है। साहित्य में एक तरह का लोकधर्मी रुझान प्रबल होने लगा। साहित्य सामाजिक संस्थाओं जैसे-जाति, धर्म, राजनीति, आदि से मुखातिब होने लगा। कभी-कभी तो वह स्वयं एक सामाजिक संस्था का रूप लेने लगा और राजनीतिक औज़ार बनने लगा। ऐसे में साहित्य के सांस्कृतिक विमर्श की आवश्यकता और प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हए विद्याश्री न्यास ने अपने एक संवत्सर उपकर्म को 'हिन्दी साहित्य में सांस्कृतिक संवेदनाऔर मूल्यबोध' पर केन्द्रित अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं भारतीय लेखक-शिविर के रूप में आयोजित किया। विद्याश्री न्यास इस सारस्वत आयोजन में और इसके संयोजन में सहभागी, सहयोगी सभी सृहृदजनों के प्रति चिरकृतज्ञ है। यह पुस्तक उन्हीं के विद्या वैभव, प्रेम और परिश्रम का प्रतिफल है। यदि हम भारतीय संवेदनात्मक चित्त की विकास प्रक्रिया पर गौर करें तो निस्सन्देह इस चित्त की निर्मित में किसी भी शास्त्र से कहीं अधिक भूमिका साहित्य की है। रामायण और महाभारत ने भारत के सांस्कृतिक चित्त को जितना रचा है। उतना किसी भी शास्त्र ने नहीं। तात्पर्य यह कि साहित्य की प्रक्रिया संस्कृति को किन्हीं शास्त्रीय अवधारणाओं की पुष्टि करने के लिए नहीं बल्कि मानव चित्त की संवेदनात्मकता को पुनर्नवा करने की ओर प्रवृत्त होती है।

दयानिधि मिश्र, जन्म : 01 अक्टूबर, 1948, गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित विभिन्न महाविद्यालयों में 8 वर्षों का अध्यापन-अनुभव। पुलिस उप-महानिरीक्षक पद से अवकाश प्राप्त। सचिव, विद्यार्थी न्यास। उपाध्यक्ष, भारत धर्म महामण्डल। न्यासी, वेणी माधव ट्रस्ट। आचार्य विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में स्थापित विद्याश्री न्यास के तत्त्वाधान में राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, व्याख्यानों, सम्मान समारोहों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन। सम्मान : सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक (1994), हिन्दुस्तान समाचार का भाषा सम्मान (2014), सेवक स्मृति साहित्य श्री सम्मान (2016), वासुदेव द्विवेदी सम्मान (2017)। सम्प्रति। विद्यानिवास मिश्र रचनावली (21 खण्डों में) का सम्पादन। वाराणसी में निवास। मो. : 09415776312उदयन मिश्र, जन्म : 15 दिसम्बर, 1971, गोरखपुर। हरिश्चन्द्र पी.जी. कॉलेज वाराणसी में 24.07.1995 से 19.01.2009 तक मनोविज्ञान का अध्यापन। सम्प्रति : प्राचार्य, श्री बलदेव पी.जी. कॉलेज, बड़ागाँव, वाराणसी। प्रबन्ध सम्पादक, "चिकितुषी', त्रैमासिक शोध-पत्रिका। शोध-पत्रिका 'इण्डियन जर्नल ऑफ़ सोशल साइंस एण्ड सोसाइटी' एवं 'इण्टरनेशनल जर्नल ऑफ़ सोशल साइंस एण्ड सोसाइटी के सम्पादन से सम्बद्ध। इतिहास, परम्परा और आधुनिकता तथा लोक और शास्त्र : अन्वय और समन्वय, मौन की अभिव्यंजना का सहसम्पादन। अन्तरराष्ट्रीय युवा प्रभारी, विश्व भोजपुरी सम्मेलन। आजीवन सदस्य, भारतीय विज्ञान कांग्रेस। पचास से अधिक राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं का संयोजन। ओम हिन्दू मीडिया, हॉलैंड द्वारा आयोजित सिम्पोजियम में 'कॉन्सेप्ट ऑफ़ मेण्टल हेल्थ इन भगवद्गीता' पर व्याख्यान। 'इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ बेसिक एजुकेशन' (3 खण्डों में) के अलावा एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन-सम्पादन। मॉरिशस सरकार एवं इन्दिरा गाँधी सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा 'कर्मयोगी' सम्मान, 2009 एवं संकल्प संस्थान द्वारा 'शिक्षारत्न' से सम्मानित। सम्पर्क : 68, अभिलाषा कॉलोनी, यू.पी. मोटर्स के पीछे, नदेसर, वाराणसी। मो. : 09415225452प्रकाश उदय जन्म : 20 अगस्त, 1964, भोजपुर। हिन्दी विभाग, श्री बलदेव पी.जी. कॉलेज, बड़ागाँव, वाराणसी में अध्यापन। हिन्दी-भोजपुरी कविता-कहानी-समीक्षा के क्षेत्र में सक्रिय। वाचिक कविता : भोजपुरी, हिन्दी की जनपदीय कविता; विद्यानिवास मिश्र संचयिता; इतिहास परम्परा और आधुनिकता तथा लोक और शास्त्र : अन्वय और समन्वय, मौन की अभिव्यंजना : अज्ञेय का सहसम्पादन। भोजपुरी पत्रिका 'समकालीन भोजपुरी साहित्य' और हिन्दी पत्रिका 'प्रसंग' के सम्पादन से सम्बद्ध। सम्पर्क : शिव 5/41, आर-2, लक्ष्मणपुर, शिवपुर, वाराणसी। मो. : 09415290286

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