Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Hool

by Bhalchandra Nemade , Tr. Rangnath Tiwari
Save 30% Save 30%
Current price ₹209.00
Original price ₹299.00
Original price ₹299.00
Original price ₹299.00
(-30%)
₹209.00
Current price ₹209.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788119159017
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 240
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 232 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

हूल में चांगदेव पाटील नाम के एक युवा के जरिए भालचन्द्र नेमाड़े भारतीय जीवन और समाज की कमजोरियों के साथ उसकी जिजीविषा को भी एक बड़े फलक पर अंकित करते हैं। मन का सूक्ष्म और संसार का स्थूल यहाँ साथ-साथ चलता है जिसे उनकी व्यापक विश्वदृष्टि एक महाकाव्यात्मक आयाम देती है।

हूल का चांगदेव एक बदला हुआ चांगदेव है, मुम्बई में अपने विद्यार्थी काल में हुए आदर्शनाशी अनुभवों के बाद अब वह यथार्थ का सामना करने के लिए तैयार है जिसके लिए वह एक छोटे से कस्बे में आकर अध्यापक हो जाता है। ‘कन्वर्टेड’ ईसाइयों के इस विद्यालय में उसे जातिवाद, लिंगभेद और संकीर्ण विभागीय राजनीति के अनेक ऐसे रूप देखने को मिलते हैं जो पुनः उसे उतना ही सम्भ्र‌मित कर छोड़ते हैं, जितना वह यहाँ आने से पहले था। उसे चिढ़ होती है, अपने आप पर दया आती है, और अपने आसपास के लोगों और जीवन पर क्रोध। प्रोफेसर बनने का उसका सुन्दर सपना यहाँ धराशायी हो जाता है।

लेकिन चांगदेव उनमें से नहीं हैं जो धारा के साथ चलने लगें और अन्ततः उसी का हिस्सा हो जाएँ, उनमें से भी नहीं जो शक्तिमन्त संरचनाओं के आगे घुटने टेक दें, और स्वयं के शक्तिशाली होने के लिए अपने अस्तित्वगत मूल्यों को तिलांजलि दे दें। विरोध करने का, खुद के सत्त्व को बचाने का उसका अपना तौर-तरीका है। अन्तस की लाख गुंजलकों के बीच अपनी असहमति की रक्षा करना वह जानता है, इसलिए बेहतर की ओर उठे अपने कदम को वह कभी वापस नहीं लेता। जगत को जिस वृहत रूप में वह देखता है, व्यक्ति और समाज के बीच जो प्राकृतिक सम्बन्ध उसे महसूस होता है, उसके साथ चेतना की अपनी यात्रा को वह सतत जारी रखता है।

हूल स्वतंत्र रूप से भी उतना ही दिलचस्प और पूर्ण पाठ है, जितना कि शृंखला की एक कड़ी के रूप में। यह एक बड़ी विशेषता है।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us