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Indradhanush Ke Kitne Rang

by Dr. Piyush Ranjan
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789395386418
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 160
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 175 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

पुस्तक के पहले संस्करण को पढ़ कर बहुत सारे लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ। आमतौर पर विज्ञान के विद्यार्थी और चिकित्सक भाषा और साहित्य के मामले में रूखे और नीरस माने जाते हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद (‘डॉ. साहब, आपकी कविताएँ भावना-प्रधान और उच्च स्तरीय है’, ‘बहुत रोचक हैं’, ‘बिल्कुल हटकर हैं’, ‘पढ़ कर मजा आ गया’ आदि सरीखे) प्रशंसा का भाव लिये हुए कई बधाई सूचक शब्द सुनने को मिलते रहे,इस संस्करण में एक नए गीत ‘मोहे रँग दे’ को सम्मिलित किया गया है। इस गीत की रिकॉर्डिंग हो चुकी है और फागुन के अवसर पर लोकार्पण करने की योजना है।पुस्तक के बारे में— भावनाओं के कई रंग होते हैं और सभी रंगों का अपना एक अलग ही मजा होता है। जब से जिंदगी को समझा है, जिंदगी को सिर्फ अपने दिल की सुनकर, भावनाओं से परिपूर्ण जीया है। यह पुस्तक इंसान के इंद्रधनुषी भावनाओं के उन रंगों को सहेजने का एक प्रयास है, जिसका अनुभव जिंदगी के किसी-न-किसी मोड़ पर मुझे हुआ है।‘इंद्रधनुष के कितने रंग’ जिंदगी के विविध रंगों को पन्नों पर उतरने की एक कोशिश है। ‘फलसफा’ में जिंदगी के मूल्य को समझते हुए, अपने कृत्य के द्वारा जिंदगी को और भी ज्याद मूल्यवान बनाने का संदेश दिया गया है। ‘जिंदगी दो पल की’ होती है। अफसोस, ज्यादातर लोग इस बात को जब तक समझ पाते हैं, तब तक ये पल बीत गए होते हैं।शपथ-पत्र—रचनाकार इस पुस्तक के विक्रय से होनेवाले समस्त धन-लाभ को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के गरीब मरीजों के इलाज के लिए दान देने की शपथ लेता है।

डॉ. पीयूष रंजन का जन्म बिहार राज्य के बेगूसराय जिले में हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, बरौनी उर्वरक नगर, बेगूसराय में हुई। उन्होंने एम.बी.बी.एस. और एम.डी. की शिक्षा राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान, राँची से प्राप्त की। तत्पश्चात, उन्होंने लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्‍ली से सीनियर रैजिडेंसी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। चिकित्सकीय सेवा का प्रारंभ, उन्होंने देश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा शिक्षण केंद्र, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्‍ली से किया। संप्रति, उसी संस्थान के काय चिकित्सा विभाग में अतिरिक्त प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं । विज्ञान का विद्यार्थी होने और फिर चिकित्सकीय सेवा में आने के बावजूद प्रारंभ से ही उनकी हिंदी भाषा और साहित्य में गहरी रुचि रही है ।'इंद्रधनुष के कितने रंग 'उनकी रचनाओं का पहला संग्रह है, जिसमें उन्होंने अपने गीत, गजल और कविताओं को प्रस्तुत किया है।

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