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Jaan Di Jaye Ya Chay Ho Jaye

by Damodar Mauzo
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789369440610
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 304
  • Original Price: INR 800.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): Literary

‘ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित कोंकणी लेखक दामोदर मावज़ो का ‘जान दी जाये या चाय हो जाये...’ उपन्यास असहिष्णु समय में प्रेम और मानवीयता के सार्वभौमिक मूल्यों की पैरवी करते हुए सामयिक यथार्थ की विविध परतों को बड़ी बारीकी तथा संवेदनशीलता के साथ खोलता है। संश्लिष्टताओं से भरे जीवन में क़दम क़दम पर मनुष्य को सही चुनाव के तनाव से गुज़रना पड़ता है। यह चुनाव ही आपके जीवन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। विपिन पोरोब भी ऐसे कई पलों से गुज़रता है।बन्द दरवाज़ें, बन्द खिड़कियों वाले घर में पले-बढ़े विपिन पोरोब के आत्मान्वेषण की यात्रा को यह उपन्यास बड़े प्रभावी ढंग से हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है। संकीर्ण व्यवस्था की जकड़ में फँसे अपने विद्यार्थी के हुनर को पहचान कर मार्टिन सर स्कूल में पढ़ते समय उसे किताबों की विलक्षण दुनिया से परिचित कराते हैं। बिना किसी दोस्त के बड़े हुए विपिन की सच्ची दोस्त यही किताबें बनती हैं। युवा विपिन के जीवन में चित्रा और फ़ातिमा स्नेह का स्रोत बनकर प्रवाहित होती हैं। लेकिन स्नेहहीन परिवार में पला-बढ़ा, बचपन से अकेलेपन को अपना साथी बना चुका विपिन क्या प्रेम की डोर को अपने हाथ में थाम लेता है? अपने भीतर की तमाम कमियों एवं सम्भावनाओं को पहचानकर क्या वह जीवन की चुनौतियों से भिड़ जाने का आत्मविश्वास अपने भीतर पैदा कर पाता है?

दामोदर मावजो का जन्म 1 अगस्त 1944 को दक्षिण गोवा के माजोर्डा गाँव में हुआ। प्रगतिशील विचार, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता, सहिष्णुता तथा मानवीय मूल्यों के प्रखर समर्थक दामोदर मावजो समकालीन कोंकणी साहित्य-जगत के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। रचनात्मक लेखन के साथ ही गोवा की स्वतन्त्र राज्य के रूप में स्थापना, कोंकणी भाषा तथा गोवा के पर्यावरण की रक्षा से सम्बन्धित आन्दोलनों में वे सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहानी, उपन्यास, निबन्ध, आलोचना, पटकथा लेखन जैसी विविध विधाओं में लेखन कार्य किया है। उनकी कोंकणी में क़रीब 25 किताबें तथा अंग्रेज़ी में एक किताब प्रकाशित हुई है। कई किताबों का सम्पादन करने के साथ ही उन्होंने अनुवाद कार्य भी किया है। उनकी रचनाओं का हिन्दी, अंग्रेज़ी, मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलगु, मलयालम, गुजराती, पुर्तगाली, फ्रेंच आदि भाषाओं में अनुवाद हुआ है।पुरस्कार : ‘कार्मेलीन’ उपन्यास के लिए 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' (1983) जिसका अब तक चौदह भाषाओं में अनुवाद हुआ है। सुनामी सायमन उपन्यास के लिए विश्व कोंकणी केन्द्र का श्रीमती वी.वी.पै पुरस्कार प्राप्त। 'गोवा राज्य सांस्कृतिक पुरस्कार' तथा कई अन्य पुरस्कार प्राप्त। फ्रैंक ओ कॉनर अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार के लिए तेरेझास मैन का नामांकन | 57वें 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित (2022 )।★★★रमिता गुरवजन्म : 6 मार्च 1972, म्हापसा-गोवा ।सहयोगी प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, सेंट झेवियर्स महाविद्यालय, म्हापसा-गोवा।कोंकणी, मराठी, हिन्दी में आलोचनात्मक लेख प्रकाशित।दामोदर मावज़ो के कोंकणी कहानी-संग्रह सपनमोगी का हिन्दी अनुवाद स्वप्न प्रेमी। दामोदर मावज़ों की प्रतिनिधि कोंकणी कहानियों का हिन्दी अनुवाद मन्नत और अन्य कहानियाँ। रंगमंच से जुड़ाव, कई नाटकों में अभिनय| कहानी, नाटक, निबन्ध एवं कविता वाचन के कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण।कोंकणी तथा हिन्दी में आकाशवाणी, पणजी, म्हादय चैनल से वार्ता, कहानी एवं कविता प्रसारण।

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