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Jagatguru Kaministacharya Prayagpeethadheeshwar

by Kirtikumar Singh
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388434720
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 256
  • Original Price: INR 399.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

यह उपन्यास समकालीन हिन्दी साहित्य-जगत् की असाधारण घटना है। हर वर्ग एवं समाज को अपनी लेखनी की नोक पर रखने वाला रचनाकार किस प्रकार पतित होकर घृणास्पद स्थिति तक पहुँच गया है और सैद्धान्तिकता का लबादा ओढ़कर वह कैसी-कैसी नाटकबाज़ी करता है, इसकी बानगी इस उपन्यास में दिखाई देती है। इसमें रचनाकारों की मनःस्थिति का वर्णन है। सच और ज्ञान का दम्भ भरने वाला रचनाकार अन्दर से खोखला है और अपने इस खोखलेपन को ढंकने के लिए उसने साहित्य जगत् में अनेक टापुओं का निर्माण कर रखा है। ऐसा नहीं है कि वह सच नहीं जानता है लेकिन किसी में भी अपनी साहित्य बिरादरी का सच उजागर करने का माद्दा नहीं है। यह वही कर सकता है जो ‘सीकरी' को ‘पनहीं' से अधिक महत्त्व न दे। अन्यथा पुरस्कार, यशोकांक्षा, गुटबाज़ी में यह वर्ग इतना अधिक जकड़ गया है कि वह इन्हीं पतनोन्मुख मनोवृत्तियों का क्रीतदास हो गया है। लोगों के बीच विद्वत्ता एवं नैतिकता का लबादा ओढ़े यह साहित्यकार कितना अधिक नीचे गिर सकता है, इसे इलाहाबादी साहित्यिक परिवेश के दृष्टान्त द्वारा प्रस्तुत किया गया है। साहित्यकारों के आन्तरिक खोखलेपन पर यह दाहक टिप्पणी है। इक्कीसवीं सदी में तमाम उपन्यासकारों ने विविध विषयों पर उपन्यास लिखे लेकिन यह पक्ष छूटा दिखाई देता है। निश्चित रूप से कीर्तिकुमार सिंह का यह उपन्यास इस रिक्त स्थान की पूर्ति है।

कीर्तिकुमार सिंह जन्म : 19 मई 1964 को इलाहाबाद जिले के कोटवा नामक गाँव में। शिक्षा : बी.ए., एम.ए. और डी. फिल. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से। शिक्षा में एक मेधावी छात्र के रूप में कई स्वर्ण पदक प्राप्त, जिनमें से एक स्वर्ण पदक 'संयुक्त राष्ट्र संघ' से। कविता, कहानी, लघुकथा, उपन्यास और दर्शन के क्षेत्र में सक्रिय। प्रकाशित कृतियाँ : 'उस कविता को नमस्कार करते हुए', 'कीर्तिकुमार सिंह की दार्शनिक कविताएँ', 'मन्दाकिनी घाटी', 'दिल्ली के दो-पाया कुत्ते' (कविता संग्रह); 'शिवा' (कविता-कैसेट); 'बस इतना', 'दास्तान दर दास्तान', 'दारागंज वाया कटरा', 'आप बहुत...बहुत...सुन्दर हैं', 'असाधारण प्रेम कथाएँ' (कहानी संग्रह); 'एक टुकड़ा रोशनी', 'अधूरी दास्तान', 'छोटी सी बात' (लघुकथा संग्रह); 'पुरस्कार दर्शन', 'भारतीय दर्शन में दुःख और मुक्ति' (दार्शनिक चिन्तन); उपन्यास (शीघ्र प्रकाश्य)। सम्प्रति : अध्यक्ष, दर्शन विभाग, श्यामाप्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) फाफामऊ, इलाहाबाद। सम्पर्क : 15/6, स्टैनली रोड, सिविल लाइन्स, इलाहाबाद-211001 (उत्तर प्रदेश)।

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