Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Jeebachh Ka Beta Buddha!

by Chandrakishore Jaiswal
Save 30% Save 30%
Current price ₹175.00
Original price ₹250.00
Original price ₹250.00
Original price ₹250.00
(-30%)
₹175.00
Current price ₹175.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789347265303
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Radhakrishna Prakashan
  • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 152
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 160 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

‘जीबछ का बेटा बुद्ध!

जीबछलाल मुँह बिचकाते हुए सामने खड़े बेटे दीपक से बोले, “जो बुद्ध होगा वह जीबछ का बेटा नहीं हो सकता।” दीपक ने उन्हें भरपूर निगाहों से देखा और उसके पूरे बदन में सनसनाहट होने लगी।

किस्सागोई के माहिर लेखक चन्द्रकिशोर जायसवाल का यह उपन्यास दो पीढ़ियों के आपसी द्वन्द्व की कथा है, साथ ही दो जीवन-मूल्यों की भी। पिता जीबछलाल नेता हैं, सक्षम हैं, सम्पन्न हैं और हर उचित-अनुचित स्रोत से धन इकट्ठा करने को अपना कर्तव्य और अधिकार मानते हैं। उनका बेटा दीपक बचपन से ही धन और शक्ति को हेय दृष्टि से देखता आया है। वह समाज के लिए, मनुष्यता के लिए कुछ ऐसा करना चाहता है जो सबके लिए कल्याणकारी हो, और जिससे उसके मन को सन्तोष मिले।

जीबछलाल हर दृष्टि से समर्थ हैं तो उनका प्रचार-तंत्र भी ऐसा है कि बेटा लम्बे समय तक उन्हें अपना आदर्श मानता रहता है, उसे लगता है वे देवता हैं, दुर्बल-दुखियों के त्राता; कि मेरे भगवान तो मेरे घर ही में हैं। लेकिन आखिर एक दिन सब साफ हो जाता है। जीबछलाल बेटे को सब बता देते हैं, यह भी कि उन्हें बुद्ध जैसा नहीं, अपने जैसा बेटा चाहिए, और दीपक स्तब्ध होकर सोचता रह जाता है कि जो सामने खड़ा है, यह आदमी हत्यारा भी है! वह अपनी माँ की गोद में सिर रखकर कहता है, “बोलो, माँ...कि मैं जीबछलाल का बेटा नहीं हूँ।”

पिता-पुत्र के इस द्वन्द्व के बीच आज के समय का, आज के सामाजिक-राजनीतिक तंत्र का सारा कलुष भी हमारे सामने उघड़ता चला जाता है।

रोचक कथा-कहन से बनी एक विचार-सम्पन्न औपन्या‌सिक कृति।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us